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Lalitpur News: कार्यक्षेत्र में निवास न करने वाली आशाओं पर होगी कार्रवाई
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जनपद के ग्रामीण क्षेत्र में टीकाकरण, हाई रिस्क प्रग्नेंसी, प्रसव पूर्व जांच समय पर नहीं हो पा रहीं हैं। साथ ही अन्य कार्यक्रम भी प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में अब कार्य क्षेत्र में निवास न करने वाली आशाओं को चिह्नित कर हटाया जाएगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही जांच की जाएगी।
बीते माह आयोजित हुई जिला स्तरीय समीक्षा में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) चिह्नीकरण औसत से अधिक कम पाया गया। विभागीय आंकड़ों के अनुसार गर्भधारण के बाद पंजीयन की संख्या का लगभग 15 फीसदी एचआरपी चिह्नीकरण होना चाहिए। लेकिन, लक्ष्य 15 फीसदी के सापेक्ष महज 11.17 ही की जा सकी है। इसके अलावा टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की देखभाल, प्रसव पूर्व जांच, शिशु टीकाकरण, गर्भधारण के बाद पंजीयन में कमी समेत अन्य कार्यक्रम में सुधार नहीं आ रहा है।
अब स्वास्थ्य विभाग ने इन कार्यक्रम की लगातार निगरानी कर लक्ष्य प्राप्त करने और योजनाओं का लाभ देने के लिए कमर कस ली है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि आशाएं अपने कार्य क्षेत्र में नहीं रह रहीं हैं। महज किसी कार्यक्रम में ही जाती हैं। इससे गर्भवती महिलाओं का समय से पंजीयन, जांच व एचआरपी, टीकाकरण, देखभाल आदि अन्य कार्य समय पर नहीं हो रहे हैं। इसके चलते क्षेत्र में न रहने वाली आशाओं के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
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अपने कार्य क्षेत्र में निवास न करने वाली आशाओं को चिह्नित किया जाएगा। इसके साथ ही हटाया जाएगा।
- डॉ. इम्तियाज अहमद, सीएमओ, ललितपुर
ललितपुर। जनपद के ग्रामीण क्षेत्र में टीकाकरण, हाई रिस्क प्रग्नेंसी, प्रसव पूर्व जांच समय पर नहीं हो पा रहीं हैं। साथ ही अन्य कार्यक्रम भी प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में अब कार्य क्षेत्र में निवास न करने वाली आशाओं को चिह्नित कर हटाया जाएगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही जांच की जाएगी।
बीते माह आयोजित हुई जिला स्तरीय समीक्षा में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) चिह्नीकरण औसत से अधिक कम पाया गया। विभागीय आंकड़ों के अनुसार गर्भधारण के बाद पंजीयन की संख्या का लगभग 15 फीसदी एचआरपी चिह्नीकरण होना चाहिए। लेकिन, लक्ष्य 15 फीसदी के सापेक्ष महज 11.17 ही की जा सकी है। इसके अलावा टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की देखभाल, प्रसव पूर्व जांच, शिशु टीकाकरण, गर्भधारण के बाद पंजीयन में कमी समेत अन्य कार्यक्रम में सुधार नहीं आ रहा है।
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अब स्वास्थ्य विभाग ने इन कार्यक्रम की लगातार निगरानी कर लक्ष्य प्राप्त करने और योजनाओं का लाभ देने के लिए कमर कस ली है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि आशाएं अपने कार्य क्षेत्र में नहीं रह रहीं हैं। महज किसी कार्यक्रम में ही जाती हैं। इससे गर्भवती महिलाओं का समय से पंजीयन, जांच व एचआरपी, टीकाकरण, देखभाल आदि अन्य कार्य समय पर नहीं हो रहे हैं। इसके चलते क्षेत्र में न रहने वाली आशाओं के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
अपने कार्य क्षेत्र में निवास न करने वाली आशाओं को चिह्नित किया जाएगा। इसके साथ ही हटाया जाएगा।
- डॉ. इम्तियाज अहमद, सीएमओ, ललितपुर