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Lalitpur News: ड्राफ्ट एडवोकेट्स (संशोधन) विधेयक-2026 पर मंथन तेज, अधिवक्ताओं ने रखी राय
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से जारी ड्राफ्ट एडवोकेट्स (संशोधन) विधेयक-2026 को लेकर अधिवक्ताओं में चर्चा तेज हो गई है। यह मसौदा अधिवक्ता अधिनियम, 1961 में व्यापक बदलावों का प्रस्ताव रखता है। सरकार और बार काउंसिल ने इसे अंतिम रूप देने से पहले अधिवक्ताओं, बार एसोसिएशन, विधि शिक्षकों, विधि छात्रों और आम नागरिकों से सुझाव एवं आपत्तियां मांगी हैं।
इस विधेयक पर कानूनी जानकारों का मानना है कि प्रस्तावित संशोधन वकालत के पेशे में पारदर्शिता, व्यावसायिक उत्तरदायित्व, विधिक शिक्षा, पंजीकरण प्रक्रिया और अनुशासनात्मक व्यवस्था को नया स्वरूप दे सकता है। हालांकि, कई अधिवक्ताओं का यह भी कहना है कि संशोधन में अधिवक्ताओं की स्वतंत्रता, बार की स्वायत्तता और न्यायिक व्यवस्था की गरिमा से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
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फोटो-05
यह विधेयक अधिवक्ता पेशे के भविष्य को प्रभावित करेगा। इसलिए प्रत्येक अधिवक्ता को ड्राफ्ट का अध्ययन कर अपने सुझाव अवश्य भेजने चाहिए, ताकि यह कानून व्यावहारिक और अधिवक्ता हितैषी बन सके।
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-पुष्पेंद्र सिंह चौहान, अधिवक्ता।
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फोटो-07
कैप्सन-राजेश देवलिया।
कानून में सुधार समय की आवश्यकता है, लेकिन सुधार ऐसा होना चाहिए जिससे अधिवक्ताओं की स्वतंत्रता और बार की स्वायत्तता और मजबूत हो।
-राजेश देवलिया, अध्यक्ष जिला बार एसोसिएशन।
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फोटो-08
कैप्सन-स्वतंत्र व्यास।
जिला बार एसोसिएशनों की राय सबसे अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि जमीनी स्तर पर अधिवक्ता ही न्याय व्यवस्था की वास्तविक चुनौतियों का सामना करते हैं।
-स्वतंत्र व्यास, अधिवक्ता।
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फोटो- 09
कैप्सन-अशोक कुमार रिछारिया।
डिजिटल और आधुनिक विधिक व्यवस्था की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम हो सकता है, लेकिन छोटे जिलों के अधिवक्ताओं की व्यावहारिक समस्याओं को भी ध्यान में रखना होगा।
-अशोक कुमार रिछारिया, अधिवक्ता।
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ड्राफ्ट एडवोकेट्स (संशोधन) विधेयक में यह बिंदु किए शामिल
-अधिवक्ता कल्याण को कानूनी आधार: बार काउंसिल ऑफ इंडिया और राज्य बार काउंसिलों को बीमा, पेंशन, चिकित्सा सहायता, सामाजिक सुरक्षा, दिव्यांग अधिवक्ताओं और उनके आश्रितों के कल्याण के लिए अलग फंड एवं ट्रस्ट बनाने का अधिकार देने का प्रस्ताव है।
-लॉ फर्मों का अनिवार्य पंजीकरण: सभी लॉ फर्मों को संबंधित बार काउंसिल में पंजीकरण कराना होगा व उनके संचालन के लिए नियामकीय ढांचा प्रस्तावित किया गया है।
-विदेशी वकीलों और विदेशी लॉ फर्मों का विनियमन: विदेशी वकीलों और लॉ फर्मों के कार्य करने को स्पष्ट कानूनी व्यवस्था प्रस्तावित की गई है, हालांकि उन्हें भारतीय न्यायालयों में वकालत का अधिकार नहीं होगा।
-नामांकन प्रक्रिया में बदलाव: अधिवक्ताओं के नामांकन के सत्यापन को अधिक कठोर बनाने और नामांकन शुल्क में उल्लेखनीय वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया है।
-विधिक शिक्षा में सुधार: विधि कॉलेजों की गुणवत्ता, प्रवेश प्रक्रिया, प्रशिक्षण एवं सतत व्यावसायिक विकास पर अधिक जोर दिया गया है।
-महिला प्रतिनिधित्व को बढ़ावा: बार काउंसिलों और विभिन्न समितियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रावधान प्रस्तावित हैं।
-अनुशासनात्मक व्यवस्था को मजबूत करना: अधिवक्ताओं के पेशेवर आचरण और अनुशासन संबंधी मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने का प्रस्ताव है।
-नियमन, निरीक्षण, सत्यापन और पेशेवर मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए बार काउंसिलों को अतिरिक्त अधिकार देने का प्रस्ताव भी शामिल है।
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ललितपुर। बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से जारी ड्राफ्ट एडवोकेट्स (संशोधन) विधेयक-2026 को लेकर अधिवक्ताओं में चर्चा तेज हो गई है। यह मसौदा अधिवक्ता अधिनियम, 1961 में व्यापक बदलावों का प्रस्ताव रखता है। सरकार और बार काउंसिल ने इसे अंतिम रूप देने से पहले अधिवक्ताओं, बार एसोसिएशन, विधि शिक्षकों, विधि छात्रों और आम नागरिकों से सुझाव एवं आपत्तियां मांगी हैं।
इस विधेयक पर कानूनी जानकारों का मानना है कि प्रस्तावित संशोधन वकालत के पेशे में पारदर्शिता, व्यावसायिक उत्तरदायित्व, विधिक शिक्षा, पंजीकरण प्रक्रिया और अनुशासनात्मक व्यवस्था को नया स्वरूप दे सकता है। हालांकि, कई अधिवक्ताओं का यह भी कहना है कि संशोधन में अधिवक्ताओं की स्वतंत्रता, बार की स्वायत्तता और न्यायिक व्यवस्था की गरिमा से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
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फोटो-05
यह विधेयक अधिवक्ता पेशे के भविष्य को प्रभावित करेगा। इसलिए प्रत्येक अधिवक्ता को ड्राफ्ट का अध्ययन कर अपने सुझाव अवश्य भेजने चाहिए, ताकि यह कानून व्यावहारिक और अधिवक्ता हितैषी बन सके।
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-पुष्पेंद्र सिंह चौहान, अधिवक्ता।
फोटो-07
कैप्सन-राजेश देवलिया।
कानून में सुधार समय की आवश्यकता है, लेकिन सुधार ऐसा होना चाहिए जिससे अधिवक्ताओं की स्वतंत्रता और बार की स्वायत्तता और मजबूत हो।
-राजेश देवलिया, अध्यक्ष जिला बार एसोसिएशन।
फोटो-08
कैप्सन-स्वतंत्र व्यास।
जिला बार एसोसिएशनों की राय सबसे अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि जमीनी स्तर पर अधिवक्ता ही न्याय व्यवस्था की वास्तविक चुनौतियों का सामना करते हैं।
-स्वतंत्र व्यास, अधिवक्ता।
फोटो- 09
कैप्सन-अशोक कुमार रिछारिया।
डिजिटल और आधुनिक विधिक व्यवस्था की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम हो सकता है, लेकिन छोटे जिलों के अधिवक्ताओं की व्यावहारिक समस्याओं को भी ध्यान में रखना होगा।
-अशोक कुमार रिछारिया, अधिवक्ता।
ड्राफ्ट एडवोकेट्स (संशोधन) विधेयक में यह बिंदु किए शामिल
-अधिवक्ता कल्याण को कानूनी आधार: बार काउंसिल ऑफ इंडिया और राज्य बार काउंसिलों को बीमा, पेंशन, चिकित्सा सहायता, सामाजिक सुरक्षा, दिव्यांग अधिवक्ताओं और उनके आश्रितों के कल्याण के लिए अलग फंड एवं ट्रस्ट बनाने का अधिकार देने का प्रस्ताव है।
-लॉ फर्मों का अनिवार्य पंजीकरण: सभी लॉ फर्मों को संबंधित बार काउंसिल में पंजीकरण कराना होगा व उनके संचालन के लिए नियामकीय ढांचा प्रस्तावित किया गया है।
-विदेशी वकीलों और विदेशी लॉ फर्मों का विनियमन: विदेशी वकीलों और लॉ फर्मों के कार्य करने को स्पष्ट कानूनी व्यवस्था प्रस्तावित की गई है, हालांकि उन्हें भारतीय न्यायालयों में वकालत का अधिकार नहीं होगा।
-नामांकन प्रक्रिया में बदलाव: अधिवक्ताओं के नामांकन के सत्यापन को अधिक कठोर बनाने और नामांकन शुल्क में उल्लेखनीय वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया है।
-विधिक शिक्षा में सुधार: विधि कॉलेजों की गुणवत्ता, प्रवेश प्रक्रिया, प्रशिक्षण एवं सतत व्यावसायिक विकास पर अधिक जोर दिया गया है।
-महिला प्रतिनिधित्व को बढ़ावा: बार काउंसिलों और विभिन्न समितियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रावधान प्रस्तावित हैं।
-अनुशासनात्मक व्यवस्था को मजबूत करना: अधिवक्ताओं के पेशेवर आचरण और अनुशासन संबंधी मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने का प्रस्ताव है।
-नियमन, निरीक्षण, सत्यापन और पेशेवर मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए बार काउंसिलों को अतिरिक्त अधिकार देने का प्रस्ताव भी शामिल है।