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Mau News: शहरी इलाके की 500 से कम राशनकार्ड वाली दुकानों का होगा विलय, सर्वे शुरू
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जिले में कुछ कोटेदारों की दुकानदारी बंद होने वाली है। जल्द ही 500 से कम राशनकार्ड वाली सरकारी दुकानों का एक-दूसरे में विलय किया जाएगा।
इस संबंध में शासन से पत्र मिलने के बाद विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। इसका उद्देश्य कोटेदारों की आर्थिक स्थिति सुधारना है। 500 से कम राशनकार्ड वाले कोटेदारों को मेहनत अधिक और कमीशन कम मिलता है।
जिले के शहरी क्षेत्र में 224 कोटे की दुकानें हैं, इनमें से 165 पर 500 से कम राशनकार्ड हैं। इनमें कहीं 300, कहीं 400 तो कहीं 250 कार्ड हैं।
एक क्विंटल खाद्यान्न वितरित करने पर कोटेदार को 90 रुपये कमीशन मिलता है। इसके अलावा पीओएस से खाद्यान्न वितरण करने पर अलग से कमीशन मिलता है। ऐसे में जिन कोटेदारों के पास कम राशनकार्ड वाली दुकानें हैं, उन्हें कम लाभ मिलता है।
ग्रामीण इलाकों में आबादी की तुलना में क्षेत्रफल अधिक है। यदि कम राशनकार्ड के चलते दुकान को दूसरे गांव में विलय कर दिया गया, तो लाभार्थियों को तीन से चार किलोमीटर की दूरी तय कर राशन लेने जाना होगा।
जबकि शहर में कम क्षेत्रफल में अधिक जनसंख्या है। इसलिए पहले शहरी इलाके की दुकानों के विलय की तैयारी की जा रही है।
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इनसेट -
मऊ नगर पालिका में 114 दुकानों पर 500 से कम राशनकार्ड
मऊ नगर पालिका परिषद में 157 कोटे की दुकानें हैं, जिनमें 114 पर 500 से कम राशनकार्ड हैं। अदरी नगर पंचायत में 6 दुकानों में से 4 और अमिला में 3 दुकानों में सभी पर कम राशनकार्ड हैं। चिरैयाकोट में 5 में से 3, दोहरीघाट में 3 में से एक और घोसी में 15 में से 12 दुकानों पर कम राशनकार्ड हैं। इसी तरह को कोपागंज में 12 में से 10, कुर्थीजाफरपुर में 5 में 2, मधुबन में 10 में 9, मुहम्मदाबाद गोहना में 11 में से 5 और वलीदपुर में 7 दुकानों में दो पर 500 से कम राशनकार्ड दर्ज हैं।
शासन की तरफ से 500 से कम राशनकार्ड वाली दुकानों को एक दूसरे में विलय करना है। इसका उद्देश्य मेहनत के अनुसार कोटेदारों को लाभ दिलाना है। इसके लिए पहले शहरी क्षेत्र की दुकानों की सूची तैयार की गई है।
-राघवेंद्र कुमार सिंह, जिलापूर्ति अधिकारी, मऊ
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इस संबंध में शासन से पत्र मिलने के बाद विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। इसका उद्देश्य कोटेदारों की आर्थिक स्थिति सुधारना है। 500 से कम राशनकार्ड वाले कोटेदारों को मेहनत अधिक और कमीशन कम मिलता है।
जिले के शहरी क्षेत्र में 224 कोटे की दुकानें हैं, इनमें से 165 पर 500 से कम राशनकार्ड हैं। इनमें कहीं 300, कहीं 400 तो कहीं 250 कार्ड हैं।
एक क्विंटल खाद्यान्न वितरित करने पर कोटेदार को 90 रुपये कमीशन मिलता है। इसके अलावा पीओएस से खाद्यान्न वितरण करने पर अलग से कमीशन मिलता है। ऐसे में जिन कोटेदारों के पास कम राशनकार्ड वाली दुकानें हैं, उन्हें कम लाभ मिलता है।
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ग्रामीण इलाकों में आबादी की तुलना में क्षेत्रफल अधिक है। यदि कम राशनकार्ड के चलते दुकान को दूसरे गांव में विलय कर दिया गया, तो लाभार्थियों को तीन से चार किलोमीटर की दूरी तय कर राशन लेने जाना होगा।
जबकि शहर में कम क्षेत्रफल में अधिक जनसंख्या है। इसलिए पहले शहरी इलाके की दुकानों के विलय की तैयारी की जा रही है।
इनसेट -
मऊ नगर पालिका में 114 दुकानों पर 500 से कम राशनकार्ड
मऊ नगर पालिका परिषद में 157 कोटे की दुकानें हैं, जिनमें 114 पर 500 से कम राशनकार्ड हैं। अदरी नगर पंचायत में 6 दुकानों में से 4 और अमिला में 3 दुकानों में सभी पर कम राशनकार्ड हैं। चिरैयाकोट में 5 में से 3, दोहरीघाट में 3 में से एक और घोसी में 15 में से 12 दुकानों पर कम राशनकार्ड हैं। इसी तरह को कोपागंज में 12 में से 10, कुर्थीजाफरपुर में 5 में 2, मधुबन में 10 में 9, मुहम्मदाबाद गोहना में 11 में से 5 और वलीदपुर में 7 दुकानों में दो पर 500 से कम राशनकार्ड दर्ज हैं।
शासन की तरफ से 500 से कम राशनकार्ड वाली दुकानों को एक दूसरे में विलय करना है। इसका उद्देश्य मेहनत के अनुसार कोटेदारों को लाभ दिलाना है। इसके लिए पहले शहरी क्षेत्र की दुकानों की सूची तैयार की गई है।
-राघवेंद्र कुमार सिंह, जिलापूर्ति अधिकारी, मऊ