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Maharajganj News: गोरखपुर-सोनौली फोरलेन निर्माण अंतिम चरण में, जल्द भरेंगे फर्राटा
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महराजगंज/सोनौली। गोरखपुर-सोनौली फोरलेन निर्माण अंतिम चरण में है। एनएचआई के मुताबिक, 95 फीसदी कार्य पूरा हो चुका है। शेष बचा पांच फीसदी निर्माण पूरा होने के बाद परियोजना से उत्तर प्रदेश, दिल्ली एनसीआर और बिहार से मित्र राष्ट्र नेपाल की यात्रा सुगम, तीव्र व सुरक्षित हो जाएगी।
जिले के सोनौली अंतरराष्ट्रीय सीमा देश के सबसे व्यस्त सीमाओं में एक मानी जाती है। 70 फीसदी से अधिक मालवाहक इसी बार्डर का उपयोग नेपाल जाने के लिए करते हैं। सोनौली कस्टम के मुताबिक, हर दिन इस बार्डर से गुजरने वाले मालवाहकों की औसत संख्या 300 से अधिक है। इसके अलावा पर्यटक व श्रद्धालुओं के लिए भी यह सीमा मुफीद है, क्योंकि यहां से पश्चिमी नेपाल के स्वर्गदुआरी मंदिर, मुक्तिनाथ, मनोकामना देवी के साथ पशुपतिनाथ निकलने की राह सुगम है। वर्तमान में दो-लेन मार्ग होने से इस बाॅर्डर पर अक्सर लंबा जाम लगता है जिससे निपटने में मालवाहक व पर्यटक वाहनों को जूझना पड़ रहा था लेकिन निर्माण पूर्ण होने के बाद सीमा पर जाम की समस्या का पूरी तरह समाधान हो जाएगा, क्योंकि फोर लेन होने से पर्यटक, मालवाहक, कारोबारी व आमजन के लिए अलग-अलग लेन तय हो सकेगा। दिल्ली व बिहार को सीधे नेपाल जोड़ने वाले गोरखपुर-सोनौली फोरलेन की प्रगति न सिर्फ यात्रियों को उत्साहित कर रही, बल्कि बड़े कारोबारियों को उम्मीद है कि अब वह नेपाल में पहले से अधिक तेजी के साथ आपूर्ति भेज सकेंगे।
1458 करोड़ रुपये की है परियोजना
इस परियोजना की कुल लागत 1458 करोड़ रुपये है। इसमें जंगल कौड़िया से लेकर सोनौली सीमा तक फोरलेन विकसित किया गया। एनएचआई के मुताबिक, इस काॅरिडोर परियोजना का विकास कुछ इस तरह से किया गया है कि भविष्य में अगर इस मार्ग को सिक्स लेन करने की जरूरत पड़े तो इसमें अधिक समय न लगे।
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एनएचआई इस फोरलेन काॅरिडोर पर बेहतर परिवहन व्यवस्था प्रभावी रखने के लिए एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम की व्यवस्था कर रहा है। इसमें सीसीटीवी, इमरजेंसी फोन बॉक्स, इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले संकेतक, रियल-टाइम ट्रैफिक मॉनिटरिंग की व्यवस्था होगी। इससे दुर्घटना की स्थिति में त्वरित सहायता पहुंचाना आसान होगा और परिवहन प्रबंधन को रफ्तार मिलेगी।
मनोज कुमार सिंह, एआरटीओ, महराजगंज।
गोरखपुर-सोनौली फोर लेन निर्माण अपने आखिरी चरण में है। सिर्फ पांच फीसदी कार्य अवशेष है। हमारी तैयारी है कि इसे 15 अगस्त तक पूरा करा लिया जाए। हालांकि निर्माण समय सीमा सितंबर 2027 की है।
अंकित कुमार, डीजीएम, एनएचआई।
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जिले के सोनौली अंतरराष्ट्रीय सीमा देश के सबसे व्यस्त सीमाओं में एक मानी जाती है। 70 फीसदी से अधिक मालवाहक इसी बार्डर का उपयोग नेपाल जाने के लिए करते हैं। सोनौली कस्टम के मुताबिक, हर दिन इस बार्डर से गुजरने वाले मालवाहकों की औसत संख्या 300 से अधिक है। इसके अलावा पर्यटक व श्रद्धालुओं के लिए भी यह सीमा मुफीद है, क्योंकि यहां से पश्चिमी नेपाल के स्वर्गदुआरी मंदिर, मुक्तिनाथ, मनोकामना देवी के साथ पशुपतिनाथ निकलने की राह सुगम है। वर्तमान में दो-लेन मार्ग होने से इस बाॅर्डर पर अक्सर लंबा जाम लगता है जिससे निपटने में मालवाहक व पर्यटक वाहनों को जूझना पड़ रहा था लेकिन निर्माण पूर्ण होने के बाद सीमा पर जाम की समस्या का पूरी तरह समाधान हो जाएगा, क्योंकि फोर लेन होने से पर्यटक, मालवाहक, कारोबारी व आमजन के लिए अलग-अलग लेन तय हो सकेगा। दिल्ली व बिहार को सीधे नेपाल जोड़ने वाले गोरखपुर-सोनौली फोरलेन की प्रगति न सिर्फ यात्रियों को उत्साहित कर रही, बल्कि बड़े कारोबारियों को उम्मीद है कि अब वह नेपाल में पहले से अधिक तेजी के साथ आपूर्ति भेज सकेंगे।
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1458 करोड़ रुपये की है परियोजना
इस परियोजना की कुल लागत 1458 करोड़ रुपये है। इसमें जंगल कौड़िया से लेकर सोनौली सीमा तक फोरलेन विकसित किया गया। एनएचआई के मुताबिक, इस काॅरिडोर परियोजना का विकास कुछ इस तरह से किया गया है कि भविष्य में अगर इस मार्ग को सिक्स लेन करने की जरूरत पड़े तो इसमें अधिक समय न लगे।
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एनएचआई इस फोरलेन काॅरिडोर पर बेहतर परिवहन व्यवस्था प्रभावी रखने के लिए एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम की व्यवस्था कर रहा है। इसमें सीसीटीवी, इमरजेंसी फोन बॉक्स, इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले संकेतक, रियल-टाइम ट्रैफिक मॉनिटरिंग की व्यवस्था होगी। इससे दुर्घटना की स्थिति में त्वरित सहायता पहुंचाना आसान होगा और परिवहन प्रबंधन को रफ्तार मिलेगी।
मनोज कुमार सिंह, एआरटीओ, महराजगंज।
गोरखपुर-सोनौली फोर लेन निर्माण अपने आखिरी चरण में है। सिर्फ पांच फीसदी कार्य अवशेष है। हमारी तैयारी है कि इसे 15 अगस्त तक पूरा करा लिया जाए। हालांकि निर्माण समय सीमा सितंबर 2027 की है।
अंकित कुमार, डीजीएम, एनएचआई।