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Mathura News: बैकुंठ से भी श्रेष्ठ है सत्संग का सुख
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वृंदावन। गोरेलाल कुंज के महंत किशोरदास देव जू महाराज ने कहा कि बैकुंठ से भी अधिक सत्संग का सुख श्रेष्ठ है। संत महापुरुष पारसमणि हैं जो अंतर में व्याप्त दोषों का शमन कर शुष्क और उसर हृदय में भी भगवद तत्व रूपी बीज का रोपण कर देते हैं।
यह बात उन्होंने दावानल कुंड स्थित करह आश्रम में विजय राघव सरकार के सानिध्य में करह बिहारी सरकार के अष्टदिवसीय 22वें सियपिय मिलन महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर व्यक्त किए। संत सद्गुरु दास महाराज व किशोरी शरण भक्तमाली ने कहा कि सत्संग का प्रत्येक क्षण अनंत प्रेम, माधुर्य और जीवन की सार्थकता प्रदान करने वाला है।
जगन्नाथ दास शास्त्री और अनुराग कृष्ण कन्हैया ने कहा कि उन्हीं का जीवन धन्य है, जिनके मानस में श्रीसीताराम विराजमान हैं। आचार्य पुंडरीकाक्ष, दिनेश शास्त्री, रामेश्वर दयाल तिवारी, रामकृपाल दास भक्तमाली, जयप्रकाश शास्त्री, राम अवतार शास्त्री, जगदीश शर्मा, संत सेवानंद ब्रह्मचारी, अनिल शास्त्री, विवेक शास्त्री, अखिलेश शास्त्री आदि मौजूद रहे।
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यह बात उन्होंने दावानल कुंड स्थित करह आश्रम में विजय राघव सरकार के सानिध्य में करह बिहारी सरकार के अष्टदिवसीय 22वें सियपिय मिलन महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर व्यक्त किए। संत सद्गुरु दास महाराज व किशोरी शरण भक्तमाली ने कहा कि सत्संग का प्रत्येक क्षण अनंत प्रेम, माधुर्य और जीवन की सार्थकता प्रदान करने वाला है।
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जगन्नाथ दास शास्त्री और अनुराग कृष्ण कन्हैया ने कहा कि उन्हीं का जीवन धन्य है, जिनके मानस में श्रीसीताराम विराजमान हैं। आचार्य पुंडरीकाक्ष, दिनेश शास्त्री, रामेश्वर दयाल तिवारी, रामकृपाल दास भक्तमाली, जयप्रकाश शास्त्री, राम अवतार शास्त्री, जगदीश शर्मा, संत सेवानंद ब्रह्मचारी, अनिल शास्त्री, विवेक शास्त्री, अखिलेश शास्त्री आदि मौजूद रहे।