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Lalitpur News: जनपद में बढ़ रही किडनी रोगियों की संख्या, प्रतिमाह हो रहे 600 से 650 डायलिसिस
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जनपद में किडनी रोगियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। मेडिकल कॉलेज के हीमोडायलिसिस यूनिट में प्रतिमाह 65 मरीज नियमित डायलिसिस के लिए पहुंच रहे हैं। इन मरीजों के प्रतिमाह लगभग 600 से 650 डायलिसिस किए जा रहे हैं। निशुल्क सुविधा होने से जनपद के साथ ही सीमा से सटे मध्यप्रदेश के मरीजों को लाभ मिल रहा है। मेडिसिन विभाग के चिकित्सकों का कहना है कि प्रतिमाह 10 से 15 नए मरीज किडनी के आ रहे हैं।
अनियमित दिनचर्या व बिगड़ते खान-पान और मानसिक तनाव लोगों को हाई ब्लड प्रेशर व डायबिटीज का मरीज बना रहा है। यह बीमारी लंबे समय तक रहने व उपचार न लेने से किडनी की समस्या हो रही है। वहीं, दर्द निवारक दवाओं का लगातार सेवन करना भी किडनी खराब करता है। यही कारण है कि अनदेखी करने से किडनी खराब हो रहीं हैं। चिकित्सकों का कहना है कि समय पर जानकारी होने से उपचार आसान हो जाता है।
मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के सहायक आचार्य डॉ. निखिल गुप्ता ने बताया कि ओपीडी में प्रतिमाह 10 से 15 नए मरीज किडनी की समस्या के पहुंच रहे हैं। इनमें पांच से छह मरीजों को डायलिसिस तक कराने पड़ रहे हैं। बचाव के लिए शुगर व बीपी की नियमित जांच व उपचार लेने और बिना चिकित्सक के दर्द निवारक दवाओं का सेवन न करने की सलाह दी है। साथ ही, किसी भी तरह के लक्षण होने पर नजर अंदाज न करने व चिकित्सक से उपचार लें।
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शरीर में यह हैं किडनी के कार्य
दोनों किडनियां शरीर की प्राकृतिक फिल्टर हैं। यह खून से विषैले पदार्थ और अतिरिक्त पानी को बाहर निकालती हैं। शरीर में नमक व पानी का संतुलन बनाए रखती हैं। यह रक्तचाप नियंत्रित करने में सहायक हैं। साथ ही, खून बनाने और हड्डियां मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
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यह है किडनी होने के कारण
- शुगर से किडनी फेल होने का बड़ा कारण है।
- लंबे समय तक बीपी अनियंत्रित रहने से ।
- बार-बार होने वाले किडनी संक्रमण या पथरी से।
- लंबे समय तक दर्द निवारक दवाओं का सेवन।
- धूम्रपान, तंबाकू और शराब का सेवन।
- कई लोगों को किडनी की बीमारी आनुवंशिक भी हो सकती है।
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यह हैं शुरुआती लक्षण
- पैरों, चेहरे पर सूजन।
- पेशाब में झाग या खून आना।
- पेशाब कम आना ।
- लगातार थकान, कमजोरी व कम भूख।
- रात में बार-बार पेशाब आना।
- लगातार उच्च रक्तचाप होना।
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इस तरह करें बचाव
- मधुमेह और बीपी को नियंत्रित रखें।
- प्रतिदिन चार से पांच लीटर पानी पिएं।
- नमक का सेवन कम करें व संतुलित और ताजा भोजन लें।
- नियमित व्यायाम करें और वजन पर नियंत्रित रखें।
- बिना चिकित्सक की सलाह के दर्द निवारक दवा न लें।
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मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित हीमोडायलिसिस यूनिट में 65 किडनी के मरीज पंजीकृत हैं। इन मरीजों के प्रतिमाह 600 से 650 डायलिसिस किए जा रहे हैं। सभी मरीजाें को निशुल्क सुविधा दी जा रही है। यहां पर ललितपुर व मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ व अशोकनगर के मरीज भी डायलिसिस को आ रहे हैं।
- अंजली शर्मा, यूनिट प्रभारी हीमोडायलिसिस यूनिट
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ललितपुर। जनपद में किडनी रोगियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। मेडिकल कॉलेज के हीमोडायलिसिस यूनिट में प्रतिमाह 65 मरीज नियमित डायलिसिस के लिए पहुंच रहे हैं। इन मरीजों के प्रतिमाह लगभग 600 से 650 डायलिसिस किए जा रहे हैं। निशुल्क सुविधा होने से जनपद के साथ ही सीमा से सटे मध्यप्रदेश के मरीजों को लाभ मिल रहा है। मेडिसिन विभाग के चिकित्सकों का कहना है कि प्रतिमाह 10 से 15 नए मरीज किडनी के आ रहे हैं।
अनियमित दिनचर्या व बिगड़ते खान-पान और मानसिक तनाव लोगों को हाई ब्लड प्रेशर व डायबिटीज का मरीज बना रहा है। यह बीमारी लंबे समय तक रहने व उपचार न लेने से किडनी की समस्या हो रही है। वहीं, दर्द निवारक दवाओं का लगातार सेवन करना भी किडनी खराब करता है। यही कारण है कि अनदेखी करने से किडनी खराब हो रहीं हैं। चिकित्सकों का कहना है कि समय पर जानकारी होने से उपचार आसान हो जाता है।
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मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के सहायक आचार्य डॉ. निखिल गुप्ता ने बताया कि ओपीडी में प्रतिमाह 10 से 15 नए मरीज किडनी की समस्या के पहुंच रहे हैं। इनमें पांच से छह मरीजों को डायलिसिस तक कराने पड़ रहे हैं। बचाव के लिए शुगर व बीपी की नियमित जांच व उपचार लेने और बिना चिकित्सक के दर्द निवारक दवाओं का सेवन न करने की सलाह दी है। साथ ही, किसी भी तरह के लक्षण होने पर नजर अंदाज न करने व चिकित्सक से उपचार लें।
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शरीर में यह हैं किडनी के कार्य
दोनों किडनियां शरीर की प्राकृतिक फिल्टर हैं। यह खून से विषैले पदार्थ और अतिरिक्त पानी को बाहर निकालती हैं। शरीर में नमक व पानी का संतुलन बनाए रखती हैं। यह रक्तचाप नियंत्रित करने में सहायक हैं। साथ ही, खून बनाने और हड्डियां मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
यह है किडनी होने के कारण
- शुगर से किडनी फेल होने का बड़ा कारण है।
- लंबे समय तक बीपी अनियंत्रित रहने से ।
- बार-बार होने वाले किडनी संक्रमण या पथरी से।
- लंबे समय तक दर्द निवारक दवाओं का सेवन।
- धूम्रपान, तंबाकू और शराब का सेवन।
- कई लोगों को किडनी की बीमारी आनुवंशिक भी हो सकती है।
यह हैं शुरुआती लक्षण
- पैरों, चेहरे पर सूजन।
- पेशाब में झाग या खून आना।
- पेशाब कम आना ।
- लगातार थकान, कमजोरी व कम भूख।
- रात में बार-बार पेशाब आना।
- लगातार उच्च रक्तचाप होना।
इस तरह करें बचाव
- मधुमेह और बीपी को नियंत्रित रखें।
- प्रतिदिन चार से पांच लीटर पानी पिएं।
- नमक का सेवन कम करें व संतुलित और ताजा भोजन लें।
- नियमित व्यायाम करें और वजन पर नियंत्रित रखें।
- बिना चिकित्सक की सलाह के दर्द निवारक दवा न लें।
मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित हीमोडायलिसिस यूनिट में 65 किडनी के मरीज पंजीकृत हैं। इन मरीजों के प्रतिमाह 600 से 650 डायलिसिस किए जा रहे हैं। सभी मरीजाें को निशुल्क सुविधा दी जा रही है। यहां पर ललितपुर व मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ व अशोकनगर के मरीज भी डायलिसिस को आ रहे हैं।
- अंजली शर्मा, यूनिट प्रभारी हीमोडायलिसिस यूनिट