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Mau News: 1208 स्कूलों में पढ़ने वाले 1.25 लाख बच्चों की शैक्षिक प्रगति पर रहेगी नजर
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मऊ। जिले के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता और उपलब्ध सुविधाओं का आकलन अब की परफॉर्मेंस इंडिकेटर (केपीआई) प्रणाली से किया जाएगा। बेसिक शिक्षा विभाग ने निपुण भारत मिशन के तहत विद्यालयों की शैक्षणिक प्रगति, शिक्षण व्यवस्था और संसाधनों की नियमित समीक्षा के लिए नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत विद्यालय, ब्लॉक और जिला स्तर पर निर्धारित मानकों के आधार पर प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा। योजनाओं और गतिविधियों की प्रगति भी समयबद्ध तरीके से ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करनी होगी।
जिले के 1208 परिषदीय विद्यालयों में करीब 1.25 लाख बच्चे अध्ययनरत हैं। निपुण भारत मिशन के तहत विद्यार्थियों की बुनियादी भाषा और गणितीय दक्षता मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत बच्चों के सीखने के स्तर के साथ भाषा और गणितीय दक्षता, शिक्षकों के प्रशिक्षण तथा कक्षा शिक्षण की गुणवत्ता की नियमित निगरानी की जाएगी।
इसके अलावा विद्यालयों में संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और भवन, पेयजल, शौचालय, फर्नीचर, विद्युत व्यवस्था समेत अन्य मूलभूत सुविधाओं की स्थिति भी परखी जाएगी। पोर्टल आधारित मॉनिटरिंग और गैप एनालिसिस के जरिए कमियों को चिह्नित किया जाएगा, ताकि समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें।
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अधिकारियों के अनुसार सभी विद्यालयों को निर्धारित समय-सीमा में योजनाओं और गतिविधियों की प्रगति पोर्टल पर अपडेट करनी होगी। यदि किसी विद्यालय में निर्धारित लक्ष्य पूरे नहीं होते हैं तो वहां की कमियों को चिह्नित कर विशेष कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसके आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। विभाग का मानना है कि इससे विद्यालयों की जवाबदेही बढ़ने के साथ शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता भी आएगी।
केपीआई व्यवस्था से विद्यालयों में जवाबदेही बढ़ेगी और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा। समग्र शिक्षा अभियान के तहत अगस्त और सितंबर माह के लिए निर्धारित प्रदर्शन संकेतकों के आधार पर योजनाओं की प्रगति का आकलन किया जाएगा।- डॉ. संदीप राय, प्रवक्ता, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट)
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जिले के 1208 परिषदीय विद्यालयों में करीब 1.25 लाख बच्चे अध्ययनरत हैं। निपुण भारत मिशन के तहत विद्यार्थियों की बुनियादी भाषा और गणितीय दक्षता मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत बच्चों के सीखने के स्तर के साथ भाषा और गणितीय दक्षता, शिक्षकों के प्रशिक्षण तथा कक्षा शिक्षण की गुणवत्ता की नियमित निगरानी की जाएगी।
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इसके अलावा विद्यालयों में संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और भवन, पेयजल, शौचालय, फर्नीचर, विद्युत व्यवस्था समेत अन्य मूलभूत सुविधाओं की स्थिति भी परखी जाएगी। पोर्टल आधारित मॉनिटरिंग और गैप एनालिसिस के जरिए कमियों को चिह्नित किया जाएगा, ताकि समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें।
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अधिकारियों के अनुसार सभी विद्यालयों को निर्धारित समय-सीमा में योजनाओं और गतिविधियों की प्रगति पोर्टल पर अपडेट करनी होगी। यदि किसी विद्यालय में निर्धारित लक्ष्य पूरे नहीं होते हैं तो वहां की कमियों को चिह्नित कर विशेष कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसके आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। विभाग का मानना है कि इससे विद्यालयों की जवाबदेही बढ़ने के साथ शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता भी आएगी।
केपीआई व्यवस्था से विद्यालयों में जवाबदेही बढ़ेगी और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा। समग्र शिक्षा अभियान के तहत अगस्त और सितंबर माह के लिए निर्धारित प्रदर्शन संकेतकों के आधार पर योजनाओं की प्रगति का आकलन किया जाएगा।- डॉ. संदीप राय, प्रवक्ता, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट)