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Lalitpur News: लाखों की लागत से बने आरआरसी बंद पड़े
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अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। सरकार भले ही गांवों को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए पानी की तरह पैसा बहा रही हो, लेकिन ब्लॉक मड़ावरा के कई ग्रामीण क्षेत्रों में धरातल पर इसकी उल्टी ही तस्वीर सामने आ रही है। ग्राम पंचायत में लाखों रुपये खर्च कर आरआरसी (कूड़ा निष्पादन केंद्र ) बनाए गए लेकिन सरकार की मंशानुसार अधिकांश ग्राम पंचायतों में अभी तक इनका संचालन नहीं किया जा सका। आलम यह है कि कहीं ताले पड़े हुए हैं, तो कही रख-रखाव के अभाव में गेट टूटे पड़े है। आरआरसी सेंटरों का संचालन न होने से गांव की गलियों में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं। बारिश के कारण पानी जमा होने से गंदगी सड़ रही है और बदबू फैल रही है, जिससे ग्रामीणों का निकलना मुश्किल हो गया है। पेश है कुछ सेंटरों का आंखों देखा हाल...।
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गांव की गलियों में जगह-जगह लग रहे कचरे के ढेर
आरआरसी का संचालन न होने से वर्तमान में गांव की गलियों में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं। गंदगी सड़ रही है और बदबू फैल रही है। गांव के मुख्य रास्तों और गलियों में जलभराव तथा गंदगी के कारण संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। गंगचारी गांव निवासी जयपाल सिंह, लिधौरा के कमतू अहिरवार व सिरोंन के हल्ले अहिरवार ने बताया कि निर्माण कार्य के दौरान ही बड़े-बड़े दावे किए गए थे कि इससे गांवों को कचरे से मुक्ति मिलेगी और पंचायत की आय भी बढ़ेगी, लेकिन निर्माण पूरा होते ही अधिकारी और ग्राम विकास से जुड़े जिम्मेदार इसे पूरी तरह भूल गए।
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ग्रामीण कचरा प्रबंधन के लिए इन सेंटरों का कराया गया था निर्माण
ग्राम पंचायतों में ग्रामीण कचरा प्रबंधन के लिए इन सेंटरों का निर्माण कराया गया था। योजना के मुताबिक, गांवों से निकलने वाले गीले, सूखे, प्लास्टिक और कांच के कचरे को अलग-अलग निस्तारित करने के लिए विशेष चेंबर बनाए गए थे, लेकिन हकीकत यह है कि आज तक इन सेंटरों पर ताले ही नहीं खुले। संचालन न होने से सेंटरों के भीतर बने चेंबर अब टूटने लगे हैं। खिड़की, दरवाजे और प्लास्टर उखड़ रहे हैं। लाखों रुपये की लागत से बनीं ये इमारतें अब उपयोग में आने के बजाय झाड़ियों और लावारिश पशुओं का ठिकाना बनती जा रही हैं।
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फैक्ट फाइल
जनपद की ग्राम पंचायतें-415
आरआरसी बने 395
कुल लागत-पांच से 10 लाख
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जानकारी मिली है कि कई ग्राम पंचायतों में आरआरसी बंद पड़े हैं इन्हें जल्द खुलवाने के निर्देश दिए जाएंगे। -कुंवर सिंह यादव, जिला पंचायत राज अधिकारी
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ललितपुर। सरकार भले ही गांवों को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए पानी की तरह पैसा बहा रही हो, लेकिन ब्लॉक मड़ावरा के कई ग्रामीण क्षेत्रों में धरातल पर इसकी उल्टी ही तस्वीर सामने आ रही है। ग्राम पंचायत में लाखों रुपये खर्च कर आरआरसी (कूड़ा निष्पादन केंद्र ) बनाए गए लेकिन सरकार की मंशानुसार अधिकांश ग्राम पंचायतों में अभी तक इनका संचालन नहीं किया जा सका। आलम यह है कि कहीं ताले पड़े हुए हैं, तो कही रख-रखाव के अभाव में गेट टूटे पड़े है। आरआरसी सेंटरों का संचालन न होने से गांव की गलियों में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं। बारिश के कारण पानी जमा होने से गंदगी सड़ रही है और बदबू फैल रही है, जिससे ग्रामीणों का निकलना मुश्किल हो गया है। पेश है कुछ सेंटरों का आंखों देखा हाल...।
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गांव की गलियों में जगह-जगह लग रहे कचरे के ढेर
आरआरसी का संचालन न होने से वर्तमान में गांव की गलियों में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं। गंदगी सड़ रही है और बदबू फैल रही है। गांव के मुख्य रास्तों और गलियों में जलभराव तथा गंदगी के कारण संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। गंगचारी गांव निवासी जयपाल सिंह, लिधौरा के कमतू अहिरवार व सिरोंन के हल्ले अहिरवार ने बताया कि निर्माण कार्य के दौरान ही बड़े-बड़े दावे किए गए थे कि इससे गांवों को कचरे से मुक्ति मिलेगी और पंचायत की आय भी बढ़ेगी, लेकिन निर्माण पूरा होते ही अधिकारी और ग्राम विकास से जुड़े जिम्मेदार इसे पूरी तरह भूल गए।
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ग्रामीण कचरा प्रबंधन के लिए इन सेंटरों का कराया गया था निर्माण
ग्राम पंचायतों में ग्रामीण कचरा प्रबंधन के लिए इन सेंटरों का निर्माण कराया गया था। योजना के मुताबिक, गांवों से निकलने वाले गीले, सूखे, प्लास्टिक और कांच के कचरे को अलग-अलग निस्तारित करने के लिए विशेष चेंबर बनाए गए थे, लेकिन हकीकत यह है कि आज तक इन सेंटरों पर ताले ही नहीं खुले। संचालन न होने से सेंटरों के भीतर बने चेंबर अब टूटने लगे हैं। खिड़की, दरवाजे और प्लास्टर उखड़ रहे हैं। लाखों रुपये की लागत से बनीं ये इमारतें अब उपयोग में आने के बजाय झाड़ियों और लावारिश पशुओं का ठिकाना बनती जा रही हैं।
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फैक्ट फाइल
जनपद की ग्राम पंचायतें-415
आरआरसी बने 395
कुल लागत-पांच से 10 लाख
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जानकारी मिली है कि कई ग्राम पंचायतों में आरआरसी बंद पड़े हैं इन्हें जल्द खुलवाने के निर्देश दिए जाएंगे। -कुंवर सिंह यादव, जिला पंचायत राज अधिकारी