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Mau News: बुनकरों के हुनर को लगेंगे पंख, भुजौटी में 75 एकड़ में बनेगा टेक्सटाइल पार्क

Mon, 10 Aug 2026 12:42 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 10 Aug 2026 12:42 AM IST
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Weavers' skills set to soar; textile park to be built on 75 acres in Bhujauti.
मऊ। ताना-बाना की नगरी मऊ के बुनकरों और वस्त्र कारोबारियों के लिए अच्छी खबर है। जिले में जल्द ही आधुनिक सुविधाओं से लैस टेक्सटाइल पार्क विकसित किया जाएगा। हथकरघा विभाग ने इसके लिए भुजौटी में करीब 75 एकड़ जमीन चिह्नित करने का काम पूरा कर लिया है। पार्क बनने के बाद बुनकरों और कारोबारियों को वस्त्र निर्माण से जुड़ी विभिन्न सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध हो सकेंगी।
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हथकरघा विभाग के मुताबिक, पार्क के लिए जमीन चिह्नित होने के बाद अब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है। जिला प्रशासन से हरी झंडी मिलने के बाद डीपीआर शासन को भेजी जाएगी। शासन से धनराशि स्वीकृत होते ही निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। हथकरघा विभाग के सहायक आयुक्त सुधांशु सिन्हा ने बताया कि टेक्सटाइल पार्क को लेकर जिले में काफी उम्मीदें हैं। शासन ने संत कबीर टेक्सटाइल एंड अपैरल पार्क योजना के तहत इसे विकसित करने का निर्णय लिया है। भुजौटी में जमीन चिह्नित करने का काम पूरा हो चुका है। डीपीआर तैयार की जा रही है। जिला प्रशासन की स्वीकृति के बाद इसे शासन को भेजा जाएगा। शासन से धनराशि मिलते ही आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
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मऊ हथकरघा परिक्षेत्र में मऊ, आजमगढ़, गाजीपुर और बलिया के करीब 48,566 बुनकर जुड़े हुए हैं। वहीं पावरलूम की संख्या करीब 60,653 है। इनमें मऊ में 55,693, आजमगढ़ में 4,311 और गाजीपुर में 649 पावरलूम संचालित हैं। इसके अलावा करीब 12 हजार हथकरघा बुनकर भी इस क्षेत्र से जुड़े हैं। इनमें मऊ में करीब 700, आजमगढ़ में 10 हजार और गाजीपुर में 1,200 हथकरघा बुनकर शामिल हैं। ऐसे में टेक्सटाइल पार्क के निर्माण से बड़े स्तर पर बुनकरों और वस्त्र कारोबारियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
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मऊ। जिले की पहचान बन चुकी सिल्क साड़ी को एक जिला, एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में शामिल किया गया है। वर्तमान में बुनकरों को साड़ी की डाइंग, प्रिंटिंग और अन्य प्रक्रियाओं के लिए वाराणसी समेत दूसरे जिलों का रुख करना पड़ता है। इससे समय और लागत दोनों बढ़ती है। टेक्सटाइल पार्क बनने के बाद बुनकरों को इन सुविधाओं के लिए दूसरे जिलों पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है। एक ही परिसर में वस्त्र निर्माण से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध होने से उत्पादन लागत घटने, काम में तेजी आने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है।

सहायक आयुक्त सुधांशु सिन्हा ने बताया कि टेक्सटाइल पार्क में एक ही जगह पर कई सारी फैक्टरी यूनिट को स्थापित किया जाता है। प्रस्तावित पार्क में बुनाई, रंगाई, छपाई सहित कपड़ों के निर्माण के दूसरे उत्पादन इकाइयां होंगी। इसके अलावा प्रशिक्षण केंद्र और प्रशासनिक भवन, एटीएम, कैंटीन, बिजली, सड़क, पानी और सीवरेज जैसी बुनियादी सुविधाएं भी सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जाएंगी।
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