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Mau News: जिले के 11 हजार बदमाशोंं पर रहेगी यक्ष की नजर, आवाज से निकलेगी कुंडली
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जिले के 11 हजार अपराधियों पर यक्ष एप की पैनी नजर रहेगी। नए वित्तीय सत्र से इनमें से किसी पर कहीं भी प्राथमिकी दर्ज होती है तो उनके थाने को इसकी खबर हो जाएगी। इससे अपराध और अपराधियों पर त्वरित नियंत्रण संभव हो सकेगा।
अपराधियों के सत्यापन और उनकी कुंडली खंगालने के लिए पुलिस को फाइलों का पन्ना पलटने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके लिए एआई फीचर से लैस यक्ष एप लांच लिया गया है।
एक फरवरी से सभी 12 थानों में दर्ज अपराधियों की जानकारी इस एप पर अपलोड की जा रही है, एक बार फीडिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद अपराधियों का डाटा एक क्लिक में मिलेगी।
यक्ष एप पर चल रही अपराधियों की फीडिंग में नाम, पता, अपराध, दर्ज मुकदमे, जेल अवधि, अपराध का तरीका, फोटो, पहचान चिह्न और आवाज की रिकॉर्डिंग रहेगी।
जिन थाना क्षेत्र में यह अपराध करेंगे वहां की पुलिस इनका क्रिमिनल रिकॉर्ड, अपराध के तरीके, अपराध में प्रयुक्त हथियार, अपराध की रूपरेखा इत्यादि के बारे में जानकर उनके खिलाफ ठोस साक्ष्य एकत्र कर सकेगी, जिससे पुलिस कन्विक्शन सरल और कम समय में संभव हो सकेगा।
एसपी इलामारन जी ने बताया कि थानों में गांव की संख्या, 11 हजार 433 अपराधियों की संख्या भी दर्ज की जा रही है। इस तकनीकी से आवाज और अन्य सूचनाओं से अपराधी का स्केच भी आसानी से उपलब्ध हो जाएगा।
गृह मंत्रालय की तरफ से यक्ष एप विकसित किया गया है, ताकि पुलिस डिजिटल रूप से तकनीकी दक्षता हासिल कर सके। सभी बीट आरक्षियों को निर्देश दिए गए हैं वे अपने क्षेत्र के अपराधियों का डाटा ऑपरेटर से फीड करा दें।
निवास स्थान से गायब होने पर मिलेगा अलर्ट
यक्ष एप अपराधियों के चेहरे और आवाज का मिलान करके उनकी रियल टाइम लोकेशन और गतिविधियों पर नजर रखेगा। इसमें गली-मोहल्ले के छोटे अपराधियों से लेकर माफियाओं तक का ब्योरा होगा। यह तकनीक अपराधियों की कार्यशैली और डेटा का विश्लेषण कर पुलिस को तत्काल जानकारी देगी। अपराधियों को खतरे की गंभीरता के अनुसार बांटता है और अपराधी के निवास स्थान से गायब होने पर लोकेशन का अलर्ट भेजता है। एप का इस्तेमाल लाइसेंसी शस्त्रों और कारतूसों के सत्यापन के लिए भी किया जा सकता है। यक्ष एप का कंट्रोल रूम उत्तर प्रदेश एसटीएफ मुख्यालय में है।
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अपराधियों के सत्यापन और उनकी कुंडली खंगालने के लिए पुलिस को फाइलों का पन्ना पलटने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके लिए एआई फीचर से लैस यक्ष एप लांच लिया गया है।
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एक फरवरी से सभी 12 थानों में दर्ज अपराधियों की जानकारी इस एप पर अपलोड की जा रही है, एक बार फीडिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद अपराधियों का डाटा एक क्लिक में मिलेगी।
यक्ष एप पर चल रही अपराधियों की फीडिंग में नाम, पता, अपराध, दर्ज मुकदमे, जेल अवधि, अपराध का तरीका, फोटो, पहचान चिह्न और आवाज की रिकॉर्डिंग रहेगी।
जिन थाना क्षेत्र में यह अपराध करेंगे वहां की पुलिस इनका क्रिमिनल रिकॉर्ड, अपराध के तरीके, अपराध में प्रयुक्त हथियार, अपराध की रूपरेखा इत्यादि के बारे में जानकर उनके खिलाफ ठोस साक्ष्य एकत्र कर सकेगी, जिससे पुलिस कन्विक्शन सरल और कम समय में संभव हो सकेगा।
एसपी इलामारन जी ने बताया कि थानों में गांव की संख्या, 11 हजार 433 अपराधियों की संख्या भी दर्ज की जा रही है। इस तकनीकी से आवाज और अन्य सूचनाओं से अपराधी का स्केच भी आसानी से उपलब्ध हो जाएगा।
गृह मंत्रालय की तरफ से यक्ष एप विकसित किया गया है, ताकि पुलिस डिजिटल रूप से तकनीकी दक्षता हासिल कर सके। सभी बीट आरक्षियों को निर्देश दिए गए हैं वे अपने क्षेत्र के अपराधियों का डाटा ऑपरेटर से फीड करा दें।
निवास स्थान से गायब होने पर मिलेगा अलर्ट
यक्ष एप अपराधियों के चेहरे और आवाज का मिलान करके उनकी रियल टाइम लोकेशन और गतिविधियों पर नजर रखेगा। इसमें गली-मोहल्ले के छोटे अपराधियों से लेकर माफियाओं तक का ब्योरा होगा। यह तकनीक अपराधियों की कार्यशैली और डेटा का विश्लेषण कर पुलिस को तत्काल जानकारी देगी। अपराधियों को खतरे की गंभीरता के अनुसार बांटता है और अपराधी के निवास स्थान से गायब होने पर लोकेशन का अलर्ट भेजता है। एप का इस्तेमाल लाइसेंसी शस्त्रों और कारतूसों के सत्यापन के लिए भी किया जा सकता है। यक्ष एप का कंट्रोल रूम उत्तर प्रदेश एसटीएफ मुख्यालय में है।
