{"_id":"6a1b5189e87150770f03754c","slug":"convict-sentenced-to-life-imprisonment-for-raping-a-six-year-old-child-lalitpur-news-c-131-1-ltp1005-157165-2026-05-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lalitpur News: छह साल के मासूम के साथ दुष्कर्म के दोषी को आजीवन कारावास की सजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lalitpur News: छह साल के मासूम के साथ दुष्कर्म के दोषी को आजीवन कारावास की सजा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। अपर जिला एवं सत्र/विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) नवनीत कुमार भारती की कोर्ट ने बालक का अपहरण कर उसके साथ कुकृत्य करने के अभियुक्त को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और पचास हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी महिला ने पांच वर्ष पूर्व पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि 22 जनवरी 2020 को वह अपने घर में बीड़ी बना रही थी और उसका छह वर्षीय पुत्र छत पर खेल रहा था। उसके पति काम पर गए हुए थे। दोपहर में करीब ढाई बजे कोई अज्ञात व्यक्ति छत के रास्ते से आया व उसके छह वर्षीय बेटे को उठाकर अपने साथ ले गया और उसके बेटे के साथ गलत काम किया। उसका बेटा कुछ समय बाद रोता हुआ आया, जिसके कपड़ों में कांटे आदि लगे हुए थे। उसने जब बेटे से पूछा तो उसने बताया कि जो उसको अपने साथ ले जाने वाला पीली शर्ट व जींस पहने था। इस पर उसने मोहल्ले में काफी पूछताछ की, लेकिन कुछ पता नहीं चला सका।
कोतवाली पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ सुसंगत धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर विवचेना शुरू कर दी थी। विवेचना में ग्राम मसौराकलां निवासी अजय कुशवाहा का नाम प्रकाश में आया। इस पर कोतवाली पुलिस आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया था और न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत कर दिए थे। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था।
विज्ञापन
अभियोजन की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों बयान के आधार पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अभियुक्त अजय कुशवाहा को धारा 5 (एम) /6 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के अपराध में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और कुल पचास हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। साथ ही न्यायाधीश ने अर्थदंड की राशि अदा होने पर संपूर्ण राशि पीड़ित को प्रतिकर के रूप में देने के आदेश भी दिए।
विशेष लोक अभियोजक नरेंद्र सिंह गौर ने बताया कि इस मामले में न्यायालय ने पॉक्सो एक्ट में सजा सुनाई है। ऐसे में न्यायाधीश ने कहा कि अन्य कुकृत्य की धारा में सजा की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने बताया कि इस आदेश में न्यायाधीश ने स्पष्ट किया है कि आजीवन कारावास का अभिप्राय शेष प्राकृत्य जीवनकाल के लिए कारावास है, यानि मृत्यु तक आजीवन कारावास की सजा है।
ललितपुर। अपर जिला एवं सत्र/विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) नवनीत कुमार भारती की कोर्ट ने बालक का अपहरण कर उसके साथ कुकृत्य करने के अभियुक्त को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और पचास हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी महिला ने पांच वर्ष पूर्व पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि 22 जनवरी 2020 को वह अपने घर में बीड़ी बना रही थी और उसका छह वर्षीय पुत्र छत पर खेल रहा था। उसके पति काम पर गए हुए थे। दोपहर में करीब ढाई बजे कोई अज्ञात व्यक्ति छत के रास्ते से आया व उसके छह वर्षीय बेटे को उठाकर अपने साथ ले गया और उसके बेटे के साथ गलत काम किया। उसका बेटा कुछ समय बाद रोता हुआ आया, जिसके कपड़ों में कांटे आदि लगे हुए थे। उसने जब बेटे से पूछा तो उसने बताया कि जो उसको अपने साथ ले जाने वाला पीली शर्ट व जींस पहने था। इस पर उसने मोहल्ले में काफी पूछताछ की, लेकिन कुछ पता नहीं चला सका।
विज्ञापन
विज्ञापन
कोतवाली पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ सुसंगत धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर विवचेना शुरू कर दी थी। विवेचना में ग्राम मसौराकलां निवासी अजय कुशवाहा का नाम प्रकाश में आया। इस पर कोतवाली पुलिस आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया था और न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत कर दिए थे। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था।
अभियोजन की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों बयान के आधार पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अभियुक्त अजय कुशवाहा को धारा 5 (एम) /6 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के अपराध में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और कुल पचास हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। साथ ही न्यायाधीश ने अर्थदंड की राशि अदा होने पर संपूर्ण राशि पीड़ित को प्रतिकर के रूप में देने के आदेश भी दिए।
विशेष लोक अभियोजक नरेंद्र सिंह गौर ने बताया कि इस मामले में न्यायालय ने पॉक्सो एक्ट में सजा सुनाई है। ऐसे में न्यायाधीश ने कहा कि अन्य कुकृत्य की धारा में सजा की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने बताया कि इस आदेश में न्यायाधीश ने स्पष्ट किया है कि आजीवन कारावास का अभिप्राय शेष प्राकृत्य जीवनकाल के लिए कारावास है, यानि मृत्यु तक आजीवन कारावास की सजा है।