{"_id":"6a4569880f8483005b0ad968","slug":"notice-served-four-days-ago-hospital-sealed-after-no-response-two-women-found-admitted-on-site-mau-news-c-295-1-mau1001-147907-2026-07-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mau News: चार दिन पहले दिया था नोटिस, जवाब न देने पर अस्पताल सील, मौके पर दो महिलाएं भर्ती मिलीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mau News: चार दिन पहले दिया था नोटिस, जवाब न देने पर अस्पताल सील, मौके पर दो महिलाएं भर्ती मिलीं
विज्ञापन
कोपागंज स्थित कृष्णा हॉस्पिटल सील करते स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी। संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्वास्थ्य विभाग के नोडल और एसीएमओ डॉ. आरएन सिंह के नेतृत्व में बुधवार को सात सदस्यीय टीम ने कोपागंज कस्बे में संचालित कृष्णा अस्पताल को सील कर दिया।
यह कार्रवाई बीते 23 जून को स्टिंग में इस अस्पताल में गर्भपात के खुलासे के बाद जारी नोटिस का जवाब न देने पर की गई। कार्रवाई के दौरान अस्पताल में दो गर्भवती महिलाएं भर्ती मिलीं, जिनका सीजेरियन डिलीवरी किया गया था।
टीम ने दोनों महिलाओं को महिला जिला अस्पताल में भर्ती कराया। वहीं अस्पताल की दवा दुकान को भी सील कर दिया गया। टीम ने सभी स्टाफ और अन्य लोगों को बाहर कर दिया। कार्रवाई के दौरान अस्पताल संचालक मौके से फरार हो गए।
बताया जाता है कि दोस्तपुरा में संचालित कृष्णा हॉस्पिटल के खिलाफ शिकायत मिलने पर स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन लंबे समय बाद भी कोई जवाब नहीं दिया गया।
विज्ञापन
इसी के बाद डिप्टी सीएमओ डॉ. आरएन सिंह, सीएचसी अधीक्षक डॉ. इरशाद अहमद, फार्मासिस्ट सुनील कुमार सहित अन्य अधिकारियों की टीम बुधवार को अचानक अस्पताल पहुंची।
जांच के दौरान वार्ड में दो महिला मरीज भर्ती मिलीं। जानकारी लेने पर पता चला कि दोनों का सीजेरियन प्रसव कराया गया था। मौके पर मौजूद स्वास्थ्यकर्मी यह नहीं बता सके कि प्रसव किस डॉक्टर द्वारा कराया गया था। इसके बाद दोनों मरीजों को एंबुलेंस से महिला जिला अस्पताल भेजा गया।
एसीएमओ डॉ. आरएन सिंह ने बताया कि स्टिंग में गर्भपात का मामला सामने आने के बाद बीते शनिवार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था, लेकिन तीन दिन बीतने के बाद भी जवाब नहीं मिला, जिसके बाद कार्रवाई की गई। अस्पताल किस डॉक्टर के नाम पर पंजीकृत है, इसकी जांच की जा रही है।
दस से अधिक अस्पताल व क्लीनिक चिह्नित
एसीएमओ डॉ. आरएन सिंह ने बताया कि स्टिंग के दौरान गर्भपात कराने वाले चार अस्पताल और क्लीनिक तथा तीन बिना पंजीयन के संचालित संस्थानों को पहले ही सील किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि अब जिले में ऐसे दस से अधिक अस्पताल और क्लीनिक चिह्नित किए गए हैं, जिन पर जल्द कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई के डर से कई बिना पंजीयन के संचालित अस्पताल संचालकों ने अपने होर्डिंग-बैनर हटाकर संस्थान बंद कर दिए हैं।
विज्ञापन
यह कार्रवाई बीते 23 जून को स्टिंग में इस अस्पताल में गर्भपात के खुलासे के बाद जारी नोटिस का जवाब न देने पर की गई। कार्रवाई के दौरान अस्पताल में दो गर्भवती महिलाएं भर्ती मिलीं, जिनका सीजेरियन डिलीवरी किया गया था।
टीम ने दोनों महिलाओं को महिला जिला अस्पताल में भर्ती कराया। वहीं अस्पताल की दवा दुकान को भी सील कर दिया गया। टीम ने सभी स्टाफ और अन्य लोगों को बाहर कर दिया। कार्रवाई के दौरान अस्पताल संचालक मौके से फरार हो गए।
विज्ञापन
बताया जाता है कि दोस्तपुरा में संचालित कृष्णा हॉस्पिटल के खिलाफ शिकायत मिलने पर स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन लंबे समय बाद भी कोई जवाब नहीं दिया गया।
विज्ञापन
इसी के बाद डिप्टी सीएमओ डॉ. आरएन सिंह, सीएचसी अधीक्षक डॉ. इरशाद अहमद, फार्मासिस्ट सुनील कुमार सहित अन्य अधिकारियों की टीम बुधवार को अचानक अस्पताल पहुंची।
जांच के दौरान वार्ड में दो महिला मरीज भर्ती मिलीं। जानकारी लेने पर पता चला कि दोनों का सीजेरियन प्रसव कराया गया था। मौके पर मौजूद स्वास्थ्यकर्मी यह नहीं बता सके कि प्रसव किस डॉक्टर द्वारा कराया गया था। इसके बाद दोनों मरीजों को एंबुलेंस से महिला जिला अस्पताल भेजा गया।
एसीएमओ डॉ. आरएन सिंह ने बताया कि स्टिंग में गर्भपात का मामला सामने आने के बाद बीते शनिवार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था, लेकिन तीन दिन बीतने के बाद भी जवाब नहीं मिला, जिसके बाद कार्रवाई की गई। अस्पताल किस डॉक्टर के नाम पर पंजीकृत है, इसकी जांच की जा रही है।
दस से अधिक अस्पताल व क्लीनिक चिह्नित
एसीएमओ डॉ. आरएन सिंह ने बताया कि स्टिंग के दौरान गर्भपात कराने वाले चार अस्पताल और क्लीनिक तथा तीन बिना पंजीयन के संचालित संस्थानों को पहले ही सील किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि अब जिले में ऐसे दस से अधिक अस्पताल और क्लीनिक चिह्नित किए गए हैं, जिन पर जल्द कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई के डर से कई बिना पंजीयन के संचालित अस्पताल संचालकों ने अपने होर्डिंग-बैनर हटाकर संस्थान बंद कर दिए हैं।