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Mau News: ऑनलाइन गेम खेलने के चक्कर में युवाओं के सीज हो रहे खाते
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ऑनलाइन गेम खेलने के चक्कर में युवाओं के खाते सीज हो रहे हैं। एविएटर सहित कई ऑनलाइन गेम आजकल युवाओं को तेजी से अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं।
इन गेमों में कम रुपये लगाकर हजारों और लाखों रुपये जीतने के लालच ने युवाओं को साइबर अपराध में फंसा दिया है। बीते दो माह में ऐसे साइबर थाने में 155 मामले आए है, इसमें सभी के खाते सीज होने के बाद यह शिकायत लेकर पहुंचे।
इसमें 70 फीसदी पीड़ितों की 20 से 40 वर्ष के भीतर की है।इसमें तो करीब 15 फीसदी निजी स्कूलों के शिक्षक भी शामिल है। साइबर थाने में पहुंचे शहर कोतवाली क्षेत्र के चादमारी इमलिया निवासी 18 वर्ष के युवक ने की गई शिकायत में बताया कि उसे ऑनलाइन गेम खेलने की आदत पड़ी।
शुरू में वह 300 रुपये लगाकर चार से पांच हजार रुपये कमाया लेकिन इस बीच न तो उसका यूपीआई का काम कर रहा था न ही एटीएम। इस मामले में एसपी इलामारन जी ने बताया कि ऑनलाइन गेम के मामले में खाते सीज होने के मामले बीते दो माह से ज्यादा बढ़े हैं।
बीते नवंबर से अब तक 150 से अधिक मामले ऐसे साइबर थाने में आ चुके हैं। ऑनलाइन गेम में कई स्टेज पार करने पर मिलने वाली राशि के लालच में कई युवा दिन-प्रतिदिन इन गेमों के आदी होते जा रहे हैं।
शुरू में छोटी-मोटी रकम जीतने पर उन्हें लगता है कि वे आसानी से बड़ी कमाई कर सकते हैं लेकिन, उनका खाता फ्रीज हो जा रहा है और उन पर अपराध का दाग भी लग जा रहा है।
एसपी ने बताया कि इन प्लेटफार्मों पर दिखाई देने वाली जीत के रुपये वास्तव में सुरक्षित नहीं होते।
कई बार यह रकम साइबर ठगी से जुड़े खातों से ट्रांसफर की जाती है। दो माह में जो मामले आए हैं उनमें 70 फीसदी युवा है जिनकी उम्र 18 से 30 वर्ष के भीतर है।
बताया कि अधिकांश युवाओं को इस बात की बिल्कुल जानकारी नहीं होती कि उनके अकाउंट में आने वाली धनराशि का स्रोत क्या है। जब वे उत्साह में रकम निकालने या पुनः गेम में लगाने लगते हैं, तभी असली मुसीबत खड़ी हो रही है।
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इन गेमों में कम रुपये लगाकर हजारों और लाखों रुपये जीतने के लालच ने युवाओं को साइबर अपराध में फंसा दिया है। बीते दो माह में ऐसे साइबर थाने में 155 मामले आए है, इसमें सभी के खाते सीज होने के बाद यह शिकायत लेकर पहुंचे।
इसमें 70 फीसदी पीड़ितों की 20 से 40 वर्ष के भीतर की है।इसमें तो करीब 15 फीसदी निजी स्कूलों के शिक्षक भी शामिल है। साइबर थाने में पहुंचे शहर कोतवाली क्षेत्र के चादमारी इमलिया निवासी 18 वर्ष के युवक ने की गई शिकायत में बताया कि उसे ऑनलाइन गेम खेलने की आदत पड़ी।
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शुरू में वह 300 रुपये लगाकर चार से पांच हजार रुपये कमाया लेकिन इस बीच न तो उसका यूपीआई का काम कर रहा था न ही एटीएम। इस मामले में एसपी इलामारन जी ने बताया कि ऑनलाइन गेम के मामले में खाते सीज होने के मामले बीते दो माह से ज्यादा बढ़े हैं।
बीते नवंबर से अब तक 150 से अधिक मामले ऐसे साइबर थाने में आ चुके हैं। ऑनलाइन गेम में कई स्टेज पार करने पर मिलने वाली राशि के लालच में कई युवा दिन-प्रतिदिन इन गेमों के आदी होते जा रहे हैं।
शुरू में छोटी-मोटी रकम जीतने पर उन्हें लगता है कि वे आसानी से बड़ी कमाई कर सकते हैं लेकिन, उनका खाता फ्रीज हो जा रहा है और उन पर अपराध का दाग भी लग जा रहा है।
एसपी ने बताया कि इन प्लेटफार्मों पर दिखाई देने वाली जीत के रुपये वास्तव में सुरक्षित नहीं होते।
कई बार यह रकम साइबर ठगी से जुड़े खातों से ट्रांसफर की जाती है। दो माह में जो मामले आए हैं उनमें 70 फीसदी युवा है जिनकी उम्र 18 से 30 वर्ष के भीतर है।
बताया कि अधिकांश युवाओं को इस बात की बिल्कुल जानकारी नहीं होती कि उनके अकाउंट में आने वाली धनराशि का स्रोत क्या है। जब वे उत्साह में रकम निकालने या पुनः गेम में लगाने लगते हैं, तभी असली मुसीबत खड़ी हो रही है।