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Lalitpur: जंगल में जानवरों के लिए गहराया पानी का संकट, अधिकारियों के दावों की पोल खोलती टूटी पड़ी हौदियां

संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर Published by: दीपक महाजन Updated Sun, 31 May 2026 01:02 PM IST
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सार

बेजुबानों के लिए वन विभाग की ओर से पेयजल की व्यवस्था के दावों की पोल जंगल में बने खाली पड़े हौज खोल रहे हैं। प्राकृतिक जलस्रोत गर्मी शुरू होते ही सूख गए हैं। ऐसे में जंगली जानवर पानी की तलाश में सीमावर्ती गांवों में आने लगे हैं।

Lalitpur: Water crisis deepens in the forest, broken tanks expose the claims of the officials.
जंगल में टूटे पड़े पानी के लिए बनाए गए हौज। - फोटो : संवाद
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विस्तार

मड़ावरा-रनगांव। 45 डिग्री सेल्सियस तापमान और तेज धूप के बीच जंगल में रहने बाले बेजुबानों के लिए वन विभाग की ओर से पेयजल की व्यवस्था के दावों की पोल जंगल में बने खाली पड़े हौज खोल रहे हैं। आलम यह है कि जंगल में प्राकृतिक जलस्रोत ( नदी, तालाब व पोखर ) गर्मी शुरू होते ही सूख गए हैं। ऐसे में जंगली जानवर पानी की तलाश में सीमावर्ती गांवों में आने लगे हैं।


हैरत की बात तो यह है कि तहसील मड़ावरा रेंज के तहत 13 बीटों में छह वन रक्षक तैनात हैं। रेंज की धौरी सागर बीट, सकरा बीट और गिरार बीट में सबसे अधिक वन्य जीवों की मौजूदगी पाई जाती है। गर्मी के मौसम में जानवरों को पानी के लिए इधर उधर न भटकना पड़े इसके लिए जंगल में प्राकृतिक जल श्रोतों के अलावा वन विभाग ने हौज बनवाए थे, जो बारिश न होने पर टैंकर से पानी भरवा दिए जाते हैं। रेंज में अधिकांश प्राकृतिक जल श्रोत में पानी नहीं बचा है। अब तक जंगल के भीतर मौजूद कृत्रिम जल के श्रोतों की साफ-सफाई का कार्य प्रारंभ नहीं किया गया है, न ही उनमें पानी भरने की कोई व्यवस्था की गई है। जबकि जंगल में पानी के नाम पर लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं। यह वन क्षेत्र पन्ना टाइगर रिजर्व से जुड़ा होने की वजह से इस क्षेत्र में अधिक संख्या में वन्य जीव देखे गए हैं। जंगल में पानी की कमी होने के चलते जंगली जानवर गांव की ओर कूच कर रहे हैं। जिससे कुर्रट, लखंजर, ककरा, टौरी, समरखेडा, गिरार व जैतूपुरा आदि गांवों में रहने वाले लोगों को जंगली जानवरों से खतरा बना हुआ है। जंगलों में जानवरों और पक्षियों के पानी पीने के लिए बनाई गई पानी की हौदियाें कोई टूटी तो कोई खाली पड़ी है। न तो उनकी मरम्मत की गई है न ही उनकी अभी तक साफ सफाई कर पानी से भरने की लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
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इनका यह है कहना
जंगल में पानी की व्यवस्था न होने के कारण जंगली जानवर जैसे नीलगाय, हिरण, सूअर, बंदर आदि जंगल से बाहर आबादी से होते हुए दूर स्थित रोहड़ी बांध पर पानी पीने के लिए आते हैं जिससे लोगों को जंगली जानवरों से खतरा बना रहता है।-हरनाम यादव, ग्रामीण सकरा
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जंगल में बने प्राकृतिक जल श्रोत सूख जाने के कारण जंगली जानवर आबादी में पानी की तलाश में दस्तक देते हैं। कुछ दिन पहले गांव के पास से बाग को टहलते हुए देखा गया था।-अनूप यादव, ग्रामीण सकरा

जंगल में प्राकृतिक जल श्रोत के साथ-साथ हौदियां बनाई गई हैं। जिनमें जरूरत के अनुसार पानी टैंकर से भरवाया जाता है।-अशोक यादव, रेंजर मड़ावरा रेंज
 
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