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Mau News: मौसम में बदलाव, निमोनिया और डायरिया की चपेट में आ रहे बच्चे
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जिला अस्पताल के ओपीडी में दवा काउंटर पर लगी लोगों की कतार।संवाद
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मौसम परिवर्तन के दौरान बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो रही है। इस समय तेज धूप हो रही है, जिसके चलते लोगों का खान-पान प्रभावित हो रहा है। इससे वे जल्दी निमोनिया और डायरिया की चपेट में आ रहे हैं।
खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ, दूषित पानी, हाथों की सही तरीके से सफाई न होना और गर्मी से बचाव में लापरवाही बीमारियों के प्रमुख कारण बन रहे हैं।
जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 15 से 20 बच्चों में बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, उल्टी-दस्त और कमजोरी जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं।
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक कुमार सिंह के अनुसार, बच्चों को आवश्यक जांच के बाद दवाएं देकर घर भेजा जा रहा है। राहत की बात यह है कि अभी किसी भी बच्चे को भर्ती करने की आवश्यकता नहीं पड़ी है।
उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चों को उबला हुआ या शुद्ध पानी ही पिलाएं, बाहर का तला-भुना और खुले में रखा भोजन न दें।
इसके साथ ही बच्चों को मौसम के अनुसार कपड़े पहनाएं और हाथ धोने की आदत डालें। उन्होंने सांस संबंधी परेशानी, तेज बुखार या लगातार दस्त की स्थिति में तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर दिखाने की सलाह दी। बताया कि गर्मी के चलते बच्चों में यह परेशानी बढ़ी है।
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. शैलेष ने बताया कि खुले में बिकने वाला भोजन, दूषित पानी और हाथों की खराब स्वच्छता संक्रमण (जैसे हैजा, टाइफाइड, डायरिया) के मुख्य कारण हैं।
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खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ, दूषित पानी, हाथों की सही तरीके से सफाई न होना और गर्मी से बचाव में लापरवाही बीमारियों के प्रमुख कारण बन रहे हैं।
जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 15 से 20 बच्चों में बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, उल्टी-दस्त और कमजोरी जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं।
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक कुमार सिंह के अनुसार, बच्चों को आवश्यक जांच के बाद दवाएं देकर घर भेजा जा रहा है। राहत की बात यह है कि अभी किसी भी बच्चे को भर्ती करने की आवश्यकता नहीं पड़ी है।
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उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चों को उबला हुआ या शुद्ध पानी ही पिलाएं, बाहर का तला-भुना और खुले में रखा भोजन न दें।
इसके साथ ही बच्चों को मौसम के अनुसार कपड़े पहनाएं और हाथ धोने की आदत डालें। उन्होंने सांस संबंधी परेशानी, तेज बुखार या लगातार दस्त की स्थिति में तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर दिखाने की सलाह दी। बताया कि गर्मी के चलते बच्चों में यह परेशानी बढ़ी है।
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. शैलेष ने बताया कि खुले में बिकने वाला भोजन, दूषित पानी और हाथों की खराब स्वच्छता संक्रमण (जैसे हैजा, टाइफाइड, डायरिया) के मुख्य कारण हैं।

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