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Mau News: यूपी बोर्ड में हर तीन महीने पर यूनिट टेस्ट, जुलाई में पहली परीक्षा
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जिले के माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को अब केवल वार्षिक परीक्षा पर निर्भर नहीं रहना होगा, बल्कि हर तीन माह में अनिवार्य रूप से यूनिट टेस्ट देना होगा। पहला यूनिट टेस्ट जुलाई के दूसरे सप्ताह में आयोजित किया जाएगा।
जिले में 17 राजकीय, 67 सहायता प्राप्त और 436 वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों में नौवीं से 12वीं कक्षा तक लगभग 1.78 लाख छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से नए शैक्षिक सत्र से परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव किया गया है।
बोर्ड के इस नए कदम का उद्देश्य छात्रों की विषयों पर पकड़ और उनकी वैचारिक समझ का मूल्यांकन करना है। यूनिट टेस्ट में मुख्य रूप से बहुविकल्पीय प्रश्नों को शामिल किया गया है।
इससे छात्रों की त्वरित सोच और सही विकल्प चुनने की क्षमता विकसित की जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार इस पैटर्न से छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी तैयार हो सकेंगे। बोर्ड की मंशा है कि छात्रों पर अंतिम परीक्षा का बोझ कम किया जाए और लगातार मूल्यांकन के जरिए उनकी क्षमता बढ़ाई जाए।
इसके साथ ही नियमित परीक्षा के माध्यम से छात्रों का समय-समय पर मूल्यांकन भी संभव हो सकेगा। इस बाबत जिला विद्यालय निरीक्षक गौतम प्रसाद का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के अनुरूप तैयार करना है।
इस प्रणाली से छात्रों में परीक्षा का दबाव कम होगा, क्योंकि पूरे साल छोटे-छोटे चरणों में मूल्यांकन होगा। इससे अंतिम परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन की संभावना भी बढ़ेगी। जिले के सभी माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को समयबद्ध तरीके से पाठ्यक्रम पूरा कराने और नए परीक्षा पैटर्न के अनुसार छात्रों को अभ्यास कराने के दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
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जिले में 17 राजकीय, 67 सहायता प्राप्त और 436 वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों में नौवीं से 12वीं कक्षा तक लगभग 1.78 लाख छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से नए शैक्षिक सत्र से परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव किया गया है।
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बोर्ड के इस नए कदम का उद्देश्य छात्रों की विषयों पर पकड़ और उनकी वैचारिक समझ का मूल्यांकन करना है। यूनिट टेस्ट में मुख्य रूप से बहुविकल्पीय प्रश्नों को शामिल किया गया है।
इससे छात्रों की त्वरित सोच और सही विकल्प चुनने की क्षमता विकसित की जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार इस पैटर्न से छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी तैयार हो सकेंगे। बोर्ड की मंशा है कि छात्रों पर अंतिम परीक्षा का बोझ कम किया जाए और लगातार मूल्यांकन के जरिए उनकी क्षमता बढ़ाई जाए।
इसके साथ ही नियमित परीक्षा के माध्यम से छात्रों का समय-समय पर मूल्यांकन भी संभव हो सकेगा। इस बाबत जिला विद्यालय निरीक्षक गौतम प्रसाद का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के अनुरूप तैयार करना है।
इस प्रणाली से छात्रों में परीक्षा का दबाव कम होगा, क्योंकि पूरे साल छोटे-छोटे चरणों में मूल्यांकन होगा। इससे अंतिम परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन की संभावना भी बढ़ेगी। जिले के सभी माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को समयबद्ध तरीके से पाठ्यक्रम पूरा कराने और नए परीक्षा पैटर्न के अनुसार छात्रों को अभ्यास कराने के दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
