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Mau News: खोहिया नाले में गंदा पानी गिरने पर लगेगी रोक, लगाए जाएंगे पौधे
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रतनपुरा ब्लॉक के गाढ़ा ताल में गिरने खोहिया नाला और आसपास की हालत बदलने वाली है। जिला गंगा समिति की निगरानी में सात विभाग अपने स्तर से यहां काम कराएंगे। इससे होकर गाढ़ा ताल में गिरने वाले गंदे पानी को साफ सुथरा किया जाएगा।
इसपर किए गए अतिक्रमण हटवाए जाएंगे, किनारे पौधरोपण कराया जाएगा जिससे आसपास का पर्यावरण बेहतर किया जा सके। गठित टीम बुधवार को मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण करेगी, ताकि कार्य कराने की योजना बनाई जा सके।
किनारे पड़ने वाले खेत के किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे रसायनिक खाद बरसात में रिसकर ताल तक न पहुंच सके। ये बाहा दोहरीघाट की तरफ से निकला और गाढ़ा ताल में आकर मिल जाता है।
इसकी चौड़ाई 6 फीट है जिसे लोग नाला के नाम से जानते हैं। रतनपुरा ब्लॉक में ही लोग कहीं खोईया नाला, कहीं बिसुकिया नाला तो कहीं किसी और नाम से जानते हैं। सरयू नदी के बाढ़ का पानी इस नाले से होकर ताल में गिरता है।
वर्तमान स्थिति ये है कि 100 से अधिक गांवों के घरों से निकलने वाला गंदा पानी इसमें गिरता है। रतनपुरा, दतौड़ा और मुबारकपुर ग्राम पंचायत में लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है। रतनपुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से निकलने वाला मेडिकल वेस्ट किनारे फेंककर उसमें आग लगा दी जाती है।
कई जगहों पर कचरा डंप किया जाता है। बारिश होने पर सारा कचरा तेज बहाव के चलते ताल में पहुंचता है। नाला का अस्तित्व बनाए रखने के लिए जिला गंगा समिति ने सात विभागों की समिति बनाई है।
सीडीओ को समिति का नोडल बनाया गया है, जिला पंचायतीराज अधिकारी, जिला कृषि अधिकारी, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग, वन विभाग, डीसी मनरेगा, श्रमायुक्त मऊ, भूगर्भ जल विभाग को सदस्य बनाया गया है। ये सभी विभाग आवश्यकतानुसार अपने अपने स्तर से काम कराएंगे।
खोहिया नाला का अस्तित्व बनाए रखने के उद्देश्य से सर्वे कराया जाएगा। कई तरह के काम कराए जाएंगे। पहले टीम मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करेगी। आवश्यकतानुसार काम कराए जाएंगे। -विवेक कुमार श्रीवास्तव, सीडीओ, मऊ
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किनारे पड़ने वाले खेत के किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे रसायनिक खाद बरसात में रिसकर ताल तक न पहुंच सके। ये बाहा दोहरीघाट की तरफ से निकला और गाढ़ा ताल में आकर मिल जाता है।
इसकी चौड़ाई 6 फीट है जिसे लोग नाला के नाम से जानते हैं। रतनपुरा ब्लॉक में ही लोग कहीं खोईया नाला, कहीं बिसुकिया नाला तो कहीं किसी और नाम से जानते हैं। सरयू नदी के बाढ़ का पानी इस नाले से होकर ताल में गिरता है।
वर्तमान स्थिति ये है कि 100 से अधिक गांवों के घरों से निकलने वाला गंदा पानी इसमें गिरता है। रतनपुरा, दतौड़ा और मुबारकपुर ग्राम पंचायत में लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है। रतनपुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से निकलने वाला मेडिकल वेस्ट किनारे फेंककर उसमें आग लगा दी जाती है।
कई जगहों पर कचरा डंप किया जाता है। बारिश होने पर सारा कचरा तेज बहाव के चलते ताल में पहुंचता है। नाला का अस्तित्व बनाए रखने के लिए जिला गंगा समिति ने सात विभागों की समिति बनाई है।
सीडीओ को समिति का नोडल बनाया गया है, जिला पंचायतीराज अधिकारी, जिला कृषि अधिकारी, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग, वन विभाग, डीसी मनरेगा, श्रमायुक्त मऊ, भूगर्भ जल विभाग को सदस्य बनाया गया है। ये सभी विभाग आवश्यकतानुसार अपने अपने स्तर से काम कराएंगे।
खोहिया नाला का अस्तित्व बनाए रखने के उद्देश्य से सर्वे कराया जाएगा। कई तरह के काम कराए जाएंगे। पहले टीम मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करेगी। आवश्यकतानुसार काम कराए जाएंगे। -विवेक कुमार श्रीवास्तव, सीडीओ, मऊ