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Maharajganj News: प्रगणक व सर्वेयर के फोन में सेव नहीं होगा जनगणना का डाटा
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साइबर ठगी की संभावना नहीं, पोर्टल पर सुरक्षित रहेगी जानकारी
अगले माह से जनगणना में जुटेंगे प्रगणक, हो चुका है प्रशिक्षण
महराजगंज। डिजिटल तकनीकी की मदद से जनगणना को लेकर किसी प्रकार के भ्रम में न रहें। पर्सनल डेटा लीक होने का किसी तरह का खतरा नहीं है क्योंकि प्रगणक या सर्वेयर के फोन में जनगणना का डाटा प्रतिरूप के तौर पर नहीं बचेगा। यह फीडिंग करते ही पोर्टल के सर्वर पर अपलोड हो जाएगा। यह जानकारी देते हुए एडीएम डॉ. प्रशांत ने जनगणना में बेफिक्र होकर लोगों से सभी तरह का जवाब देने के लिए प्रेरित किया।
प्रभावी जनगणना को इस बार पूरी तरह डिजिटल ढांचे में तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि पहली बार ऐसा सिस्टम तैयार किया गया है, जिसमें मोबाइल फोन केवल डेटा एंट्री का माध्यम होगा, इसमें स्थायी स्टोरेज नहीं रहेगा। कर्मचारी जैसे ही किसी परिवार का विवरण एप से भरेंगे, नेटवर्क उपलब्ध होने पर जानकारी एन्क्रिप्ट होकर सर्वर पर पहुंच जाएगी। इससे मोबाइल पर उसकी कॉपी नहीं रहेगी।
प्रत्येक सर्वेयर को 20 परिवारों की एंट्री का लक्ष्य
प्रत्येक सर्वेयर को रोजाना करीब 20 परिवारों की एंट्री का लक्ष्य प्रशिक्षण के समय बताया गया है। प्रशिक्षण के दौरान मोबाइल एप संचालन, पहचान सत्यापन, लोकेशन टैगिंग और डाटा अपलोड की प्रक्रिया समझाई जा रही है। इस प्रक्रिया के दौरान किस कर्मचारी ने कितने घरों का सर्वे किया, कितनी प्रविष्टियां लंबित हैं और कौन सा क्षेत्र बाकी है, इसकी जानकारी कंट्रोल रूम स्तर पर ऑनलाइन देखी जा सकेगी। इससे काम की गति पर नजर रखने के साथ त्रुटियों को तुरंत सुधारा जा सकेगा।
वर्जन
पिछले कुछ वर्षों में डाटा चोरी और साइबर ठगी के मामलों में बढ़ोतरी के मद्देनजर जनगणना में सुरक्षा के भरपूर प्रबंध किए गए हैं। इसलिए निश्चिंत होकर लोग जनगणना के दौरान पूछे गए प्रश्नों का जवाब दें।
-डाॅ. प्रशांत कुमार, एडीएम, महराजगंज
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अगले माह से जनगणना में जुटेंगे प्रगणक, हो चुका है प्रशिक्षण
महराजगंज। डिजिटल तकनीकी की मदद से जनगणना को लेकर किसी प्रकार के भ्रम में न रहें। पर्सनल डेटा लीक होने का किसी तरह का खतरा नहीं है क्योंकि प्रगणक या सर्वेयर के फोन में जनगणना का डाटा प्रतिरूप के तौर पर नहीं बचेगा। यह फीडिंग करते ही पोर्टल के सर्वर पर अपलोड हो जाएगा। यह जानकारी देते हुए एडीएम डॉ. प्रशांत ने जनगणना में बेफिक्र होकर लोगों से सभी तरह का जवाब देने के लिए प्रेरित किया।
प्रभावी जनगणना को इस बार पूरी तरह डिजिटल ढांचे में तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि पहली बार ऐसा सिस्टम तैयार किया गया है, जिसमें मोबाइल फोन केवल डेटा एंट्री का माध्यम होगा, इसमें स्थायी स्टोरेज नहीं रहेगा। कर्मचारी जैसे ही किसी परिवार का विवरण एप से भरेंगे, नेटवर्क उपलब्ध होने पर जानकारी एन्क्रिप्ट होकर सर्वर पर पहुंच जाएगी। इससे मोबाइल पर उसकी कॉपी नहीं रहेगी।
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प्रत्येक सर्वेयर को 20 परिवारों की एंट्री का लक्ष्य
प्रत्येक सर्वेयर को रोजाना करीब 20 परिवारों की एंट्री का लक्ष्य प्रशिक्षण के समय बताया गया है। प्रशिक्षण के दौरान मोबाइल एप संचालन, पहचान सत्यापन, लोकेशन टैगिंग और डाटा अपलोड की प्रक्रिया समझाई जा रही है। इस प्रक्रिया के दौरान किस कर्मचारी ने कितने घरों का सर्वे किया, कितनी प्रविष्टियां लंबित हैं और कौन सा क्षेत्र बाकी है, इसकी जानकारी कंट्रोल रूम स्तर पर ऑनलाइन देखी जा सकेगी। इससे काम की गति पर नजर रखने के साथ त्रुटियों को तुरंत सुधारा जा सकेगा।
वर्जन
पिछले कुछ वर्षों में डाटा चोरी और साइबर ठगी के मामलों में बढ़ोतरी के मद्देनजर जनगणना में सुरक्षा के भरपूर प्रबंध किए गए हैं। इसलिए निश्चिंत होकर लोग जनगणना के दौरान पूछे गए प्रश्नों का जवाब दें।
-डाॅ. प्रशांत कुमार, एडीएम, महराजगंज
