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एलयूसीसी घोटाला : रवि तिवारी की गिरफ्तारी के बाद समीर अग्रवाल पर शिकंजा कसने की तैयारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। एलयूसीसी (लोनी अर्बन मल्टीस्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसायटी) चिटफंड घोटाले में मुख्य संचालकों में शामिल रविशंकर तिवारी से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की गिरफ्तारी के बाद जांच आगे बढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार रिमांड के दौरान ईडी को कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। इसके बाद अब कंपनी के मुख्य आरोपी और विदेश में मौजूद बताए जा रहे सीएमडी समीर अग्रवाल के खिलाफ कार्रवाई तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
जिले सहित देश के कई राज्यों में निवेशकों से कम समय में रकम दोगुनी करने का लालच देकर करोड़ों रुपये जमा कराने के आरोपों की जांच ईडी कर रही है। ईडी ने 14 जुलाई को दिल्ली में रविशंकर तिवारी को गिरफ्तार किया था। 15 जुलाई को उसे विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से ईडी को पूछताछ के लिए 10 दिन की रिमांड मिली। रिमांड के दौरान वित्तीय लेनदेन, निवेशकों की जमा धनराशि और उससे जुड़ी कंपनियों के संचालन के संबंध में पूछताछ की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक जांच में रविशंकर तिवारी और उसके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में सागा ग्रुप से जुड़ी कंपनियों से बड़ी धनराशि के लेन-देन के साक्ष्य मिले हैं। इन लेनदेन के संबंध में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर ईडी ने कार्रवाई की थी। अब एजेंसी इन जानकारियों के आधार पर धन के प्रवाह और अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
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एक लाख इनामी समीर पर भी कार्रवाई होने के संकेत
जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि रविशंकर तिवारी से मिली जानकारी के आधार पर कंपनी के मुख्य आरोपी समीर अग्रवाल के खिलाफ कार्रवाई में तेजी आ सकती है। समीर अग्रवाल वर्तमान में विदेश में बताया जा रहा है। उसके खिलाफ पहले ही लुकआउट नोटिस जारी किया जा चुका है। एडीजी कानपुर जोन उसकी गिरफ्तारी पर एक लाख रुपये का इनाम भी घोषित कर चुके हैं। ललितपुर पुलिस ने उसके खिलाफ विभिन्न मामलों में गैर जमानती वारंट भी जारी कराए हैं।
ललितपुर से शुरू हुई थी बड़ी कार्रवाई
एलयूसीसी के खिलाफ ललितपुर जिले के विभिन्न थानों में वर्ष 2024 से दो दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। जिला स्तरीय एसआईटी ने जांच के दौरान मुख्य संचालकों सहित 35 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इनमें कुछ आरोपियों को बाद में जमानत मिल चुकी है। जिले में कंपनी पर करीब 256 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है।
30 लाख से अधिक निवेशकों से जुटाए 10,314 करोड़ रुपये
जांच एजेंसियों के अनुसार एलयूसीसी, एलजेसीसी और सागा ग्रुप से जुड़ी कंपनियों का नेटवर्क देश के 16 राज्यों में फैला था। इन कंपनियों ने करीब 30.51 लाख निवेशकों से 10,314 करोड़ रुपये का निवेश जुटाया, जिसके कथित गबन की जांच ईडी कर रही है। उत्तर प्रदेश में ही कंपनी का नेटवर्क 22 जिलों तक फैला था और लाखों निवेशकों ने इसमें धन जमा कराया था।
सागा ग्रुप से जुड़े वित्तीय लेनदेन भी जांच के दायरे में
ईडी के अनुसार रविशंकर तिवारी वर्ष 2009 से समीर अग्रवाल के नेतृत्व वाले सागा ग्रुप नेटवर्क से जुड़ा था। वह एडवांटेज ट्रेडकॉम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, ऑप्शन वन इंडस्ट्रीज लिमिटेड, एलयूसीसी और अन्य संबद्ध कंपनियों में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाता रहा। जांच एजेंसी इन कंपनियों के वित्तीय लेनदेन और धन के प्रवाह की भी जांच कर रही है।
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सीबीआई भी कर रही जांच
सीबीआई के अनुसार एलयूसीसी घोटाले का मुख्य आरोपी समीर अग्रवाल है, जो विदेश में है। उसकी गिरफ्तारी के लिए सीबीआई ने लुकआउट सर्कुलर और अन्य कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच में अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई कई अचल संपत्तियों का भी पता चला है, जिन्हें जब्त कर पीड़ित निवेशकों को राहत दिलाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखती है ईडी की कार्रवाई?
- ईडी का उद्देश्य आरोपियों की अपराध से अर्जित संपत्ति का पता लगाना और उसे जब्त करना होता है।
- जांच में यदि और संपत्तियां या बैंक खाते मिलते हैं तो उन्हें भी जांच के दायरे में लाया जा सकता है।
- जब्त संपत्तियों के संबंध में आगे की कानूनी प्रक्रिया अदालत के माध्यम से होती है।
- जिन निवेशकों ने पहले से पुलिस में एफआईआर या शिकायत दर्ज कराई है, उनके मामले जांच का हिस्सा बने रहते हैं।
- धनवापसी का निर्णय ईडी नहीं, बल्कि संबंधित अदालतों और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होता है। इसलिए निवेशकों को किसी भी अफवाह या फर्जी रिकवरी एजेंट के झांसे में नहीं आना चाहिए।
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अगर आपने एलयूसीसी में निवेश किया है तो...
- निवेश से जुड़े सभी दस्तावेज (रसीद, पासबुक, बॉन्ड, आईडी आदि) सुरक्षित रखें।
- पुलिस या जांच एजेंसी की ओर से मांगे जाने पर ही दस्तावेज उपलब्ध कराएं।
- धनवापसी के नाम पर फोन या सोशल मीडिया पर मांगी जा रही रकम या शुल्क किसी को न दें।
- केवल अधिकृत सरकारी सूचना पर ही भरोसा करें।
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ललितपुर। एलयूसीसी (लोनी अर्बन मल्टीस्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसायटी) चिटफंड घोटाले में मुख्य संचालकों में शामिल रविशंकर तिवारी से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की गिरफ्तारी के बाद जांच आगे बढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार रिमांड के दौरान ईडी को कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। इसके बाद अब कंपनी के मुख्य आरोपी और विदेश में मौजूद बताए जा रहे सीएमडी समीर अग्रवाल के खिलाफ कार्रवाई तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
जिले सहित देश के कई राज्यों में निवेशकों से कम समय में रकम दोगुनी करने का लालच देकर करोड़ों रुपये जमा कराने के आरोपों की जांच ईडी कर रही है। ईडी ने 14 जुलाई को दिल्ली में रविशंकर तिवारी को गिरफ्तार किया था। 15 जुलाई को उसे विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से ईडी को पूछताछ के लिए 10 दिन की रिमांड मिली। रिमांड के दौरान वित्तीय लेनदेन, निवेशकों की जमा धनराशि और उससे जुड़ी कंपनियों के संचालन के संबंध में पूछताछ की जा रही है।
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सूत्रों के मुताबिक जांच में रविशंकर तिवारी और उसके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में सागा ग्रुप से जुड़ी कंपनियों से बड़ी धनराशि के लेन-देन के साक्ष्य मिले हैं। इन लेनदेन के संबंध में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर ईडी ने कार्रवाई की थी। अब एजेंसी इन जानकारियों के आधार पर धन के प्रवाह और अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
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एक लाख इनामी समीर पर भी कार्रवाई होने के संकेत
जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि रविशंकर तिवारी से मिली जानकारी के आधार पर कंपनी के मुख्य आरोपी समीर अग्रवाल के खिलाफ कार्रवाई में तेजी आ सकती है। समीर अग्रवाल वर्तमान में विदेश में बताया जा रहा है। उसके खिलाफ पहले ही लुकआउट नोटिस जारी किया जा चुका है। एडीजी कानपुर जोन उसकी गिरफ्तारी पर एक लाख रुपये का इनाम भी घोषित कर चुके हैं। ललितपुर पुलिस ने उसके खिलाफ विभिन्न मामलों में गैर जमानती वारंट भी जारी कराए हैं।
ललितपुर से शुरू हुई थी बड़ी कार्रवाई
एलयूसीसी के खिलाफ ललितपुर जिले के विभिन्न थानों में वर्ष 2024 से दो दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। जिला स्तरीय एसआईटी ने जांच के दौरान मुख्य संचालकों सहित 35 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इनमें कुछ आरोपियों को बाद में जमानत मिल चुकी है। जिले में कंपनी पर करीब 256 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है।
30 लाख से अधिक निवेशकों से जुटाए 10,314 करोड़ रुपये
जांच एजेंसियों के अनुसार एलयूसीसी, एलजेसीसी और सागा ग्रुप से जुड़ी कंपनियों का नेटवर्क देश के 16 राज्यों में फैला था। इन कंपनियों ने करीब 30.51 लाख निवेशकों से 10,314 करोड़ रुपये का निवेश जुटाया, जिसके कथित गबन की जांच ईडी कर रही है। उत्तर प्रदेश में ही कंपनी का नेटवर्क 22 जिलों तक फैला था और लाखों निवेशकों ने इसमें धन जमा कराया था।
सागा ग्रुप से जुड़े वित्तीय लेनदेन भी जांच के दायरे में
ईडी के अनुसार रविशंकर तिवारी वर्ष 2009 से समीर अग्रवाल के नेतृत्व वाले सागा ग्रुप नेटवर्क से जुड़ा था। वह एडवांटेज ट्रेडकॉम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, ऑप्शन वन इंडस्ट्रीज लिमिटेड, एलयूसीसी और अन्य संबद्ध कंपनियों में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाता रहा। जांच एजेंसी इन कंपनियों के वित्तीय लेनदेन और धन के प्रवाह की भी जांच कर रही है।
सीबीआई भी कर रही जांच
सीबीआई के अनुसार एलयूसीसी घोटाले का मुख्य आरोपी समीर अग्रवाल है, जो विदेश में है। उसकी गिरफ्तारी के लिए सीबीआई ने लुकआउट सर्कुलर और अन्य कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच में अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई कई अचल संपत्तियों का भी पता चला है, जिन्हें जब्त कर पीड़ित निवेशकों को राहत दिलाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखती है ईडी की कार्रवाई?
- ईडी का उद्देश्य आरोपियों की अपराध से अर्जित संपत्ति का पता लगाना और उसे जब्त करना होता है।
- जांच में यदि और संपत्तियां या बैंक खाते मिलते हैं तो उन्हें भी जांच के दायरे में लाया जा सकता है।
- जब्त संपत्तियों के संबंध में आगे की कानूनी प्रक्रिया अदालत के माध्यम से होती है।
- जिन निवेशकों ने पहले से पुलिस में एफआईआर या शिकायत दर्ज कराई है, उनके मामले जांच का हिस्सा बने रहते हैं।
- धनवापसी का निर्णय ईडी नहीं, बल्कि संबंधित अदालतों और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होता है। इसलिए निवेशकों को किसी भी अफवाह या फर्जी रिकवरी एजेंट के झांसे में नहीं आना चाहिए।
अगर आपने एलयूसीसी में निवेश किया है तो...
- निवेश से जुड़े सभी दस्तावेज (रसीद, पासबुक, बॉन्ड, आईडी आदि) सुरक्षित रखें।
- पुलिस या जांच एजेंसी की ओर से मांगे जाने पर ही दस्तावेज उपलब्ध कराएं।
- धनवापसी के नाम पर फोन या सोशल मीडिया पर मांगी जा रही रकम या शुल्क किसी को न दें।
- केवल अधिकृत सरकारी सूचना पर ही भरोसा करें।