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कोर्ट का बड़ा फैसला: यूपी में इस रियल एस्टेट प्रोजेक्ट का बैनामा निरस्त, किसानों को जमीन लाैटाने का आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: Arun Parashar
Updated Thu, 26 Feb 2026 08:03 PM IST
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सार
किसानों का आरोप था कि भूमि अधिग्रहण अधिसूचना का भय दिखाकर जमीन को कम कीमत पर खरीदा गया था। बाद में किसानों ने नियमानुसार जमीन वापस मांगी तो बिल्डर ने इसे अपनी खरीदी संपत्ति बताते हुए कब्जा जमाने का प्रयास किया।
कोर्ट का आदेश
- फोटो : ANI
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विस्तार
मथुरा में आगरा-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे छटीकरा और सुनरख क्षेत्र में करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि के मामले में कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अपर जिला न्यायाधीश, न्यायालय संख्या-6 ने वेदपाल सिंह सेंगर आदि बनाम सनसिटी हाईटेक प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड व कपिल देव उपाध्याय प्रकरण में 11 जनवरह 2007 के पंजीकृत बैनामे को निरस्त कर दिया है। साथ ही 7.4860 हेक्टेयर भूमि किसानों को वापस करने का आदेश दिया है।
मामला दो दशक पुराना बताया जा रहा है। यह भूमि आगरा-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर छटीकरा स्थित गरुड़ गोविंद मंदिर के सामने खसरा नंबर 393 में स्थित है। किसानों ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2006 में जारी भूमि अधिग्रहण अधिसूचना का भय दिखाकर सनसिटी हाईटेक प्रोजेक्ट प्राईवेट लिमिटेड और वृंदावन निवासी कपिल देव उपाध्याय ने कौड़ियों के दामों में जमीनों का बैनामा करा लिया।
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मामला दो दशक पुराना बताया जा रहा है। यह भूमि आगरा-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर छटीकरा स्थित गरुड़ गोविंद मंदिर के सामने खसरा नंबर 393 में स्थित है। किसानों ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2006 में जारी भूमि अधिग्रहण अधिसूचना का भय दिखाकर सनसिटी हाईटेक प्रोजेक्ट प्राईवेट लिमिटेड और वृंदावन निवासी कपिल देव उपाध्याय ने कौड़ियों के दामों में जमीनों का बैनामा करा लिया।
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किसानों का कहना था कि उन्हें फ्लैट निर्माण में साझेदारी और लाभ का आधा हिस्सा देने का आश्वासन दिया गया था। बाद में जब किसानों ने नियमानुसार जमीन वापस मांगी तो बिल्डर ने इसे अपनी खरीदी संपत्ति बताते हुए कब्जा जमाने का प्रयास किया। उल्लेखनीय है कि 29 अगस्त 2006 को प्रदेश सरकार ने मथुरा में हाईटेक टाउनशिप विकसित करने के लिए अधिग्रहण की अधिसूचना जारी की थी। वर्ष 2012 में कानून में संशोधन के बाद प्रावधान किया गया कि पांच वर्ष तक भूमि का उपयोग न होने पर भू-स्वामी उसे वापस मांग सकते हैं।
किसानों का आरोप था कि पांच वर्ष तक कोई विकास कार्य नहीं हुआ और कब्जा भी उनके पास ही रहा, बावजूद इसके जमीन लौटाने से इनकार कर दिया गया। कोर्ट ने मामले में सिविल अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए बैनामा निरस्त कर दिया और भूमि पर किसी भी प्रकार के निर्माण या हस्तांतरण पर रोक लगा दी है।
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