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Mau News: ज्यादा देर तक बैठना, वजन उठाना और वाहन से लंबा सफर दे रहा कमर और गर्दन दर्द
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नगर के एक अस्पताल में सर्वाइकल के लिए युवक का फिजियोथैरेपी करता स्वास्थ्यकर्मी।संवाद
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ज्यादा देर तक कुर्सी पर बैठना, ज्यादा वजन उठाना और वाहन से लंबा सफर करना युवाओं की सेहत पर भारी पड़ रहा है। इससे उम्र के लोग तेजी से कमर और गर्दन दर्द की समस्या से जूझ रहे हैं। जिला अस्पताल और तीन निजी अस्पतालों के फिजियोथेरेपी के आंकड़ों में 40 फीसदी मरीजों की उम्र 20 से 40 वर्ष के बीच है।
वर्तमान में जिला अस्पताल में रोजाना 15 से 20 मरीज फिजियोथेरेपी का सहारा ले रहे हैं। इसमें 16 से 30 वर्ष के लोग भी शामिल हैं। जिम करते समय चोट लगने और अधिक आरामदायक कार्य करने से लोगों को फिजियोथेरेपी के लिए जाना पड़ रहा है।
सहादतपुरा स्थित एक निजी अस्पताल के फिजियोथेरेपी केंद्र में प्रतिदिन 20 से अधिक मरीज थेरेपी लेने के लिए आते हैं। इसमें महिलाओं व बुजुर्गों के अलावा किशोर भी शामिल हैं। सबसे अधिक वे लोग पहुंच रहे हैं जो दिनभर लैपटॉप के सामने कुर्सी पर बैठते हैं, जिम करते हैं या वाहन से लंबा सफर करते हैं।
डॉक्टर देवेश के अनुसार, लगभग 30 फीसदी मरीजों की काउंसलिंग के दौरान पाया गया कि वे व्यायाम पर ध्यान न देकर दफ्तर में कुर्सी पर बैठकर काम करना अधिक पसंद करते हैं। वहीं युवा वर्ग, खासतौर पर किशोर, करियर को प्राथमिकता देते हुए पूरे दिन कंप्यूटर पर बैठे रहते हैं।
इससे उनकी गर्दन और कमर पर अधिक असर पड़ता है। शुरुआत में वे इस पर ध्यान नहीं देते, जिससे बाद में समस्या बढ़ जाती है। इसके बाद उन्हें केवल दवा ही नहीं, बल्कि फिजियोथेरेपी केंद्र जाकर थेरेपी लेनी पड़ती है।
वहीं, एनसीडी क्लिनिक द्वारा संचालित फिजियोथेरेपी कक्ष में रोजाना मरीजों की संख्या 25 से अधिक है। इसमें कमर दर्द और सिर दर्द के साथ मस्कुलर पेन के मरीज अधिक हैं।
नोडल अधिकारी एवं एसीएमओ डॉ. बीके यादव के अनुसार, इन मरीजों की संख्या में बीते दो वर्षों में लगभग 15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वर्तमान में हर माह 800 से अधिक मरीजों का इलाज फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा किया जा रहा है, जो पिछले वर्षों की तुलना में करीब 100 मरीज अधिक है।
.......
जिम में क्षमता से अधिक वजन उठाना खतरनाक
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर धनंजय कुमार ने बताया कि आजकल नई उम्र के बच्चों में बॉडी बनाने का ट्रेंड चल गया है। जल्दी बॉडी बनाने के चक्कर में किशोर क्षमता से अधिक वजन उठा लेते हैं। इसके बाद उनकी कमर और गर्दन में इंजरी (चोट) हो रही है और उन्हें फिजियोथेरेपी केंद्र जाकर थेरेपी लेनी पड़ रही है।
आंकड़ों पर एक नजर
- 40% मरीज 20 से 40 वर्ष आयु वर्ग के
- एनसीडी क्लिनिक में प्रतिदिन 25 से अधिक मरीज पहुंच रहे
- करीब 30% मरीजों में व्यायाम की कमी और लंबे समय तक बैठना मुख्य कारण
- बीते 2 साल में 15% की बढ़ोतरी फिजियोथेरेपी के मरीजों में
क्या करें
लंबे समय तक बैठने के बीच-बीच में उठकर चलें
रोजाना हल्का व्यायाम और स्ट्रेचिंग करें
जिम में अपनी क्षमता के अनुसार ही वजन उठाएं
काम करते समय सही बैठने की मुद्रा (पोश्चर) रखें
क्या न करें
बिना ट्रेनर या जानकारी के भारी वजन न उठाएं
कमर या गर्दन दर्द होने पर उसे नजरअंदाज न करें
घंटों लगातार कुर्सी पर बैठकर काम न करें
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वर्तमान में जिला अस्पताल में रोजाना 15 से 20 मरीज फिजियोथेरेपी का सहारा ले रहे हैं। इसमें 16 से 30 वर्ष के लोग भी शामिल हैं। जिम करते समय चोट लगने और अधिक आरामदायक कार्य करने से लोगों को फिजियोथेरेपी के लिए जाना पड़ रहा है।
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सहादतपुरा स्थित एक निजी अस्पताल के फिजियोथेरेपी केंद्र में प्रतिदिन 20 से अधिक मरीज थेरेपी लेने के लिए आते हैं। इसमें महिलाओं व बुजुर्गों के अलावा किशोर भी शामिल हैं। सबसे अधिक वे लोग पहुंच रहे हैं जो दिनभर लैपटॉप के सामने कुर्सी पर बैठते हैं, जिम करते हैं या वाहन से लंबा सफर करते हैं।
डॉक्टर देवेश के अनुसार, लगभग 30 फीसदी मरीजों की काउंसलिंग के दौरान पाया गया कि वे व्यायाम पर ध्यान न देकर दफ्तर में कुर्सी पर बैठकर काम करना अधिक पसंद करते हैं। वहीं युवा वर्ग, खासतौर पर किशोर, करियर को प्राथमिकता देते हुए पूरे दिन कंप्यूटर पर बैठे रहते हैं।
इससे उनकी गर्दन और कमर पर अधिक असर पड़ता है। शुरुआत में वे इस पर ध्यान नहीं देते, जिससे बाद में समस्या बढ़ जाती है। इसके बाद उन्हें केवल दवा ही नहीं, बल्कि फिजियोथेरेपी केंद्र जाकर थेरेपी लेनी पड़ती है।
वहीं, एनसीडी क्लिनिक द्वारा संचालित फिजियोथेरेपी कक्ष में रोजाना मरीजों की संख्या 25 से अधिक है। इसमें कमर दर्द और सिर दर्द के साथ मस्कुलर पेन के मरीज अधिक हैं।
नोडल अधिकारी एवं एसीएमओ डॉ. बीके यादव के अनुसार, इन मरीजों की संख्या में बीते दो वर्षों में लगभग 15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वर्तमान में हर माह 800 से अधिक मरीजों का इलाज फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा किया जा रहा है, जो पिछले वर्षों की तुलना में करीब 100 मरीज अधिक है।
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जिम में क्षमता से अधिक वजन उठाना खतरनाक
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर धनंजय कुमार ने बताया कि आजकल नई उम्र के बच्चों में बॉडी बनाने का ट्रेंड चल गया है। जल्दी बॉडी बनाने के चक्कर में किशोर क्षमता से अधिक वजन उठा लेते हैं। इसके बाद उनकी कमर और गर्दन में इंजरी (चोट) हो रही है और उन्हें फिजियोथेरेपी केंद्र जाकर थेरेपी लेनी पड़ रही है।
आंकड़ों पर एक नजर
- 40% मरीज 20 से 40 वर्ष आयु वर्ग के
- एनसीडी क्लिनिक में प्रतिदिन 25 से अधिक मरीज पहुंच रहे
- करीब 30% मरीजों में व्यायाम की कमी और लंबे समय तक बैठना मुख्य कारण
- बीते 2 साल में 15% की बढ़ोतरी फिजियोथेरेपी के मरीजों में
क्या करें
लंबे समय तक बैठने के बीच-बीच में उठकर चलें
रोजाना हल्का व्यायाम और स्ट्रेचिंग करें
जिम में अपनी क्षमता के अनुसार ही वजन उठाएं
काम करते समय सही बैठने की मुद्रा (पोश्चर) रखें
क्या न करें
बिना ट्रेनर या जानकारी के भारी वजन न उठाएं
कमर या गर्दन दर्द होने पर उसे नजरअंदाज न करें
घंटों लगातार कुर्सी पर बैठकर काम न करें