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Mahoba News: भारतीय संस्कृति में विश्वकल्याण की भावना निहित

Fri, 10 Jul 2026 11:23 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 10 Jul 2026 11:23 PM IST
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The spirit of universal welfare is inherent in Indian culture
फोटो 10 एमएएचपी 14 परिचय-संगोष्ठी में बोलते परिषद के जिलाध्यक्ष पं. जगप्रसाद तिवारी। संवाद
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महोबा। अखिल भारतीय साहित्य परिषद ने शुक्रवार को आत्मबोध से विश्वबोध विषय पर संगोष्ठी आयोजित की। परिषद के प्रदेश महामंत्री डॉ. महेश पांडेय बजरंग मुख्य अतिथि थे। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में विश्व कल्याण की भावना निहित है। आत्म अवलोकन और आत्मबोध से विश्वबोध की कल्पना साकार हो सकती है। कृष्णचंद्र पाठक ने मां सरस्वती की वंदना की। गोष्ठी की अध्यक्षता शिवकुमार गोस्वामी ने की। उन्होंने भारतीय संस्कृति को विश्व की सिरमौर संस्कृति बताया। झांसी से आए योगेश त्रिपाठी ने परिषद को राष्ट्रीय स्तर की साहित्यिक संस्था कहा। परिषद के जिलाध्यक्ष जगप्रसाद तिवारी ने आत्मबोध से विश्वबोध का ज्ञानार्जन करने पर जोर दिया। यहां पर प्रमोद सक्सेना, जयनारायण, श्रीराम सोनी, संतोष द्विवेदी, विदेश कुमार, बृजगोपाल शर्मा, संतोष भार्गव, शिवनारायण मौजूद रहे। (संवाद)
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