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आरटीई : निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को वित्तीय सहायता देने से पहले सत्यापन की प्रक्रिया शुरू
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। आरटीई के तहत निजी विद्यालयों को धनराशि देने से पूर्व बच्चों का सत्यापन प्रक्रिया शुरू की गई है। यह प्रक्रिया 30 जुलाई तक पूरी की जाएगी।
शिक्षा का अधिकार (आरटीई) में आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चों के लिए निजी विद्यालयों में प्रवेश कराकर शिक्षा दिलाई जाती है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन किया जाता है। लॉटरी के जरिए बच्चों के लिए विद्यालय आवंटित किए जाते है। इसके बाद शिक्षा विभाग इन चयनित हुए बच्चों को आवंटित हुए विद्यालयों में प्रवेश कराते है। जनपद के निजी विद्यालयों में 5900 के करीब बच्चे योजना के हित पढ़ाई कर रहे हैं। आरटीई के तहत निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की फीस प्रतिपूर्ति के रूप में अधिकतम 5400 रुपये प्रति वर्ष शासन की ओर से निजी विद्यालय प्रशासन को दी जाती है। इसके साथ-साथ यहां पढ़ने वाले बच्चों के लिए भी करीब पांच हजार रुपये की धनराशि उनके अभिभावकों के खाते में दी जाती है। इस धनराशि से बच्चे अपनी कॉपी-किताबें, ड्रेस, जूता-मोजा सहित कार्य पुस्तकों को लेता है।
वर्जन
वर्तमान में करीब 5900 बच्चे निजी विद्यालयों में पढ़ने का डाटा उपलब्ध है। इन बच्चों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता के लिए इनका सत्यापन किया जा रहा है। शासन के निर्देश पर 30 जुलाई तक सत्यापन पूर्ण किया जाएगा।प्रदीप श्रीवास्तव, जिला समन्वयक, सामुदायिक सहभागिता
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ललितपुर। आरटीई के तहत निजी विद्यालयों को धनराशि देने से पूर्व बच्चों का सत्यापन प्रक्रिया शुरू की गई है। यह प्रक्रिया 30 जुलाई तक पूरी की जाएगी।
शिक्षा का अधिकार (आरटीई) में आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चों के लिए निजी विद्यालयों में प्रवेश कराकर शिक्षा दिलाई जाती है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन किया जाता है। लॉटरी के जरिए बच्चों के लिए विद्यालय आवंटित किए जाते है। इसके बाद शिक्षा विभाग इन चयनित हुए बच्चों को आवंटित हुए विद्यालयों में प्रवेश कराते है। जनपद के निजी विद्यालयों में 5900 के करीब बच्चे योजना के हित पढ़ाई कर रहे हैं। आरटीई के तहत निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की फीस प्रतिपूर्ति के रूप में अधिकतम 5400 रुपये प्रति वर्ष शासन की ओर से निजी विद्यालय प्रशासन को दी जाती है। इसके साथ-साथ यहां पढ़ने वाले बच्चों के लिए भी करीब पांच हजार रुपये की धनराशि उनके अभिभावकों के खाते में दी जाती है। इस धनराशि से बच्चे अपनी कॉपी-किताबें, ड्रेस, जूता-मोजा सहित कार्य पुस्तकों को लेता है।
वर्जन
वर्तमान में करीब 5900 बच्चे निजी विद्यालयों में पढ़ने का डाटा उपलब्ध है। इन बच्चों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता के लिए इनका सत्यापन किया जा रहा है। शासन के निर्देश पर 30 जुलाई तक सत्यापन पूर्ण किया जाएगा।प्रदीप श्रीवास्तव, जिला समन्वयक, सामुदायिक सहभागिता
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