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Lalitpur News: ज्ञान भारतम् अभियान में मिलीं 5,240 दुर्लभ पांडुलिपियां, डिजिटल रूप में सहेजी जा रहीं
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जिले में प्राचीन इतिहास, धर्म, आयुर्वेद, वेद-पुराण और संस्कृति से जुड़ी 5,240 दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियों की पहचान की गई है। सौ वर्ष से अधिक पुरानी इन पांडुलिपियों को भारत सरकार के ज्ञान भारतम् अभियान के तहत डिजिटल रूप में संरक्षित किया जा रहा है, ताकि भविष्य में इनके अध्ययन, शोध और संरक्षण का कार्य किया जा सके।
जनपद के विभिन्न मंदिरों, मठों और निजी संग्रहों में सुरक्षित रखी गई इन पांडुलिपियों की खोज का कार्य पुरातत्व एवं पर्यटन विभाग के सहयोग से चल रहा है। सर्वेक्षण के दौरान मिली पांडुलिपियां धर्म, दर्शन, संस्कृत साहित्य, आयुर्वेद और बुंदेलखंड की सांस्कृतिक विरासत से संबंधित हैं। इनमें कई पांडुलिपियां विभिन्न भाषाओं और लिपियों में लिखी गई हैं, जो क्षेत्र की समृद्ध साहित्यिक परंपरा का प्रमाण हैं।
ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखने और आमजन तक उनकी जानकारी पहुंचाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय पांडुलिपि मिशनों के माध्यम से इनका डिजिटलीकरण किया जा रहा है। दस्तावेजों का सूचीकरण कर उन्हें डिजिटल स्वरूप में संरक्षित किया जा रहा है। ज्ञान भारतम् राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के तहत केंद्र सरकार ने एक मोबाइल एप विकसित किया है। इसके माध्यम से मठों, मंदिरों और निजी संग्रहों में रखी पांडुलिपियों का विवरण और डिजिटल रिकॉर्ड ज्ञान भारतम् पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। जिले में अब तक खोजी गई अधिकांश पांडुलिपियां जैन एवं हिंदू मंदिरों, ताम्रपत्रों, धार्मिक ग्रंथों और आयुर्वेद संबंधी साहित्य से प्राप्त हुई हैं।
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पर्यटनविद फिरोज इकबाल ने बताया कि ये पांडुलिपियां जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती हैं। अभियान के तहत सौ वर्ष से अधिक पुरानी पांडुलिपियों की खोज कर उन्हें ज्ञान भारतम् एप पर सुरक्षित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि डिजिटलीकरण के बाद भी पांडुलिपियों का स्वामित्व मूल धारक के पास ही रहेगा। आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ टीम इनके संरक्षण का कार्य भी करेगी।
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इन स्थानों से मिलीं पांडुलिपियां
सीरोनजी जैन मंदिर से 95, डॉ.ओमप्रकाश शास्त्री के पास पुरानी रामायण, शास्त्र व ग्रंथों से संंबंधित 15, पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर बिरधा से 06, दिगंबर जैन मंदिर खजुरिया में 200, नेमिनाथ दिसंबर जैन मंदिर राजपुर से 30, पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर साढ़ूमल से 64, पंडित हीरालाल शास्त्री पुस्तकालय साढ़ूमल से 92, पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर सौंरई से 65, कुंवर महेंद्र सिंह बुंदेला जाखलौन के पास से 28, अनूप कुमार नामदेव के पास से आयुर्वेद एवं अन्य 60, दिगंबर जैन मंदिर अतिशय चंद्र प्रभु जिनालय गदयाना से 115, दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र पवा गिरी से 53, मार्कंडेश्वर मंदिर तालाबपुरा से 315 पांडुलिपियों एकत्रित की गई हैं।
ललितपुर। जिले में प्राचीन इतिहास, धर्म, आयुर्वेद, वेद-पुराण और संस्कृति से जुड़ी 5,240 दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियों की पहचान की गई है। सौ वर्ष से अधिक पुरानी इन पांडुलिपियों को भारत सरकार के ज्ञान भारतम् अभियान के तहत डिजिटल रूप में संरक्षित किया जा रहा है, ताकि भविष्य में इनके अध्ययन, शोध और संरक्षण का कार्य किया जा सके।
जनपद के विभिन्न मंदिरों, मठों और निजी संग्रहों में सुरक्षित रखी गई इन पांडुलिपियों की खोज का कार्य पुरातत्व एवं पर्यटन विभाग के सहयोग से चल रहा है। सर्वेक्षण के दौरान मिली पांडुलिपियां धर्म, दर्शन, संस्कृत साहित्य, आयुर्वेद और बुंदेलखंड की सांस्कृतिक विरासत से संबंधित हैं। इनमें कई पांडुलिपियां विभिन्न भाषाओं और लिपियों में लिखी गई हैं, जो क्षेत्र की समृद्ध साहित्यिक परंपरा का प्रमाण हैं।
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ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखने और आमजन तक उनकी जानकारी पहुंचाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय पांडुलिपि मिशनों के माध्यम से इनका डिजिटलीकरण किया जा रहा है। दस्तावेजों का सूचीकरण कर उन्हें डिजिटल स्वरूप में संरक्षित किया जा रहा है। ज्ञान भारतम् राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के तहत केंद्र सरकार ने एक मोबाइल एप विकसित किया है। इसके माध्यम से मठों, मंदिरों और निजी संग्रहों में रखी पांडुलिपियों का विवरण और डिजिटल रिकॉर्ड ज्ञान भारतम् पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। जिले में अब तक खोजी गई अधिकांश पांडुलिपियां जैन एवं हिंदू मंदिरों, ताम्रपत्रों, धार्मिक ग्रंथों और आयुर्वेद संबंधी साहित्य से प्राप्त हुई हैं।
पर्यटनविद फिरोज इकबाल ने बताया कि ये पांडुलिपियां जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती हैं। अभियान के तहत सौ वर्ष से अधिक पुरानी पांडुलिपियों की खोज कर उन्हें ज्ञान भारतम् एप पर सुरक्षित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि डिजिटलीकरण के बाद भी पांडुलिपियों का स्वामित्व मूल धारक के पास ही रहेगा। आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ टीम इनके संरक्षण का कार्य भी करेगी।
इन स्थानों से मिलीं पांडुलिपियां
सीरोनजी जैन मंदिर से 95, डॉ.ओमप्रकाश शास्त्री के पास पुरानी रामायण, शास्त्र व ग्रंथों से संंबंधित 15, पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर बिरधा से 06, दिगंबर जैन मंदिर खजुरिया में 200, नेमिनाथ दिसंबर जैन मंदिर राजपुर से 30, पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर साढ़ूमल से 64, पंडित हीरालाल शास्त्री पुस्तकालय साढ़ूमल से 92, पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर सौंरई से 65, कुंवर महेंद्र सिंह बुंदेला जाखलौन के पास से 28, अनूप कुमार नामदेव के पास से आयुर्वेद एवं अन्य 60, दिगंबर जैन मंदिर अतिशय चंद्र प्रभु जिनालय गदयाना से 115, दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र पवा गिरी से 53, मार्कंडेश्वर मंदिर तालाबपुरा से 315 पांडुलिपियों एकत्रित की गई हैं।