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Lalitpur News: भ्रष्टाचार व महिला कर्मियों के उत्पीड़न के आरोप में मुख्य आरक्षी बर्खास्त
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विभागीय जांच में दोषी पाए जाने पर बाद जालौन निवासी जितेंद्र यादव के खिलाफ हुई कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। पुलिस विभाग में कार्यरत मुख्य आरक्षी जितेंद्र यादव निवासी डकोर जनपद जालौन को भ्रष्टाचार और महिला पुलिसकर्मियों के मानसिक उत्पीड़न के आरोपों में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) झांसी की जांच में दोषी पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई।
अपर पुलिस अधीक्षक कालू सिंह के अनुसार, वर्ष 2025 में प्रधान लिपिक शाखा में तैनाती के दौरान आरोपी मुख्य आरक्षी अवकाश संबंधी पत्रावलियों के निस्तारण के नाम पर पुलिसकर्मियों से अवैध रूप से धन की मांग करता था। आरोप है कि एक महिला सहायक उपनिरीक्षक (लिपिक) को इसकी जानकारी होने पर उसने अलग-अलग नंबरों से फोन कर मानसिक उत्पीड़न किया और धमकियां दीं। साथ ही महिला कर्मी की छवि खराब करने के लिए अफवाहें भी फैलाने का प्रयास किया।
प्रारंभिक जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर मामले की विस्तृत जांच अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) झांसी डॉ. अरविंद कुमार को सौंपी गई। जांच में दोषी पाए जाने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस अधीनस्थ श्रेणी (दंड एवं अपील) नियमावली के तहत मुख्य आरक्षी को सेवा से पदच्युत कर दिया गया।
चार माह चली जांच, कई और गंभीर आरोप उजागर
मामले की जांच करीब चार माह तक चली। जांच में सामने आया कि आरोपी मुख्य आरक्षी सहकर्मियों की बातचीत रिकॉर्ड कर उनका दुरुपयोग करता था। इसके अलावा विवादित जमीनों पर अपराधियों से सांठगांठ कर कब्जा कराने, आपराधिक षड्यंत्र रचने और अधिकारियों के खिलाफ शिकायतें कराने जैसे आरोप भी पाए गए।
जांच में यह भी सामने आया कि कर्मचारियों पर दबाव बनाने के लिए वह अपराधियों को आत्महत्या संबंधी स्टेटस लगाने के लिए उकसाता था। अपने बचाव में उसने सोशल मीडिया पर अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ बेबुनियाद आरोप भी लगाए, जिन्हें पुलिस ने निराधार बताया है।
निलंबन के बाद से चल रहा था गैरहाजिर
मुख्य आरक्षी जितेंद्र यादव पिछले 4-5 वर्षों से ललितपुर में तैनात था और पुलिस कार्यालय की प्रधान लिपिक शाखा में कार्यरत था। आरोप सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक मोहम्मद मुश्ताक ने उसे निलंबित कर दिया था, जिसके बाद से वह गैरहाजिर चल रहा था।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। पुलिस विभाग में कार्यरत मुख्य आरक्षी जितेंद्र यादव निवासी डकोर जनपद जालौन को भ्रष्टाचार और महिला पुलिसकर्मियों के मानसिक उत्पीड़न के आरोपों में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) झांसी की जांच में दोषी पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई।
अपर पुलिस अधीक्षक कालू सिंह के अनुसार, वर्ष 2025 में प्रधान लिपिक शाखा में तैनाती के दौरान आरोपी मुख्य आरक्षी अवकाश संबंधी पत्रावलियों के निस्तारण के नाम पर पुलिसकर्मियों से अवैध रूप से धन की मांग करता था। आरोप है कि एक महिला सहायक उपनिरीक्षक (लिपिक) को इसकी जानकारी होने पर उसने अलग-अलग नंबरों से फोन कर मानसिक उत्पीड़न किया और धमकियां दीं। साथ ही महिला कर्मी की छवि खराब करने के लिए अफवाहें भी फैलाने का प्रयास किया।
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प्रारंभिक जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर मामले की विस्तृत जांच अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) झांसी डॉ. अरविंद कुमार को सौंपी गई। जांच में दोषी पाए जाने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस अधीनस्थ श्रेणी (दंड एवं अपील) नियमावली के तहत मुख्य आरक्षी को सेवा से पदच्युत कर दिया गया।
चार माह चली जांच, कई और गंभीर आरोप उजागर
मामले की जांच करीब चार माह तक चली। जांच में सामने आया कि आरोपी मुख्य आरक्षी सहकर्मियों की बातचीत रिकॉर्ड कर उनका दुरुपयोग करता था। इसके अलावा विवादित जमीनों पर अपराधियों से सांठगांठ कर कब्जा कराने, आपराधिक षड्यंत्र रचने और अधिकारियों के खिलाफ शिकायतें कराने जैसे आरोप भी पाए गए।
जांच में यह भी सामने आया कि कर्मचारियों पर दबाव बनाने के लिए वह अपराधियों को आत्महत्या संबंधी स्टेटस लगाने के लिए उकसाता था। अपने बचाव में उसने सोशल मीडिया पर अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ बेबुनियाद आरोप भी लगाए, जिन्हें पुलिस ने निराधार बताया है।
निलंबन के बाद से चल रहा था गैरहाजिर
मुख्य आरक्षी जितेंद्र यादव पिछले 4-5 वर्षों से ललितपुर में तैनात था और पुलिस कार्यालय की प्रधान लिपिक शाखा में कार्यरत था। आरोप सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक मोहम्मद मुश्ताक ने उसे निलंबित कर दिया था, जिसके बाद से वह गैरहाजिर चल रहा था।