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Mau News: एंबुलेंस के रिस्पांस टाइम बाधा बन रहे खराब रास्ते, मौतों के बाद भी नहीं हुई मरम्मत
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जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में आधे अधूरे और जर्जर मार्ग आवागमन में परेशानी के साथ लोगों के असमय मौत का कारण बन रहे हैं। कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां समय से उपचार नहीं मिलने पर लोगों की मौत हो गई है।
लापरवाही का आलम यह है कि जहां भी एंबुलेंस नहीं पहुंचने से लोगों को समय से उपचार नहीं मिला वो रास्ते अब भी जस के तस जर्जर अवस्था में हैं। ग्राम पंचायत, लोक निर्माण विभाग और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग सहित अन्य संबंधी विभाग चुप्पी साधे हुए हैं।
एंबुलेंस कर्मियों को मरीज के घर तक एंबुलेंस नहीं जाने की स्थिति में स्ट्रेचर दिया जाता है। अक्सर एंबुलेंस कर्मी मरीज के घर तक रास्ता नहीं होने की स्थिति या मार्ग संकरा होने पर स्ट्रेचर पर भी मरीज को लेकर आते हैं।
कोपागंज ब्लॉक के एकौना गांव से मीरपुर चट्टी तक जाने वाला करीब 1600 मीटर मार्ग का पिच निर्माण करना था। बीते साल लोक निर्माण विभाग द्वारा महज एक किलोमीटर ही मार्ग का निर्माण कराया गया। अभी भी करीब 600 मीटर मार्ग जर्जर पड़ा हुआ है।
स्मारक का आलम यह है कि इस पर दो पहिया वाहन से चलना भी जान जोखिम में डालने के बराबर है। मीरपुर सहित अन्य गांवों तक एंबुलेंस जाने के लिए कोईरियापार होकर 14 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी कर जाती है।
धवरियासाथ से लेकर बरलाई तक साढ़े सात किलोमीटर लंबे मार्ग का एफडीआर तकनीक से निर्माण होना था। बसारतपुर बाजार से धवरियासाथ तक करीब 240 मीटर मार्ग अभी भी गड्ढे में तब्दील है।
मार्ग से रोजाना पूराघाट, भातकोल से लेकर कोपागंज और जिला मुख्यालय तक सवारी वाहनों सहित सैकड़ो निजी वाहन से लोग गुजरते हैं। अधूरा 240 मीटर मार्ग कब बनेगा, इस पर कोई बोलने को तैयार नहीं है।
परदहां ब्लॉक के सरवां ग्राम पंचायत में मुख्य मार्ग से बस्ती में जाने वाला आरसीसी मार्ग पांच साल से टूटकर धंस गया है। बारिश के दिनों में दोनों तरफ की मिट्टी कट गई थी, जिससे केवल तीन फिट चौड़ा रास्ता ही आवागमन के लिए बच गया था। बाद में ग्रामीणों ने मिट्टी पाटकर उसे दुरुस्त किया है। उनका कहना है कि यहां से एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती है।
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केस एक
सितंबर 2024 माह में रानीपुर ब्लाक क्षेत्र के हकारीपुर गांव में 200 मीटर रास्ता खराब होने के कारण एंबुलेंस समय से नहीं पहुंची। उपचार में देरी होने से पूनम देवी (76) की मौत हो गई थी। उद्यमी भाई प्रमोद चौबे ने जेसीबी लगाकर रास्ता बनाने के बाद महिला को अस्पताल ले जाया गया था। घटना के बाद ग्राम पंचायत कच्चे रास्ते पर खड़ंजा लगवाकर दुरुस्त करा दिया है।
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केस दो
परदहा ब्लॉक के ओनहाइच गांव में 12 अप्रैल 2025 को रास्ता ना होने से घर तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पाई थी। गांव से बाहर मरीज को चारपाई तक लाया गया। समय से उपचार नहीं मिलने के कारण गांव निवासी गुलाब श्रीवास्तव (62) की मौत हो गई थी, वो रास्ता आज भी उतना ही संकरा है, जिससे चार पहिया वाहनों को आने जाने में परेशानी होती है।
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केस तीन
26 सितंबर 2023 को मधुबन तहसील के चक्की मुसाडोही गांव में मरीज के घर से पहले कच्चे रास्ते पर गड्ढे में एंबुलेंस का पहिया फंस गया था। एंबुलेंस को निकालने में देरी होने से राजेंद्र चौहान (50) की मौत हो गई थी। बाद में रास्ते पर बने गड्ढे को भरा गया, जो बाढ़ आने पर दोबारा धंस गया।
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केस चार
बड़राव ब्लॉक के माधोपुर ग्राम पंचायत की दलित बस्ती जाने वाले कच्चे रास्ते पर कीचड़ होने से 3 नवंबर 2025 को बीमार रामवृक्ष (70) को अस्पताल ले जा रही कार फंस गई थी। परिजन उन्हें चारपाई पर लादकर अस्पताल लेकर पहुंचे थे, जिससे उनकी जान बचाई जा सकी थी। वो रास्ता आज भी उसी तरह है।
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कोट
एंबुलेंस कर्मियों को मरीज को अस्पताल ले जाने का निर्धारित रिस्पांस टाइम बना हुआ है। अभी जिले में रिस्पांस टाइम औसतन 7 मिनट 20 सेकंड का है। एंबुलेंस कर्मी को 15 मिनट के अंदर रिस्पांस देना होता है। कुछ मामले ऐसे आए हैं जहां रास्ता सकरा, जर्जर होने सहित अन्य परेशानियां के कारण मरीज को अस्पताल लाने में देरी हुई है। हालांकि अक्सर एंबुलेंस करने ऐसी स्थिति में स्ट्रेचर से भी मरीज को एंबुलेंस तक लेकर आते हैं यह उनकी ड्यूटी का हिस्सा है। - डॉ. संजय गुप्ता, मुख्य चिकित्साधिकारी
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लापरवाही का आलम यह है कि जहां भी एंबुलेंस नहीं पहुंचने से लोगों को समय से उपचार नहीं मिला वो रास्ते अब भी जस के तस जर्जर अवस्था में हैं। ग्राम पंचायत, लोक निर्माण विभाग और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग सहित अन्य संबंधी विभाग चुप्पी साधे हुए हैं।
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एंबुलेंस कर्मियों को मरीज के घर तक एंबुलेंस नहीं जाने की स्थिति में स्ट्रेचर दिया जाता है। अक्सर एंबुलेंस कर्मी मरीज के घर तक रास्ता नहीं होने की स्थिति या मार्ग संकरा होने पर स्ट्रेचर पर भी मरीज को लेकर आते हैं।
कोपागंज ब्लॉक के एकौना गांव से मीरपुर चट्टी तक जाने वाला करीब 1600 मीटर मार्ग का पिच निर्माण करना था। बीते साल लोक निर्माण विभाग द्वारा महज एक किलोमीटर ही मार्ग का निर्माण कराया गया। अभी भी करीब 600 मीटर मार्ग जर्जर पड़ा हुआ है।
स्मारक का आलम यह है कि इस पर दो पहिया वाहन से चलना भी जान जोखिम में डालने के बराबर है। मीरपुर सहित अन्य गांवों तक एंबुलेंस जाने के लिए कोईरियापार होकर 14 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी कर जाती है।
धवरियासाथ से लेकर बरलाई तक साढ़े सात किलोमीटर लंबे मार्ग का एफडीआर तकनीक से निर्माण होना था। बसारतपुर बाजार से धवरियासाथ तक करीब 240 मीटर मार्ग अभी भी गड्ढे में तब्दील है।
मार्ग से रोजाना पूराघाट, भातकोल से लेकर कोपागंज और जिला मुख्यालय तक सवारी वाहनों सहित सैकड़ो निजी वाहन से लोग गुजरते हैं। अधूरा 240 मीटर मार्ग कब बनेगा, इस पर कोई बोलने को तैयार नहीं है।
परदहां ब्लॉक के सरवां ग्राम पंचायत में मुख्य मार्ग से बस्ती में जाने वाला आरसीसी मार्ग पांच साल से टूटकर धंस गया है। बारिश के दिनों में दोनों तरफ की मिट्टी कट गई थी, जिससे केवल तीन फिट चौड़ा रास्ता ही आवागमन के लिए बच गया था। बाद में ग्रामीणों ने मिट्टी पाटकर उसे दुरुस्त किया है। उनका कहना है कि यहां से एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती है।
केस एक
सितंबर 2024 माह में रानीपुर ब्लाक क्षेत्र के हकारीपुर गांव में 200 मीटर रास्ता खराब होने के कारण एंबुलेंस समय से नहीं पहुंची। उपचार में देरी होने से पूनम देवी (76) की मौत हो गई थी। उद्यमी भाई प्रमोद चौबे ने जेसीबी लगाकर रास्ता बनाने के बाद महिला को अस्पताल ले जाया गया था। घटना के बाद ग्राम पंचायत कच्चे रास्ते पर खड़ंजा लगवाकर दुरुस्त करा दिया है।
केस दो
परदहा ब्लॉक के ओनहाइच गांव में 12 अप्रैल 2025 को रास्ता ना होने से घर तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पाई थी। गांव से बाहर मरीज को चारपाई तक लाया गया। समय से उपचार नहीं मिलने के कारण गांव निवासी गुलाब श्रीवास्तव (62) की मौत हो गई थी, वो रास्ता आज भी उतना ही संकरा है, जिससे चार पहिया वाहनों को आने जाने में परेशानी होती है।
केस तीन
26 सितंबर 2023 को मधुबन तहसील के चक्की मुसाडोही गांव में मरीज के घर से पहले कच्चे रास्ते पर गड्ढे में एंबुलेंस का पहिया फंस गया था। एंबुलेंस को निकालने में देरी होने से राजेंद्र चौहान (50) की मौत हो गई थी। बाद में रास्ते पर बने गड्ढे को भरा गया, जो बाढ़ आने पर दोबारा धंस गया।
केस चार
बड़राव ब्लॉक के माधोपुर ग्राम पंचायत की दलित बस्ती जाने वाले कच्चे रास्ते पर कीचड़ होने से 3 नवंबर 2025 को बीमार रामवृक्ष (70) को अस्पताल ले जा रही कार फंस गई थी। परिजन उन्हें चारपाई पर लादकर अस्पताल लेकर पहुंचे थे, जिससे उनकी जान बचाई जा सकी थी। वो रास्ता आज भी उसी तरह है।
कोट
एंबुलेंस कर्मियों को मरीज को अस्पताल ले जाने का निर्धारित रिस्पांस टाइम बना हुआ है। अभी जिले में रिस्पांस टाइम औसतन 7 मिनट 20 सेकंड का है। एंबुलेंस कर्मी को 15 मिनट के अंदर रिस्पांस देना होता है। कुछ मामले ऐसे आए हैं जहां रास्ता सकरा, जर्जर होने सहित अन्य परेशानियां के कारण मरीज को अस्पताल लाने में देरी हुई है। हालांकि अक्सर एंबुलेंस करने ऐसी स्थिति में स्ट्रेचर से भी मरीज को एंबुलेंस तक लेकर आते हैं यह उनकी ड्यूटी का हिस्सा है। - डॉ. संजय गुप्ता, मुख्य चिकित्साधिकारी
