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Mau News: चार महीने से बंद है 21 निजी सेंटरों पर निशुल्क अल्ट्रासाउंड की सुविधा
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जिले के नौ सीएचसी पर उपचार कराने वाली गर्भवती महिलाओं को चार माह से निःशुल्क जांच की सुविधा बंद है। इसका कारण स्वास्थ्य विभाग से अनुबंध किए गए 21 निजी सेंटरों का भुगतान बंद होना है।
अब इन अस्पतालों पर आने वाली मरीजों को महिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है। दूरी के चलते अधिकांश महिलाएं उन्हीं केंद्रों पर अपने पास से राशि खर्च कर जांच कराने को मजबूर हो रही हैं, जहां पहले उन्हें निशुल्क जांच की सुविधा मिल रही थी।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा गर्भवती महिलाओं की जांच में कोई बाधा न हो उसके लिए दो वर्ष पूर्व ई-रूपी वाउचर व्यवस्था शुरू की थी। मकसद था कि जिन स्वास्थ्य केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड जांच की व्यवस्था नहीं है, वहां गर्भवती की स्थानीय स्तर पर नि:शुल्क निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर पर जांच की जा सके।
पिछले वर्ष से प्रत्येक अल्ट्रासाउंड जांच पर सेंटर को 425 रुपये मिल रहे थे। इसके लिए जिले में 21 निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों से अनुबंध किया गया था, जिन पर गर्भवती महिलाएं निशुल्क अल्ट्रासाउंड करा रही थीं।
सितंबर से नि:शुल्क अल्ट्रासाउंड जांच की प्रक्रिया पूरी तरह ठप है। विभागीय सूत्रों के अनुसार पहले शासन स्तर से पीएफएमएस के माध्यम से सीएमओ कार्यालय में भुगतान होता था, लेकिन चार महीने से पीएफएमएस के माध्यम से भुगतान की व्यवस्था बंद है।
शासन स्तर से एसएनए स्पर्श पोर्टल लॉन्च किया जा रहा है, जिसमें बजट का कोई प्रावधान नहीं किया गया है और न ही यह बताया गया है कि गर्भवती महिलाओं के निजी सेंटरों पर नि:शुल्क अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था कब और कैसे शुरू की जाएगी।
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अब इन अस्पतालों पर आने वाली मरीजों को महिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है। दूरी के चलते अधिकांश महिलाएं उन्हीं केंद्रों पर अपने पास से राशि खर्च कर जांच कराने को मजबूर हो रही हैं, जहां पहले उन्हें निशुल्क जांच की सुविधा मिल रही थी।
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स्वास्थ्य विभाग द्वारा गर्भवती महिलाओं की जांच में कोई बाधा न हो उसके लिए दो वर्ष पूर्व ई-रूपी वाउचर व्यवस्था शुरू की थी। मकसद था कि जिन स्वास्थ्य केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड जांच की व्यवस्था नहीं है, वहां गर्भवती की स्थानीय स्तर पर नि:शुल्क निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर पर जांच की जा सके।
पिछले वर्ष से प्रत्येक अल्ट्रासाउंड जांच पर सेंटर को 425 रुपये मिल रहे थे। इसके लिए जिले में 21 निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों से अनुबंध किया गया था, जिन पर गर्भवती महिलाएं निशुल्क अल्ट्रासाउंड करा रही थीं।
सितंबर से नि:शुल्क अल्ट्रासाउंड जांच की प्रक्रिया पूरी तरह ठप है। विभागीय सूत्रों के अनुसार पहले शासन स्तर से पीएफएमएस के माध्यम से सीएमओ कार्यालय में भुगतान होता था, लेकिन चार महीने से पीएफएमएस के माध्यम से भुगतान की व्यवस्था बंद है।
शासन स्तर से एसएनए स्पर्श पोर्टल लॉन्च किया जा रहा है, जिसमें बजट का कोई प्रावधान नहीं किया गया है और न ही यह बताया गया है कि गर्भवती महिलाओं के निजी सेंटरों पर नि:शुल्क अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था कब और कैसे शुरू की जाएगी।