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Maharajganj News: नो मैंस लैंड की समानांतर पुल का एप्रोच धंसा, गुणवत्ता पर उठे सवाल

Sun, 02 Aug 2026 01:48 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 02 Aug 2026 01:48 AM IST
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Approach to bridge parallel to 'No Man's Land' collapses; questions raised about quality.
नोमैंस लैंड के समानांतर बनी सड़क पर डंडा नदी पुल का बैठा एप्रोच- संवाद
महराजगंज। 268 करोड़ रुपये से नो मैंस लैंड के समानांतर बनी सड़क की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। महज तीन माह के भीतर 80 किमी की इस सड़क पर बैरिहवां डंडा नदी पर बने पुल का एप्रोच धंस गया है, इससे पुल पर चढ़ने व उतरने में भारी वाहनों को असुविधा हो रही है।
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सीमा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में कनेक्टिविटी बढ़ाने के साथ-साथ एसएसबी की पेट्रोलिंग को आसान बनाने के उद्देश्य से भारत सरकार के गृहमंत्रालय व राज्य सरकार ने 2010 में भारत नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे नो मैंस लैंड के समानांतर रणनीतिक सड़क परियोजना को मंजूर किया था। योजना के तहत 2021 में बिहार सीमा से सटे महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, लखीमपुर और पीलीभीत के बीच 550 किमी सड़क निर्माण कार्य को इंडो-नेपाल प्रोजेक्ट को सुपुर्द किया गया। इस परियोजना के तहत जनपद में 80 किमी सड़क का निर्माण 268 करोड़ रुपये से पूरा कराया गया।
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बता दें कि प्रदेश से जुड़ी नेपाल सीमा खुली होने के कारण हमेशा से संवेदनशील मानी जाती है। इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के पास है। हालांकि मुख्य बॉर्डर से इतर पगडंडियों पर गश्त करना सुरक्षा एजेंसी के लिए चुनौतीपूर्ण था। रणनीतिक महत्व की 80 किलोमीटर लंबी सड़क बनने के बाद जनपद में एसएसबी की 13 बॉर्डर आउट पोस्ट (बीओपी) आपस में जुड़ गईं, जिससे पेट्रोलिंग काफी आसान हो गई।
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अराजी सरकार व परसा मलिक में एप्रोच धंसा, सड़क किनारे बने गड्ढे
रणनीतिक सड़क बनने से सीमा क्षेत्र की करीब 40 से 50 ग्राम पंचायतों की कनेक्टिविटी बेहतर हुई। सड़क बनने के बाद इन गांवों में जमीनों के दाम भी बढ़ने लगे थे लेकिन हैंडओवर के कुछ ही समय बाद अराजी सरकार उर्फ बैरिहवां में डंडा नदी पर बने पुल का एप्रोच नौतनवां और झुलनीपुर दोनों ओर धंस गया है। इससे भारी वाहनों के आवागमन में परेशानी हो रही है।
पुल के दोनों ओर करीब छह स्थानों पर बारिश का पानी जमा होने से सड़क भी दरक गई है। वहीं परसा मलिक क्षेत्र में जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण सड़क के किनारे कई जगह गड्ढे बन गए हैं। करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़क की पहली ही बारिश में धंस जाने से क्षेत्रीय लोगों को हैरान कर दिया है। लोगों का कहना है कि गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देश में बनी सड़क यदि पहली बारिश भी नहीं झेल सकी तो निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।



जनपद में इंडो-नेपाल प्रोजेक्ट के तहत 80 किलोमीटर सड़क का निर्माण पूरा होने के बाद इसे राज्य निर्माण खंड, लोक निर्माण विभाग को हैंडओवर कर दिया गया है। यदि कहीं एप्रोच धंसा है या सड़क क्षतिग्रस्त हुई है तो संबंधित निर्माण खंड को अवगत कराकर मरम्मत कराई जाएगी। निर्माण कार्य भारत सरकार के गृह मंत्रालय और राज्य निर्माण खंड के निर्धारित मानकों के अनुरूप कराया गया है। निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही का प्रश्न नहीं उठता।
- सैय्यद अख्तर अब्बास, अधिशासी अभियंता, लोनिवि इंडो-नेपाल परियोजना
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