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Mau News: रात में ठंड दिन में गर्मी से बढ़े खांसी बुखार के मरीज, एंटीबायोटिक दवाइयों की खपत बढ़ी
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जिला अस्पताल में शनिवार को रजिस्ट्रेशन काउंटर पर लगी मरीजों और उनके परिजनों की लंबी कतार।संवाद
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जिले में बदले मौसम के मिजाज से इन दिनों दिन और रात के तापमान में काफी अंतर हो गया है। रात और दिन के तापमान में लगभग 10 डिग्री या उससे अधिक का अंतर है। इससे सूखी खांसी, बुखार, सर्दी के केस बढ़ रहे हैं।
चिकित्सकों की मानें तो एक सप्ताह पूर्व की तुलना में इन दिनों इन बीमारियों के 20 से 25 फीसदी तक मरीज बढ़े हैं। इसके चलते एंटीबायोटिक दवाइयों की खपत भी बढ़ गई है।
शनिवार को जिला अस्पताल में ओपीडी 775 से अधिक रही। इसमें बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में मरीजों की संख्या 155 से अधिक रही। जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि तापमान में उतार चढ़ाव के चलते वायरल संंबंधी मरीजों में पिछले कुछ दिनों से वृद्धि हुई है।
हाल में लोगों को सबसे अधिक परेशानी का कारण सूखी खांसी है। लंबी चलने वाली इस खांसी पर दवाइयों का भी जल्द प्रभाव नहीं होता है। इसके अलावा बुखार, जुकाम, सर्दी, चक्कर, घबराहट जैसे केस बढ़े हैं।
पिछले एक सप्ताह की तुलना में इन दिनों जो मरीज आ रहे हैं, 20 से 25 फीसदी मरीज इन बीमारियों के ही हैं। बताया कि अनेक लोग ऐसे हैं, जो खांसी या बुखार होने पर चिकित्सक से परामर्श लिए बिना ही दवाई ले लेते हैं।
इस तरह का कदम कभी-कभी गलत साबित भी हो सकता है। इन दिनों बीमारी का शिकार हो रहे लोगों को बिना काम के घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। समय- समय पर गुनगुने पाने से कुल्ला करने और पौष्टिक भोजन लेने की भी उन्होंने सलाह दी है।
15 फीसदी तक बढ़ी एंटीबायोटिक दवाइयों की खपत
कैमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष शिवजी राय ने बताया कि शहर में दोहरे मौसम के प्रभाव से लोग बीमार हो रहे हैं। ऐसे में सामान्य एंटीबायोटिक दवाई और कफ सीरप की खपत लगभग 15 फीसदी तक बढ़ी है। उन्होंने कहा कि इन दिनों कफ सीरप में लोगों का रुझान आयुर्वेदिक दवाइयों की ओर बढ़ा है। उन्होंने कहा कि सूखी खांसी में उपयोग के लिए आयुर्वेदिक में कई तरह की सीरप उपलब्ध हैं।
जिला अस्पताल में वायरल की चपेट में आने वाले मरीजों की आवश्यक होने पर जांच भी कराई जा रही है। ऐसे मरीजों के उपचार के लिए सभी प्रकार के संसाधन और दवा उपलब्ध है। -डॉ. धनंजय कुमार, सीएमएस जिला अस्पताल
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चिकित्सकों की मानें तो एक सप्ताह पूर्व की तुलना में इन दिनों इन बीमारियों के 20 से 25 फीसदी तक मरीज बढ़े हैं। इसके चलते एंटीबायोटिक दवाइयों की खपत भी बढ़ गई है।
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शनिवार को जिला अस्पताल में ओपीडी 775 से अधिक रही। इसमें बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में मरीजों की संख्या 155 से अधिक रही। जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि तापमान में उतार चढ़ाव के चलते वायरल संंबंधी मरीजों में पिछले कुछ दिनों से वृद्धि हुई है।
हाल में लोगों को सबसे अधिक परेशानी का कारण सूखी खांसी है। लंबी चलने वाली इस खांसी पर दवाइयों का भी जल्द प्रभाव नहीं होता है। इसके अलावा बुखार, जुकाम, सर्दी, चक्कर, घबराहट जैसे केस बढ़े हैं।
पिछले एक सप्ताह की तुलना में इन दिनों जो मरीज आ रहे हैं, 20 से 25 फीसदी मरीज इन बीमारियों के ही हैं। बताया कि अनेक लोग ऐसे हैं, जो खांसी या बुखार होने पर चिकित्सक से परामर्श लिए बिना ही दवाई ले लेते हैं।
इस तरह का कदम कभी-कभी गलत साबित भी हो सकता है। इन दिनों बीमारी का शिकार हो रहे लोगों को बिना काम के घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। समय- समय पर गुनगुने पाने से कुल्ला करने और पौष्टिक भोजन लेने की भी उन्होंने सलाह दी है।
15 फीसदी तक बढ़ी एंटीबायोटिक दवाइयों की खपत
कैमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष शिवजी राय ने बताया कि शहर में दोहरे मौसम के प्रभाव से लोग बीमार हो रहे हैं। ऐसे में सामान्य एंटीबायोटिक दवाई और कफ सीरप की खपत लगभग 15 फीसदी तक बढ़ी है। उन्होंने कहा कि इन दिनों कफ सीरप में लोगों का रुझान आयुर्वेदिक दवाइयों की ओर बढ़ा है। उन्होंने कहा कि सूखी खांसी में उपयोग के लिए आयुर्वेदिक में कई तरह की सीरप उपलब्ध हैं।
जिला अस्पताल में वायरल की चपेट में आने वाले मरीजों की आवश्यक होने पर जांच भी कराई जा रही है। ऐसे मरीजों के उपचार के लिए सभी प्रकार के संसाधन और दवा उपलब्ध है। -डॉ. धनंजय कुमार, सीएमएस जिला अस्पताल
