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Maharajganj News: सीमा पर बढ़ी मोबाइल की तस्करी, दो दिन में 73 आईफोन बरामद
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सीमा से बरामद मोबाईल व बाइक।
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सोनौली। भारत-नेपाल सीमा पर दो दिनों के भीतर 73 आईफोन की बरामदगी ने सीमा के रास्ते ब्रांडेड मोबाइल फोन की तस्करी के बड़े नेटवर्क की ओर इशारा किया है। नेपाल पुलिस ने रविवार और सोमवार को की गई अलग-अलग कार्रवाई में करीब 50 लाख रुपये मूल्य के आईफोन बरामद किए हैं।
रविवार को बेलहिया नेपाल में वाहन जांच के दौरान सोनौली से नेपाल जा रही एक नेपाली नंबर की स्कूटी से 38 आईफोन बरामद किए गए थे। वहीं सोमवार सुबह नेपाल पुलिस ने भारतीय नंबर की बाइक पर सवार एक नेपाली युवक से 35 आईफोन को बरामद कर बाइक समेत जब्त कर लिया। दोनों मामलों में बरामद मोबाइल और आरोपियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भैरहवा भंसार कार्यालय भेज दिया गया है। बीते माह भैरहवा में 20 और बुटवल में लावारिस 40 मोबाइल फोन पुलिस ने बरामद किया था।
सीमा क्षेत्र में लगातार बरामदगी से यह संकेत मिल रहे हैं कि भारत से नेपाल ब्रांडेड मोबाइल फोन की तस्करी संगठित तरीके से की जा रही है। कड़ी सुरक्षा और नियमित जांच के बावजूद तस्कर महंगे मोबाइल आसानी से सीमा पार कराने में सफल हो रहे हैं। दो दिनों में हुई कार्रवाई के बाद नेपाल पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुट गई है। सीमा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि भारत और नेपाल के बीच इलेक्ट्रॉनिक सामान की कीमत और टैक्स में अंतर का फायदा उठाकर तस्कर लंबे समय से इस अवैध कारोबार में सक्रिय हैं।
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पैकेट से निकालकर नेपाल पहुंचाए जा रहे लाखों के मोबाइल
तस्कर जांच एजेंसियों की नजर से बचने के लिए मोबाइल फोन को उसके मूल पैकेट से निकालकर अलग-अलग कैरियर के माध्यम से नेपाल पहुंचा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, नेपाल में आईफोन समेत कई ब्रांडेड मोबाइल फोन की भारी मांग है। तस्करी के दौरान एक से दो लाख रुपये की कीमत के मोबाइल फोन कैरियर अपनी जेब या अन्य सुरक्षित स्थानों पर रखकर सीमा पार कराते हैं, जबकि मोबाइल के खाली डिब्बे अलग से नेपाल भेजे जाते हैं। इसके बाद नेपाल में मोबाइल और उसके पैकेट में पैक कर ग्राहकों तक पहुंचाया जाता है।
इस अवैध धंधे से जुड़े एक कैरियर ने बताया कि एक आईफोन नेपाल पहुंचाने पर उसे एक हजार और अन्य मोबाइल फोन पर 800 रुपये तक मिलता है। उसके अनुसार, एक कैरियर प्रतिदिन करीब 20 मोबाइल फोन नेपाल पहुंचा देता है। कैरियर ने बताया कि मोबाइल फोन उन्हें सोनौली बस डिपो के पीछे, मुख्य गेट के आसपास अथवा फरेंनिया गांव मार्ग पर अलग-अलग स्थानों से दिए जाते हैं।
उनका काम केवल वहां से मोबाइल नेपाल के भैरहवा स्थित एक दुकान तक पहुंचाना होता है। आगे की सप्लाई स्थानीय नेटवर्क के माध्यम से काठमांडू, पोखरा और अन्य शहरों में की जाती है।
बस और फर्जी बिल के सहारे नेपाल पहुंच रहे महंगे मोबाइल
भारत-नेपाल सीमा से महंगे मोबाइल फोन की तस्करी के लिए एक संगठित नेटवर्क सक्रिय होने की बात सामने आ रही है। सूत्रों के अनुसार, देश के विभिन्न महानगरों से मोबाइल फोन छोटे-छोटे पार्सलों के माध्यम से पहले गोरखपुर और सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंचाए जाते हैं, जहां से उन्हें अलग-अलग माध्यमों से नेपाल भेजा जाता है। बताया गया कि दिल्ली, नोएडा, कोलकाता, गाजियाबाद, गुजरात और पंजाब सहित कई राज्यों से मोबाइल फोन कच्चे बिल फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बस और रेल मार्ग से गोरखपुर तक लाए जाते हैं। इसके बाद पार्सल डिलीवरी करने वाला व्यक्ति सामान सौंपकर वापस लौट जाता है। सूत्रों का दावा है कि सीमावर्ती क्षेत्र में पहुंचने के बाद मूल बिल को निरस्त कर स्थानीय स्तर पर नए बिल तैयार किए जाते हैं।
प्रतिमाह करोड़ों की टैक्स चोरी का अनुमान
भारत-नेपाल सीमा से हो रही मोबाइल फोन की कथित तस्करी केवल सुरक्षा एजेंसियों के लिए ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के राजस्व के लिए भी बड़ी चुनौती बनती जा रही है। सूत्रों के अनुसार, इस अवैध कारोबार के चलते भारत और नेपाल दोनों को हर माह करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। सीमावर्ती क्षेत्र में मोबाइल कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि भारत-नेपाल सीमा से सटे लगभग 10 किलोमीटर के दायरे में मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक सामान से संबंधित 100 से अधिक दुकानें संचालित हैं। आरोप है कि इनमें से कुछ दुकानें वैध व्यापार के साथ-साथ अवैध तरीके से मोबाइल फोन नेपाल भेजने के नेटवर्क से भी जुड़ी हुई हैं। इस संबंध में कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
सूत्रों के मुताबिक, मोबाइल फोन पहले सीमावर्ती बाजारों तक पहुंचाए जाते हैं और फिर मुख्य मार्गों के अलावा ग्रामीण संपर्क मार्गों एवं पगडंडियों के जरिए नेपाल भेज दिए जाते हैं। इस नेटवर्क में परिवहन और पार्सल सेवा से जुड़े कुछ लोगों भी शामिल होने की बात कही जा रही है। आरोप है कि सीमावर्ती क्षेत्रों तक माल पहुंचाने के लिए कुछ कार्गो सेवा संचालक करीब पांच प्रतिशत तक कमीशन लेते हैं। सामान गंतव्य तक पहुंचने के बाद उससे जुड़े बिल और दस्तावेज निरस्त कर दिए जाते हैं, जिससे लेनदेन का रिकॉर्ड नहीं रहता है। इसी कारण भारत में देय जीएसटी और नेपाल में लागू आयात भंसार एवं अन्य करों की कथित चोरी कर दोनों देशों के राजस्व को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
डीएसपी रूपनदेही कृष्णा कुमार चन्द ने बताया कि मोबाइल तस्करी के बढ़ते नेटवर्क को देखते हुए सुरक्षा और जांच एजेंसियों ने निगरानी तेज कर दी है। सीमा पर अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। बरामद मोबाइल सीज कर मुख्य सरगना की तलाश की जा रही है।
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रविवार को बेलहिया नेपाल में वाहन जांच के दौरान सोनौली से नेपाल जा रही एक नेपाली नंबर की स्कूटी से 38 आईफोन बरामद किए गए थे। वहीं सोमवार सुबह नेपाल पुलिस ने भारतीय नंबर की बाइक पर सवार एक नेपाली युवक से 35 आईफोन को बरामद कर बाइक समेत जब्त कर लिया। दोनों मामलों में बरामद मोबाइल और आरोपियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भैरहवा भंसार कार्यालय भेज दिया गया है। बीते माह भैरहवा में 20 और बुटवल में लावारिस 40 मोबाइल फोन पुलिस ने बरामद किया था।
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सीमा क्षेत्र में लगातार बरामदगी से यह संकेत मिल रहे हैं कि भारत से नेपाल ब्रांडेड मोबाइल फोन की तस्करी संगठित तरीके से की जा रही है। कड़ी सुरक्षा और नियमित जांच के बावजूद तस्कर महंगे मोबाइल आसानी से सीमा पार कराने में सफल हो रहे हैं। दो दिनों में हुई कार्रवाई के बाद नेपाल पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुट गई है। सीमा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि भारत और नेपाल के बीच इलेक्ट्रॉनिक सामान की कीमत और टैक्स में अंतर का फायदा उठाकर तस्कर लंबे समय से इस अवैध कारोबार में सक्रिय हैं।
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पैकेट से निकालकर नेपाल पहुंचाए जा रहे लाखों के मोबाइल
तस्कर जांच एजेंसियों की नजर से बचने के लिए मोबाइल फोन को उसके मूल पैकेट से निकालकर अलग-अलग कैरियर के माध्यम से नेपाल पहुंचा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, नेपाल में आईफोन समेत कई ब्रांडेड मोबाइल फोन की भारी मांग है। तस्करी के दौरान एक से दो लाख रुपये की कीमत के मोबाइल फोन कैरियर अपनी जेब या अन्य सुरक्षित स्थानों पर रखकर सीमा पार कराते हैं, जबकि मोबाइल के खाली डिब्बे अलग से नेपाल भेजे जाते हैं। इसके बाद नेपाल में मोबाइल और उसके पैकेट में पैक कर ग्राहकों तक पहुंचाया जाता है।
इस अवैध धंधे से जुड़े एक कैरियर ने बताया कि एक आईफोन नेपाल पहुंचाने पर उसे एक हजार और अन्य मोबाइल फोन पर 800 रुपये तक मिलता है। उसके अनुसार, एक कैरियर प्रतिदिन करीब 20 मोबाइल फोन नेपाल पहुंचा देता है। कैरियर ने बताया कि मोबाइल फोन उन्हें सोनौली बस डिपो के पीछे, मुख्य गेट के आसपास अथवा फरेंनिया गांव मार्ग पर अलग-अलग स्थानों से दिए जाते हैं।
उनका काम केवल वहां से मोबाइल नेपाल के भैरहवा स्थित एक दुकान तक पहुंचाना होता है। आगे की सप्लाई स्थानीय नेटवर्क के माध्यम से काठमांडू, पोखरा और अन्य शहरों में की जाती है।
बस और फर्जी बिल के सहारे नेपाल पहुंच रहे महंगे मोबाइल
भारत-नेपाल सीमा से महंगे मोबाइल फोन की तस्करी के लिए एक संगठित नेटवर्क सक्रिय होने की बात सामने आ रही है। सूत्रों के अनुसार, देश के विभिन्न महानगरों से मोबाइल फोन छोटे-छोटे पार्सलों के माध्यम से पहले गोरखपुर और सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंचाए जाते हैं, जहां से उन्हें अलग-अलग माध्यमों से नेपाल भेजा जाता है। बताया गया कि दिल्ली, नोएडा, कोलकाता, गाजियाबाद, गुजरात और पंजाब सहित कई राज्यों से मोबाइल फोन कच्चे बिल फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बस और रेल मार्ग से गोरखपुर तक लाए जाते हैं। इसके बाद पार्सल डिलीवरी करने वाला व्यक्ति सामान सौंपकर वापस लौट जाता है। सूत्रों का दावा है कि सीमावर्ती क्षेत्र में पहुंचने के बाद मूल बिल को निरस्त कर स्थानीय स्तर पर नए बिल तैयार किए जाते हैं।
प्रतिमाह करोड़ों की टैक्स चोरी का अनुमान
भारत-नेपाल सीमा से हो रही मोबाइल फोन की कथित तस्करी केवल सुरक्षा एजेंसियों के लिए ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के राजस्व के लिए भी बड़ी चुनौती बनती जा रही है। सूत्रों के अनुसार, इस अवैध कारोबार के चलते भारत और नेपाल दोनों को हर माह करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। सीमावर्ती क्षेत्र में मोबाइल कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि भारत-नेपाल सीमा से सटे लगभग 10 किलोमीटर के दायरे में मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक सामान से संबंधित 100 से अधिक दुकानें संचालित हैं। आरोप है कि इनमें से कुछ दुकानें वैध व्यापार के साथ-साथ अवैध तरीके से मोबाइल फोन नेपाल भेजने के नेटवर्क से भी जुड़ी हुई हैं। इस संबंध में कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
सूत्रों के मुताबिक, मोबाइल फोन पहले सीमावर्ती बाजारों तक पहुंचाए जाते हैं और फिर मुख्य मार्गों के अलावा ग्रामीण संपर्क मार्गों एवं पगडंडियों के जरिए नेपाल भेज दिए जाते हैं। इस नेटवर्क में परिवहन और पार्सल सेवा से जुड़े कुछ लोगों भी शामिल होने की बात कही जा रही है। आरोप है कि सीमावर्ती क्षेत्रों तक माल पहुंचाने के लिए कुछ कार्गो सेवा संचालक करीब पांच प्रतिशत तक कमीशन लेते हैं। सामान गंतव्य तक पहुंचने के बाद उससे जुड़े बिल और दस्तावेज निरस्त कर दिए जाते हैं, जिससे लेनदेन का रिकॉर्ड नहीं रहता है। इसी कारण भारत में देय जीएसटी और नेपाल में लागू आयात भंसार एवं अन्य करों की कथित चोरी कर दोनों देशों के राजस्व को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
डीएसपी रूपनदेही कृष्णा कुमार चन्द ने बताया कि मोबाइल तस्करी के बढ़ते नेटवर्क को देखते हुए सुरक्षा और जांच एजेंसियों ने निगरानी तेज कर दी है। सीमा पर अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। बरामद मोबाइल सीज कर मुख्य सरगना की तलाश की जा रही है।