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Mau News: निजी बसें कर रहीं कमाई, घाटा दिखाकर 5 रूटों पर बंद कर दी गईं रोडवेज बसें
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घाटा दिखाकर जिले की पांच ग्रामीण रूटों पर मऊ डिपो की बसों का संचालन बंद कर दिया गया है। हैरानी की बात ये है कि इन्हीं रूटों पर दिनभर निजी बसें कई चक्कर लगाकर सवारियां ढोती हैं।
तीन साल पहले जिन रूटों पर चार से पांच बसें चलती थीं, वहां संख्या घटाकर एक कर दी गई है। बसों को घाटा होने का कारण उनका समय निश्चित न होना भी था। स्थानीय लोगों ने इसको लेकर कई बार आवाज उठाई, लेकिन चालक परिचालकों ने अपनी आदत में सुधार नहीं लाया।
वहीं निजी बसों के चालक समयबद्ध तरीके से निकलते हैं, जिसके चलते लोगों को उनके आने जाने का समय पता रहता है। सबसे प्रमुख मार्ग मऊ से सीधा मधुबन तहसील मुख्यालय है। यहां रोज छह से सात बसें चलती हैं, लेकिन एक भी रोडवेज बस नहीं चलती है।
वर्ष 2020 से पहले इस रूट पर चार से पांच रोडवेज बस चलती थी। इसी तरह मझवारा-भीमपुरा-बेल्थरारोड मार्ग, मऊ-बरलाई-कोइरियापार-मऊ, मऊ-खालिसपुर-मऊ-गोरखपुर, कोपागंज-भातकोल-लखनऊ, मऊ-बोझी-मऊ मार्ग से भी रोडवेज सेवा बंद कर दी गई है।
मऊ डिपो में 73 बसों का बेड़ा है, इसमें 11 अनुबंधित और अन्य निगम की बसें हैं। वर्तमान में डिपो की बसों का पांच ग्रामीण रूटों पर संचालन होता है।
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इनसेट-
सर्वे के बाद भूल गए इस रूट को
परिवहन निगम ने 10 अक्तूबर 2023 को मऊ-अमिला-बोझी-कटिहारी मार्ग (45 किमी), मऊ-डुमरांव-कंधेरी-मुंगेसर-रणवीरपुर-बहादुरगंज-युसूफपुर मोहम्मदाबाद (55 किमी) सहित पांच मार्गों पर सर्वे किया गया था। इन दोनों के अलावा तीन पर बस चलाई गई, लेकिन ये प्रमुख मार्ग रोडवेज से अछूता रह गए। मऊ बहादुरगंज मार्ग पर दिनभर सात से अधिक बसों का संचालन होता है, जो गाजीपुर जनपद के आंतरिक हिस्से को जोड़ता है। लेकिन इस मार्ग पर परमिट न होने की बात कहकर निगम हाथ फेर लेता है।
सवारियों की संख्या कम होने से कुछ ग्रामीण रूटों पर बस संचालन रोका गया है। वहां डीजल खपत की तुलना में कमाई नहीं हो पाती थी। चालक परिचालकों द्वारा निर्धारित समय पर बस लेकर न जाने की शिकायत नहीं मिली है। यदि ऐसा है तो, संबंधित रूटों पर पहुंचकर समय की जांच की जाएगी। -गौतम कुमार गुप्ता, एआरएम, मऊ डिपो
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तीन साल पहले जिन रूटों पर चार से पांच बसें चलती थीं, वहां संख्या घटाकर एक कर दी गई है। बसों को घाटा होने का कारण उनका समय निश्चित न होना भी था। स्थानीय लोगों ने इसको लेकर कई बार आवाज उठाई, लेकिन चालक परिचालकों ने अपनी आदत में सुधार नहीं लाया।
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वहीं निजी बसों के चालक समयबद्ध तरीके से निकलते हैं, जिसके चलते लोगों को उनके आने जाने का समय पता रहता है। सबसे प्रमुख मार्ग मऊ से सीधा मधुबन तहसील मुख्यालय है। यहां रोज छह से सात बसें चलती हैं, लेकिन एक भी रोडवेज बस नहीं चलती है।
वर्ष 2020 से पहले इस रूट पर चार से पांच रोडवेज बस चलती थी। इसी तरह मझवारा-भीमपुरा-बेल्थरारोड मार्ग, मऊ-बरलाई-कोइरियापार-मऊ, मऊ-खालिसपुर-मऊ-गोरखपुर, कोपागंज-भातकोल-लखनऊ, मऊ-बोझी-मऊ मार्ग से भी रोडवेज सेवा बंद कर दी गई है।
मऊ डिपो में 73 बसों का बेड़ा है, इसमें 11 अनुबंधित और अन्य निगम की बसें हैं। वर्तमान में डिपो की बसों का पांच ग्रामीण रूटों पर संचालन होता है।
इनसेट-
सर्वे के बाद भूल गए इस रूट को
परिवहन निगम ने 10 अक्तूबर 2023 को मऊ-अमिला-बोझी-कटिहारी मार्ग (45 किमी), मऊ-डुमरांव-कंधेरी-मुंगेसर-रणवीरपुर-बहादुरगंज-युसूफपुर मोहम्मदाबाद (55 किमी) सहित पांच मार्गों पर सर्वे किया गया था। इन दोनों के अलावा तीन पर बस चलाई गई, लेकिन ये प्रमुख मार्ग रोडवेज से अछूता रह गए। मऊ बहादुरगंज मार्ग पर दिनभर सात से अधिक बसों का संचालन होता है, जो गाजीपुर जनपद के आंतरिक हिस्से को जोड़ता है। लेकिन इस मार्ग पर परमिट न होने की बात कहकर निगम हाथ फेर लेता है।
सवारियों की संख्या कम होने से कुछ ग्रामीण रूटों पर बस संचालन रोका गया है। वहां डीजल खपत की तुलना में कमाई नहीं हो पाती थी। चालक परिचालकों द्वारा निर्धारित समय पर बस लेकर न जाने की शिकायत नहीं मिली है। यदि ऐसा है तो, संबंधित रूटों पर पहुंचकर समय की जांच की जाएगी। -गौतम कुमार गुप्ता, एआरएम, मऊ डिपो