{"_id":"6a62830f9c6f48b3f7083a3d","slug":"midday-meals-are-being-cooked-in-some-places-amidst-filth-and-in-others-on-wood-fired-stoves-lalitpur-news-c-131-1-ltp1017-160069-2026-07-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lalitpur News: कहीं गंदगी के बीच तो कहीं लकड़ी के चूल्हे पर पक रहा मध्याह्न भोजन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lalitpur News: कहीं गंदगी के बीच तो कहीं लकड़ी के चूल्हे पर पक रहा मध्याह्न भोजन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज एजेंसी
सिलावन। परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को पौष्टिक और स्वच्छ मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराने के लिए शासन की ओर से स्पष्ट मानक तय किए गए हैं, लेकिन महरौनी विकासखंड के कई विद्यालयों में इन मानकों का पालन होता नजर नहीं आया। कहीं रसोईघर के आसपास गंदगी के बीच भोजन पक रहा था तो कहीं गैस सिलिंडर होने के बावजूद लकड़ी के चूल्हे का इस्तेमाल किया जा रहा था। एक विद्यालय में बच्चों की संख्या के मुकाबले सब्जी की मात्रा भी बेहद कम मिली। ऐसे हालात बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े करते हैं। बृहस्पतिवार को विभिन्न विद्यालयों का निरीक्षण किया गया तो कई चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आईं।
दृश्य एक : गंदगी के बीच बन रहा था भोजन
प्राथमिक विद्यालय सतलिंगा में रसोईघर के आसपास गंदगी के बीच मध्याह्न भोजन तैयार किया जा रहा था। विद्यालय में 58 बच्चों के सापेक्ष 48 छात्र-छात्राएं उपस्थित थे, लेकिन उनके लिए मानक के तहत सब्जी नहीं बनाई जा रही थी। कम आलू की सब्जी बनाई जा रही थी। जबकि प्राथमिक स्तर के प्रत्येक बच्चे को मध्याह्न भोजन में करीब 450 कैलोरी ऊर्जा और 12 ग्राम प्रोटीन उपलब्ध कराना निर्धारित है।
दृश्य दो : गैस सिलिंडर होने के बावजूद जल रही थी लकड़ी
कंपोजिट विद्यालय समोगर में मध्याह्न भोजन गैस के बजाय लकड़ी के चूल्हे पर पकाया जा रहा था। विद्यालय में गैस सिलिंडर उपलब्ध होने के बावजूद उसका उपयोग नहीं किया जा रहा था। लकड़ी के धुएं से विद्यालय का वातावरण प्रदूषित हो रहा था। इससे रसोइयों के साथ-साथ बच्चों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। धुएं के कारण आंखों में जलन और श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा भी बना रहता है।
विज्ञापन
दृश्य तीन : यहां मिली बेहतर व्यवस्था
प्राथमिक विद्यालय गंगनिया में मध्याह्न भोजन व्यवस्था संतोषजनक मिली। निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन तैयार किया जा रहा था। भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता बेहतर पाई गई। गैस चूल्हे पर भोजन बनाया जा रहा था और रसोईघर भी साफ-सुथरा मिला।
-- -- -- -- -
विद्यालयों में उपलब्ध गैस सिलिंडर सामान्यतः आठ दिन में खाली हो जाता है, जबकि नया सिलिंडर उपलब्ध होने में नियमानुसार 25 से 30 दिन का समय लग जाता है। इसी कारण कुछ विद्यालयों में मजबूरी में लकड़ी के चूल्हे का उपयोग किया जाता है। प्राथमिक विद्यालय सतलिंगा में मिली अनियमितताओं के संबंध में नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। - नीतू वर्मा, खंड शिक्षा अधिकारी, महरौनी
विज्ञापन
सिलावन। परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को पौष्टिक और स्वच्छ मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराने के लिए शासन की ओर से स्पष्ट मानक तय किए गए हैं, लेकिन महरौनी विकासखंड के कई विद्यालयों में इन मानकों का पालन होता नजर नहीं आया। कहीं रसोईघर के आसपास गंदगी के बीच भोजन पक रहा था तो कहीं गैस सिलिंडर होने के बावजूद लकड़ी के चूल्हे का इस्तेमाल किया जा रहा था। एक विद्यालय में बच्चों की संख्या के मुकाबले सब्जी की मात्रा भी बेहद कम मिली। ऐसे हालात बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े करते हैं। बृहस्पतिवार को विभिन्न विद्यालयों का निरीक्षण किया गया तो कई चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आईं।
दृश्य एक : गंदगी के बीच बन रहा था भोजन
प्राथमिक विद्यालय सतलिंगा में रसोईघर के आसपास गंदगी के बीच मध्याह्न भोजन तैयार किया जा रहा था। विद्यालय में 58 बच्चों के सापेक्ष 48 छात्र-छात्राएं उपस्थित थे, लेकिन उनके लिए मानक के तहत सब्जी नहीं बनाई जा रही थी। कम आलू की सब्जी बनाई जा रही थी। जबकि प्राथमिक स्तर के प्रत्येक बच्चे को मध्याह्न भोजन में करीब 450 कैलोरी ऊर्जा और 12 ग्राम प्रोटीन उपलब्ध कराना निर्धारित है।
विज्ञापन
दृश्य दो : गैस सिलिंडर होने के बावजूद जल रही थी लकड़ी
कंपोजिट विद्यालय समोगर में मध्याह्न भोजन गैस के बजाय लकड़ी के चूल्हे पर पकाया जा रहा था। विद्यालय में गैस सिलिंडर उपलब्ध होने के बावजूद उसका उपयोग नहीं किया जा रहा था। लकड़ी के धुएं से विद्यालय का वातावरण प्रदूषित हो रहा था। इससे रसोइयों के साथ-साथ बच्चों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। धुएं के कारण आंखों में जलन और श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा भी बना रहता है।
विज्ञापन
दृश्य तीन : यहां मिली बेहतर व्यवस्था
प्राथमिक विद्यालय गंगनिया में मध्याह्न भोजन व्यवस्था संतोषजनक मिली। निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन तैयार किया जा रहा था। भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता बेहतर पाई गई। गैस चूल्हे पर भोजन बनाया जा रहा था और रसोईघर भी साफ-सुथरा मिला।
विद्यालयों में उपलब्ध गैस सिलिंडर सामान्यतः आठ दिन में खाली हो जाता है, जबकि नया सिलिंडर उपलब्ध होने में नियमानुसार 25 से 30 दिन का समय लग जाता है। इसी कारण कुछ विद्यालयों में मजबूरी में लकड़ी के चूल्हे का उपयोग किया जाता है। प्राथमिक विद्यालय सतलिंगा में मिली अनियमितताओं के संबंध में नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। - नीतू वर्मा, खंड शिक्षा अधिकारी, महरौनी