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Mau News: वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन 37.45 करोड़ से अधिक का भुगतान
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कलेक्ट्रेट स्थित सहायक चकबंदी अधिकारी कार्यालय पर मार्च के अंतिम दिन कार्य करते कर्मचारी।संवा
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नए वित्तीय सत्र की शुरुआत बुधवार से होगी। ऐसे में सभी सरकारी विभागों में मिले पिछले बजट को खपाने की जद्दोजहद चलती रही। मंगलवार को अवकाश होने के बाद भी सरकारी विभागों में कामकाज हुआ।
वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन 37.45 करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया। कई सरकारी विभाग बजट नहीं खपा पाए थे, जिससे अधिकारी बजट को खपाने की जुगत में लगे रहे। सरकारी विभागों में बजट को कागजी कोरम में फिट करने के लिए भी पिछले एक माह से तैयारियां चल रही थीं।
जिले के 42 विभागों का प्रतिमाह लगभग तीन अरब का बजट होता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 का मंगलवार को अंतिम दिन रहा। सरकारी विभाग अपने विभागीय बजट का लेखा-जोखा वित्तीय वर्ष की शुरुआत में नहीं रखते हैं, जिस कारण क्लोजिंग के दौरान हाय-तौबा मचती है। हर साल सरकारी विभागों के लिए 31 मार्च भागदौड़ भरा होता है।
तमाम अधूरी परियोजनाओं के लिए लगातार बजट जारी किया जाता रहा है और बजट को 31 मार्च तक खपाने के लिए निर्देश दिए गए थे। ऐसे में अब विभागीय अफसरों के सामने पुराने के साथ नए बजट का लेखा-जोखा तैयार करने की चुनौती रही। हालांकि माना जा रहा है कि पिछले वर्षों की तरह ही इस बार भी ज्यादातर बजट उपयोग कर लिया जाएगा।
अवकाश के बाद भी कोषागार, पूर्ति विभाग, मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय, स्वास्थ्य विभाग सहित जिले के तमाम सरकारी विभागों में कामकाज होता रहा। मंगलवार की शाम तक 37.45 करोड़ से अधिक धनराशि का संबंधित विभागों द्वारा भुगतान किया गया।
वरिष्ठ कोषाधिकारी के अनुसार विभिन्न विभागों से 354 बिलों का परीक्षण कर ई-पेमेंट पोर्टल के माध्यम से सीधे संबंधित फर्मों, संस्थाओं और लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित कर दिया गया है।
जनपद के नगरीय विकास और बुनियादी सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए नगरपालिका और नगर पंचायतों द्वारा संयुक्त रूप से 16 करोड़ 22 लाख 34 हजार का भुगतान कर जीरो पेंडेंसी की प्राप्ति करते हुए जिले में प्रथम स्थान हासिल किया गया है।
इस धनराशि का उपयोग मुख्य रूप से शहरी विकास परियोजनाओं, स्वच्छता और सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार के लिए किया गया है।
इस बाबत वरिष्ठ कोषाधिकारी संजय कुमार ने कहा कि पोर्टल पर दबाव के बावजूद कोषागारकर्मियों की मुस्तैदी से प्राप्त सभी वैध बिलों का निस्तारण कर दिया गया है। कोषागार में अभी कार्य चल रहा है, ताकि किसी भी विभाग का स्वीकृत बजट लैप्स न हो।
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वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन 37.45 करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया। कई सरकारी विभाग बजट नहीं खपा पाए थे, जिससे अधिकारी बजट को खपाने की जुगत में लगे रहे। सरकारी विभागों में बजट को कागजी कोरम में फिट करने के लिए भी पिछले एक माह से तैयारियां चल रही थीं।
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जिले के 42 विभागों का प्रतिमाह लगभग तीन अरब का बजट होता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 का मंगलवार को अंतिम दिन रहा। सरकारी विभाग अपने विभागीय बजट का लेखा-जोखा वित्तीय वर्ष की शुरुआत में नहीं रखते हैं, जिस कारण क्लोजिंग के दौरान हाय-तौबा मचती है। हर साल सरकारी विभागों के लिए 31 मार्च भागदौड़ भरा होता है।
तमाम अधूरी परियोजनाओं के लिए लगातार बजट जारी किया जाता रहा है और बजट को 31 मार्च तक खपाने के लिए निर्देश दिए गए थे। ऐसे में अब विभागीय अफसरों के सामने पुराने के साथ नए बजट का लेखा-जोखा तैयार करने की चुनौती रही। हालांकि माना जा रहा है कि पिछले वर्षों की तरह ही इस बार भी ज्यादातर बजट उपयोग कर लिया जाएगा।
अवकाश के बाद भी कोषागार, पूर्ति विभाग, मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय, स्वास्थ्य विभाग सहित जिले के तमाम सरकारी विभागों में कामकाज होता रहा। मंगलवार की शाम तक 37.45 करोड़ से अधिक धनराशि का संबंधित विभागों द्वारा भुगतान किया गया।
वरिष्ठ कोषाधिकारी के अनुसार विभिन्न विभागों से 354 बिलों का परीक्षण कर ई-पेमेंट पोर्टल के माध्यम से सीधे संबंधित फर्मों, संस्थाओं और लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित कर दिया गया है।
जनपद के नगरीय विकास और बुनियादी सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए नगरपालिका और नगर पंचायतों द्वारा संयुक्त रूप से 16 करोड़ 22 लाख 34 हजार का भुगतान कर जीरो पेंडेंसी की प्राप्ति करते हुए जिले में प्रथम स्थान हासिल किया गया है।
इस धनराशि का उपयोग मुख्य रूप से शहरी विकास परियोजनाओं, स्वच्छता और सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार के लिए किया गया है।
इस बाबत वरिष्ठ कोषाधिकारी संजय कुमार ने कहा कि पोर्टल पर दबाव के बावजूद कोषागारकर्मियों की मुस्तैदी से प्राप्त सभी वैध बिलों का निस्तारण कर दिया गया है। कोषागार में अभी कार्य चल रहा है, ताकि किसी भी विभाग का स्वीकृत बजट लैप्स न हो।