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Maharajganj News: बंद चीनी मिल मिल्कियत पर नगर निकाय का अतिक्रमण
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गणेश शंकर चीनी मिल परिसर में गिराया जाता नगर पंचायत का कचरा- संवाद
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महराजगंज। कभी पूर्वांचल की चीनी उद्योग की पहचान और हजारों गन्ना किसानों की आजीविका का प्रमुख आधार रही गणेश शुगर मिल आज बदहाली और अतिक्रमण की मार झेल रही है। 33 एकड़ में फैला मिल परिसर धीरे-धीरे अतिक्रमणकारियों की गिरफ्त में सिमटता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि परिसर असामाजिक तत्वों का सुरक्षित ठिकाना बन गया है जबकि नगर पंचायत यहां मोहल्लों का कचरा डंप करा रही है। वहीं मिल के पश्चिमी और उत्तरी गेट के आसपास दुकानदार भी अपनी दुकानें परिसर तक फैलाकर कब्जे को स्थायी रूप देने में जुटे हैं।
वर्ष 1932 में जनपद के फरेंदा तहसील अंतर्गत जयपुरिया घराने के मुखिया सेठ आनंदराम जयपुरिया ने गणेश शुगर मिल की स्थापना की थी। फरेंदा में मिल के स्थापित होने के बाद क्षेत्र के तमाम किसान धीरे-धीरे गन्ने की खेती से जुड़े। उस समय सिर्फ इसी तहसील में गन्ने का रकबा 30 हजार हेक्टेयर तक पहुंचा था। 1988 तक यह मिल बेहतर कमाई की श्रेणी में शुमार थी लेकिन 1988 के बाद जयपुरिया घराने ने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के चलते इस मिल को सरकार को सुपुर्द कर दिया। निजी स्वामित्व से सरकार के पास गई यह शुगर मिल फरवरी 1994 में बैंक गारंटी न देने की स्थिति में बंद हो गई। चीनी मिल के बंद होने से क्षेत्र के गन्ना किसानों के लिए बड़ा झटका था हालांकि कि लंबे समय तक सैकड़ों मिल कर्मचारी मिल के बंद होने के बाद भी अपनी हाजिरी इस उद्देश्य में लगाते रहे कि उन्हें वेतन दिया जाएगा लेकिन संचालन न शुरू होने से मामला हाईकोर्ट चला गया। तभी से इस मिल का मामला कोर्ट के अधीन है और मिल संपत्ति की देखरेख हाईकोर्ट इलाहाबाद के शासकीय समापक के अधीन कर दिया गया। शासकीय समापक के कब्जे में मिल संपत्तियों के जाने के बाद स्थानीय प्रशासन ने भी लचरता दिखाई और मिल संपत्तियों पर अतिक्रमण प्रभावी हो गया।
मौजूदा समय में आनंद नगर नगर पंचायत उत्तरी गेट से अपने कूड़ा कचरा ढोने वाले वाहनों को मिल परिसर में भेजकर मोहल्लों का कचरा डंप करा रहा है। नगर पंचायत के इस कृत्य ने मिल पश्चिमी व उत्तरी गेट के निकट दुकानदारों करने वालों का मनोबल बढ़ा दिया है और वह भी मिल परिसर तक अपनी दुकानदारी का दायरा बढ़ा चुके हैं।
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2017 में कब्जे की शिकायत पर पहुंची थी टीम
मिल बंद होने के बाद यहां कब्जे की शुरूआत हो गई। शिकायत पर उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने तीन सदस्यीय टीम को भेजकर कब्जा हटवाया। इस लिक्विडेटर टीम में देवेंद्र श्रीवास्तव, राजन सोनकर व सुरेंद्र कन्नौजिया शामिल थे। टीम ने दो दिन यहां प्रवास किया और स्थानीय प्रशासन से मिलकर कब्जा खाली कराया लेकिन टीम के जाने के बाद से फिर वही स्थिति हो गई।
बारिश के कारण कुछ दिनों के लिए कचरा मिल परिसर में डंप कराया गया है। बारिश खत्म होते ही परिसर खाली करा दिया जाएगा।
राजेश जायसवाल, अध्यक्ष प्रतिनिधि नगर पंचायत आनंदनगर (फरेंदा)
गणेश शुगर मिल की संपत्तियां हाईकोर्ट शासकीय समापक टीम की देखरेख में है। अगर इसकी संपत्तियों पर कब्जा हो रहा तो जानकारी कोर्ट को देते हुए कब्जा हटवाया जाएगा।
प्रेम शंकर पांडेय, उपजिलाधिकारी, फरेंदा।
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वर्ष 1932 में जनपद के फरेंदा तहसील अंतर्गत जयपुरिया घराने के मुखिया सेठ आनंदराम जयपुरिया ने गणेश शुगर मिल की स्थापना की थी। फरेंदा में मिल के स्थापित होने के बाद क्षेत्र के तमाम किसान धीरे-धीरे गन्ने की खेती से जुड़े। उस समय सिर्फ इसी तहसील में गन्ने का रकबा 30 हजार हेक्टेयर तक पहुंचा था। 1988 तक यह मिल बेहतर कमाई की श्रेणी में शुमार थी लेकिन 1988 के बाद जयपुरिया घराने ने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के चलते इस मिल को सरकार को सुपुर्द कर दिया। निजी स्वामित्व से सरकार के पास गई यह शुगर मिल फरवरी 1994 में बैंक गारंटी न देने की स्थिति में बंद हो गई। चीनी मिल के बंद होने से क्षेत्र के गन्ना किसानों के लिए बड़ा झटका था हालांकि कि लंबे समय तक सैकड़ों मिल कर्मचारी मिल के बंद होने के बाद भी अपनी हाजिरी इस उद्देश्य में लगाते रहे कि उन्हें वेतन दिया जाएगा लेकिन संचालन न शुरू होने से मामला हाईकोर्ट चला गया। तभी से इस मिल का मामला कोर्ट के अधीन है और मिल संपत्ति की देखरेख हाईकोर्ट इलाहाबाद के शासकीय समापक के अधीन कर दिया गया। शासकीय समापक के कब्जे में मिल संपत्तियों के जाने के बाद स्थानीय प्रशासन ने भी लचरता दिखाई और मिल संपत्तियों पर अतिक्रमण प्रभावी हो गया।
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मौजूदा समय में आनंद नगर नगर पंचायत उत्तरी गेट से अपने कूड़ा कचरा ढोने वाले वाहनों को मिल परिसर में भेजकर मोहल्लों का कचरा डंप करा रहा है। नगर पंचायत के इस कृत्य ने मिल पश्चिमी व उत्तरी गेट के निकट दुकानदारों करने वालों का मनोबल बढ़ा दिया है और वह भी मिल परिसर तक अपनी दुकानदारी का दायरा बढ़ा चुके हैं।
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2017 में कब्जे की शिकायत पर पहुंची थी टीम
मिल बंद होने के बाद यहां कब्जे की शुरूआत हो गई। शिकायत पर उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने तीन सदस्यीय टीम को भेजकर कब्जा हटवाया। इस लिक्विडेटर टीम में देवेंद्र श्रीवास्तव, राजन सोनकर व सुरेंद्र कन्नौजिया शामिल थे। टीम ने दो दिन यहां प्रवास किया और स्थानीय प्रशासन से मिलकर कब्जा खाली कराया लेकिन टीम के जाने के बाद से फिर वही स्थिति हो गई।
बारिश के कारण कुछ दिनों के लिए कचरा मिल परिसर में डंप कराया गया है। बारिश खत्म होते ही परिसर खाली करा दिया जाएगा।
राजेश जायसवाल, अध्यक्ष प्रतिनिधि नगर पंचायत आनंदनगर (फरेंदा)
गणेश शुगर मिल की संपत्तियां हाईकोर्ट शासकीय समापक टीम की देखरेख में है। अगर इसकी संपत्तियों पर कब्जा हो रहा तो जानकारी कोर्ट को देते हुए कब्जा हटवाया जाएगा।
प्रेम शंकर पांडेय, उपजिलाधिकारी, फरेंदा।