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Mau News: आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन, सरकारी दर्जा देने की मांग
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मांगों के संबंध में कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपती आंगनबाड़ी कार्यकत्री। स्वयं
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आंगनबाड़ी संयुक्त मोर्चा के तत्वावधान में शुक्रवार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने मजदूर दिवस मनाने के साथ कलेक्ट्रेट परिसर में विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा।
संगठन के जिलाध्यक्ष कंचन राय ने कहा कि यह अत्यंत विडंबना है कि जो आंगनबाड़ी पोषण, स्वास्थ्य और बाल विकास जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करती हैं, वही आज स्वयं आर्थिक तंगी, असुरक्षित भविष्य और सामाजिक उपेक्षा की शिकार हैं। जो दूसरे का भविष्य संवारती हैं, उनका वर्तमान संकट में है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के सब्र का बांध अब टूटने की कगार पर है। सरकार की योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने वाली महिलाएं आज अपने ही अधिकार के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।
लंबे समय से लंबित एवं अत्यंत जायज मांगों को लेकर सरकार को कई बार ज्ञापन, वार्ता और शांतिपूर्ण आंदोलन के माध्यम से अवगत कराया गया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला, समाधान नहीं।
8 मार्च 2026 को महिला दिवस के अवसर पर प्रमुख सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग, निदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग और संगठन के प्रतिनिधियों के बीच वार्ता हुई थी, जिसमें जल्द समाधान का भरोसा दिया गया था। 30 अप्रैल तक कोई ठोस निर्णय न आने से गहरा आक्रोश और निराशा है।
उन्होंने मांग की कि सरकार सभी आंगनबाड़ी कर्मियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दे। मानदेय समाप्त कर वेतनमान लागू किया जाए। पेंशन, पीएफ, ग्रेच्युटी एवं अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाएं तत्काल लागू हों। महंगाई भत्ता एवं नियमित वेतन वृद्धि सुनिश्चित की जाए।
सवेतन अवकाश, चिकित्सा सुविधा एवं मातृत्व लाभ प्रदान किए जाएं। सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। धरना और ज्ञापन देने वालों में हेमा गुप्ता, सिंधु चौरसिया, पानमती देवी, मंजू राय सहित कई अन्य महिलाएं शामिल थीं।
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संगठन के जिलाध्यक्ष कंचन राय ने कहा कि यह अत्यंत विडंबना है कि जो आंगनबाड़ी पोषण, स्वास्थ्य और बाल विकास जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करती हैं, वही आज स्वयं आर्थिक तंगी, असुरक्षित भविष्य और सामाजिक उपेक्षा की शिकार हैं। जो दूसरे का भविष्य संवारती हैं, उनका वर्तमान संकट में है।
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आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के सब्र का बांध अब टूटने की कगार पर है। सरकार की योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने वाली महिलाएं आज अपने ही अधिकार के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।
लंबे समय से लंबित एवं अत्यंत जायज मांगों को लेकर सरकार को कई बार ज्ञापन, वार्ता और शांतिपूर्ण आंदोलन के माध्यम से अवगत कराया गया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला, समाधान नहीं।
8 मार्च 2026 को महिला दिवस के अवसर पर प्रमुख सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग, निदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग और संगठन के प्रतिनिधियों के बीच वार्ता हुई थी, जिसमें जल्द समाधान का भरोसा दिया गया था। 30 अप्रैल तक कोई ठोस निर्णय न आने से गहरा आक्रोश और निराशा है।
उन्होंने मांग की कि सरकार सभी आंगनबाड़ी कर्मियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दे। मानदेय समाप्त कर वेतनमान लागू किया जाए। पेंशन, पीएफ, ग्रेच्युटी एवं अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाएं तत्काल लागू हों। महंगाई भत्ता एवं नियमित वेतन वृद्धि सुनिश्चित की जाए।
सवेतन अवकाश, चिकित्सा सुविधा एवं मातृत्व लाभ प्रदान किए जाएं। सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। धरना और ज्ञापन देने वालों में हेमा गुप्ता, सिंधु चौरसिया, पानमती देवी, मंजू राय सहित कई अन्य महिलाएं शामिल थीं।
