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Lalitpur: त्रिनेत्र की ‘आंखें’ बंद, 84 सीसीटीवी में 76 खराब, 40 लाख की लागत से धौर्रा व जाखलौन में लगाए गए थे

संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी Published by: दीपक महाजन Updated Wed, 11 Mar 2026 10:51 AM IST
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सार

इन कैमरों को कॉमन कमांड सिस्टम से जोड़ते हुए जिला मुख्यालय स्थित जिला पंचायत राज विभाग कार्यालय के इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर से जोड़ा गया था। वर्तमान में 84 कैमरों में से 76 कैमरे खराब पड़े हैं।

Lalitpur: Trinetra's 'eyes' closed, 76 out of 84 CCTVs are out of order.
जाखलौन में लगा कैमरा। - फोटो : संवाद
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विस्तार

ग्रामीण सुरक्षा के मॉडल के रूप में दो साल पहले शुरू किया गया त्रिनेत्र अभियान अब लापरवाही की भेंट चढ़ता दिख रहा है। 40 लाख से लगे 84 सीसीटीवी कैमरों में से 76 खराब हैं। विभाग उन्हें ठीक कराने की जहमत नहीं उठा रहा है। वहीं, इस मॉडल की सराहना होने पर केंद्र सरकार ने तत्कालीन जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी को पुरस्कृत करते हुए अन्य ग्राम पंचायतों में भी सीसीटीवी कैमरे लगवाने के लिए एक करोड़ रुपये का बजट जारी किया था। इससे छह ग्राम पंचायतों में कैमरे लगाए गए, लेकिन अब तक उन्हें साैंपा नहीं गया है।
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बता दें कि जिला मुख्यालय से ग्राम पंचायतों की सीधी निगरानी के उद्देश्य से जनपद में त्रिनेत्र अभियान को मॉडल योजना के रूप में शुरू किया गया था। योजना के प्रथम चरण में ब्लॉक बिरधा की दो ग्राम पंचायतों धौर्रा और जाखलौन में सुरक्षा और निगरानी के लिए करीब 40 लाख रुपये की लागत से 84 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। इन कैमरों को कॉमन कमांड सिस्टम से जोड़ते हुए जिला मुख्यालय स्थित जिला पंचायत राज विभाग कार्यालय के इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर से जोड़ा गया था। हालांकि, वर्तमान में 76 कैमरे खराब पड़े हैं।
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Lalitpur: Trinetra's 'eyes' closed, 76 out of 84 CCTVs are out of order.
एलईडी में दिख रहे बंद कैमरे। - फोटो : संवाद
शोपीस बने कैमरे, अराजकतत्व काट ले गए केबल
त्रिनेत्र योजना के तहत ग्राम पंचायत धौर्रा और जाखलौन में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों को इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर से जोड़ा गया था, लेकिन अराजकतत्वों ने कई जगह इनकी केबल काटकर फेंक दी। पिछले डेढ़ वर्ष से ज्यादातर कैमरे शोपीस बने हुए हैं। दोनों ग्राम पंचायतों के सीसीटीवी कैमरों को जिला मुख्यालय स्थित इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर से जोड़ा गया था, लेकिन लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। करीब एक साल पहले कैमरों की केबल कटने के बाद तत्कालीन डीपीआरओ नवीन मिश्रा ने वायरलेस कैमरे लगाने की योजना बनाई थी, लेकिन उस पर भी कोई काम नहीं हो सका। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही वायरलेस कैमरे लगवाए जाएंगे।


देश-प्रदेश में सराहा गया था यह मॉडल
इस मॉडल की प्रदेश और देश स्तर पर सराहना हुई थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने उन्हें पुरस्कृत करते हुए अन्य ग्राम पंचायतों में भी सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए बजट जारी किया। इससे कारी पहाड़ी, टेटा, टेंगा, राखपंचमपुर, छिपाई और टीकरा तिवारी में वायरलेस कैमरे लगाए गए, लेकिन इन्हें अब तक ग्राम पंचायतों को साैंपा नहीं गया है।


बानपुर ग्राम पंचायत सचिवालय में लगे तीन कैमरे भी बंद
बानपुर। ग्राम पंचायत सचिवालय के प्रधान कक्ष, मीटिंग हॉल और कार्यालय सहित तीन कमरों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, ताकि यहां होने वाली गतिविधियों पर नजर रखी जा सके लेकिन कई महीनों से ये कैमरे खराब पड़े हैं। इससे इनकी उपयोगिता समाप्त हो गई है। संवाद

यह कहते हैं जिम्मेदार
“ग्राम पंचायत में सात खंभों पर 28 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जो चालू हैं लेकिन अभी तक उन्हें ग्राम पंचायत को साैंपा नहीं गया है।”— नीलमणि राजे, ग्राम प्रधान, छिपाई
“त्रिनेत्र योजना के तहत चयनित गांवों में वायरलेस कैमरे लगाए जा रहे हैं। धौर्रा और जाखलौन में भी पुराने कैमरे बदलकर वायरलेस कैमरे लगाए जाएंगे।” — कुंवर सिंह यादव, डीपीआरओ
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