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Lakhimpur Kheri News: 150 वन कर्मियों की निगरानी में होगी गैंडों की रिहाई

संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Thu, 19 Mar 2026 01:15 AM IST
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The release of the rhinos will be under the supervision of 150 forest personnel
पुनर्वासन क्षेत्र में तैयारियों का जायजा लेती डीटीआर एफडी और डीडी। स्त्रोत- वन विभाग।
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बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) में गैंडा पुनर्वासन योजना फेज-एक के तहत छह गैंडों को जंगल में मुक्त करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। पूरी कार्यवाही को ऑपरेशन की तरह अंजाम देने के लिए चार विशेष टीमें बनाई गई हैं, जिनमें 150 वनकर्मी और विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं।
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छह गैंडों को 21 मार्च से बाड़ से मुक्त किया जाएगा। इससे पहले वर्ष 2024-25 में छोड़े गए चार गैंडों के लिए 130 कर्मियों की तैनाती की गई थी। इस बार टीम और संसाधनों को और मजबूत किया गया है।
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बुधवार को दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी डॉ. एच राजामोहन और डीडी दुधवा जगदीश आर ने सोनारीपुर रेंज पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया। अधिकारियों ने बताया कि चिह्नित 16 गैंडों में से छह को जंगल में छोड़ा जाएगा, जिनमें चार मादा और दो नर शामिल हैं।
गैंडों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) के विशेषज्ञ पशु चिकित्सक डॉ. जी अरेंद्र और शिवशंकर विश्वास रेडियो कॉलर लगाएंगे। इसके जरिये उनकी लोकेशन और मूवमेंट की लगातार निगरानी की जाएगी।
पूरे ऑपरेशन में दुधवा के उप निदेशक जगदीश आर के निर्देशन में एसडीओ निघासन मनोज तिवारी, बेलरायां के दीपक पांडे, किशनपुर अभयारण्य के वार्डन धर्मेंद्र द्विवेदी, दुधवा वार्डन महावीर सिंह, डॉ. मुदित गुप्ता, दबीर हसन, स्टेनो रमेश कुमार, आउटरीच प्रोग्रामर विपिन सैनी, रेंजर आरके शर्मा, डिप्टी रेंजर सुरेंद्र कुमार, पशु चिकित्सक डॉ. दयाशंकर, डॉ. दीपक वर्मा, डॉ. तलहा, समन्वयक नाजरून निशां समेत वनकर्मी, महावत और वॉचर शामिल हैं।
चारों टीमें गैंडों के चिह्नीकरण, ट्रैंक्युलाइजेशन, राइनो कैप्चर, लॉजिस्टिक ट्रांसपोर्ट, रिलीज, डार्ट ऑपरेशन, पहचान, निगरानी और गतिविधियों की ट्रैकिंग के साथ-साथ आसपास के ग्रामीणों में जागरूकता का काम भी करेंगी।
गैंडों की रिहाई में असम के प्रसिद्ध गैंडा विशेषज्ञ डॉ. केके शर्मा (प्रो. एंड हेड, डिपार्टमेंट ऑफ सर्जरी एंड रेडियोलॉजी, कॉलेज ऑफ वेटनरी साइंसेज, गुवाहाटी) के निर्देशन में पशु चिकित्सकों की टीम अहम भूमिका निभाएगी।
पूरे ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए तकनीकी, प्रशासनिक और फील्ड स्तर पर व्यापक समन्वय स्थापित किया गया है।
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