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Maharajganj News: सड़क पर गिट्टी बिछाकर भूल गए जिम्मेदार, दो वर्षों से अधूरी पड़ी सड़क

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 08 Mar 2026 01:39 AM IST
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The responsible people forgot after laying gravel on the road, the road remained incomplete for two years.
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चानकी घाट से जंगल गुलहरिया मार्ग का काम अधूरा, लोग हो रहे परेशान
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लक्ष्मीपुर। वनग्रामों को मुख्य मार्ग से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू किया गया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ड्रीम प्रोजेक्ट लक्ष्मीपुर क्षेत्र में विभागों की लापरवाही का शिकार हो गया है। जंगल गुलहरिया से चानकी घाट तक लगभग 9 किलोमीटर लंबी प्रस्तावित इंटरलॉकिंग सड़क बीते दो वर्षों से अधूरी पड़ी है।
अब भी तीन किमी सड़क पर मात्र गिट्टियां बिछाकर छोड़ दिया गया है। सड़क निर्माण के नाम पर केवल मिट्टी पाटकर गिट्टी बिछा दी गई लेकिन इसके बाद कार्य को बीच में ही छोड़ दिया गया। परिणामस्वरूप स्थानीय ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कार्य की धीमी गति से ग्रामीणों में काफी आक्रोश व्याप्त है।
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जानकारी के अनुसार, लक्ष्मीपुर क्षेत्र के दुर्गम जंगलों में बसे वनग्राम कानपुर दर्रा और बेलौहा दर्रा को मुख्य सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए शासन स्तर पर दो वर्ष पूर्व इस सड़क निर्माण की स्वीकृति दी गई थी। यह सड़क जंगल गुलहरिया से चानकी घाट तक बनाई जानी थी, ताकि वन क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों को आवागमन, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी मूलभूत सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हो सके लेकिन वर्तमान में चानकी घाट से गंगापुर तक ही इंटरलॉकिंग का कार्य हो पाया है। जबकि गंगापुर से जंगल गुलहरिया तक करीब 3 किमी सड़क अभी अधूरी है।
कार्य प्रारंभ होने के कुछ महीनों बाद ही ठेकेदार ने काम रोक दिया। वर्तमान स्थिति यह है कि सड़क पर जगह-जगह गिट्टी बिखरी पड़ी है जिससे पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है। वहीं गर्मी के मौसम में उड़ती धूल राहगीरों और वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। दोपहिया वाहन फिसलने का खतरा बना रहता है, जबकि एंबुलेंस और अन्य आवश्यक सेवाओं के वाहन कई बार गांव तक पहुंच ही नहीं पाते।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अधूरी सड़क के कारण सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को हो रही है। बीमार व्यक्ति को समय पर अस्पताल ले जाना मुश्किल हो जाता है। कई बार मरीजों को खाट या बाइक के सहारे कीचड़ भरे रास्ते से ले जाना पड़ता है, जिससे उनकी जान जोखिम में पड़ जाती है।
ग्रामीण दीनानाथ, बैजनाथ, बेचन, नंदलाल, वेदप्रकाश, सत्यप्रकाश और नन्हेलाल सहित अन्य लोगों ने बताया कि उन्होंने कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से सड़क निर्माण पूरा कराने की मांग की, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ भी नहीं मिला। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि इस मामले में संबंधित ठेकेदार और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए सड़क निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा कराया जाए।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा वनग्रामों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर योजनाओं का इस तरह अधूरा रह जाना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब संज्ञान लेता है और कब तक ग्रामीणों को इस अधूरी सड़क से निजात मिल पाती है।
इस संबंध में ग्राम पंचायत टेढ़ी बेलौहा दर्रा और कानपुर दर्रा की ग्राम प्रधान कुसमावती ने भी नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि सड़क को जल्द पूरा कराने के लिए वह कई बार ठेकेदार और संबंधित विभागीय अधिकारियों से पत्राचार और मौखिक रूप से अनुरोध कर चुकी हैं।
बावजूद इसके कार्य अब तक अधूरा है। ग्राम प्रधान ने कहा कि यदि सड़क जल्द नहीं बनी तो ग्रामीणों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ सकता है। इस संबंध में एसडीएम नौतनवा नवीन कुमार ने बताया कि उक्त मामले की जांच करवाकर कार्यवाही की जाएगी।
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