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Meerut News: मगफिरत के अशरे में इबादत का दौर, आज रमजान का तीसरा जुमा
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- माह-ए-रमजान अपने पूरे नूर के साथ जारी
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। माह-ए-रमजान अपने पूरे नूर के साथ जारी है। पहले दस दिन रहमत के गुजरने के बाद अब दूसरा अशरा (11वें से 20वें रोजे तक) शुरू हो चुका है, जिसे मगफिरत यानी माफी का दौर कहा जाता है। मेरठ की ऐतिहासिक जामा मस्जिद समेत शहर की तमाम छोटी-बड़ी मस्जिदों में इस समय इबादत और दुआओं का दौर चल रहा है।
कारी शफीकुर्रहमान कासमी ने बताया कि रमजान का यह दूसरा पड़ाव रूहानियत के लिहाज से बेहद खास माना जाता है। मान्यता है कि इन दस दिनों में सच्चे दिल से मांगी गई माफी अल्लाह कबूल फरमाता है। शहर के रोजेदार मस्जिदों में तौबा और इस्तगफार (माफी मांगना) कर रहे हैं।
शहर काजी जैनुस साजिदीन सिद्दीकी ने बताया कि चिलचिलाती धूप और बढ़ती गर्मी के बावजूद रोजेदारों के जज्बे में कोई कमी नहीं है। बाजारों से लेकर घरों तक इफ्तार और सहरी की रौनक बनी हुई है। मुल्क में अमन, चैन और खुशहाली के लिए विशेष दुआएं मांगी जा रही हैं। रमजान के तीसरे जुमे के लिए मस्जिदों की विशेष साफ-सफाई की गई है। अधिक भीड़ को देखते हुए दरियों और छाया का प्रबंध किया गया है। नायब शहर काजी जैनुर राशिदीन सिद्दीकी ने बताया कि जुमे की नमाज में उलेमाओं द्वारा रमजान की फजीलत और जकात (दान) के महत्व पर रोशनी डाली जाएगी।
मस्जिदों में तरावीह का एहतमाम
रात के समय मस्जिदों में नमाज-ए-तरावीह का सिलसिला जारी है। कई मस्जिदों में कुरान मुकम्मल (पूरा) होने के करीब है जहां शबीना (विशेष रात्रिकालीन पाठ) का आयोजन किया जा रहा है। दूसरे अशरे की अहमियत बताते हुए उलमाओं ने कहा कि यह समय खुद को गुनाहों से पाक करने और अपनी गलतियों की माफी मांगने का सबसे बेहतरीन मौका है।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। माह-ए-रमजान अपने पूरे नूर के साथ जारी है। पहले दस दिन रहमत के गुजरने के बाद अब दूसरा अशरा (11वें से 20वें रोजे तक) शुरू हो चुका है, जिसे मगफिरत यानी माफी का दौर कहा जाता है। मेरठ की ऐतिहासिक जामा मस्जिद समेत शहर की तमाम छोटी-बड़ी मस्जिदों में इस समय इबादत और दुआओं का दौर चल रहा है।
कारी शफीकुर्रहमान कासमी ने बताया कि रमजान का यह दूसरा पड़ाव रूहानियत के लिहाज से बेहद खास माना जाता है। मान्यता है कि इन दस दिनों में सच्चे दिल से मांगी गई माफी अल्लाह कबूल फरमाता है। शहर के रोजेदार मस्जिदों में तौबा और इस्तगफार (माफी मांगना) कर रहे हैं।
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शहर काजी जैनुस साजिदीन सिद्दीकी ने बताया कि चिलचिलाती धूप और बढ़ती गर्मी के बावजूद रोजेदारों के जज्बे में कोई कमी नहीं है। बाजारों से लेकर घरों तक इफ्तार और सहरी की रौनक बनी हुई है। मुल्क में अमन, चैन और खुशहाली के लिए विशेष दुआएं मांगी जा रही हैं। रमजान के तीसरे जुमे के लिए मस्जिदों की विशेष साफ-सफाई की गई है। अधिक भीड़ को देखते हुए दरियों और छाया का प्रबंध किया गया है। नायब शहर काजी जैनुर राशिदीन सिद्दीकी ने बताया कि जुमे की नमाज में उलेमाओं द्वारा रमजान की फजीलत और जकात (दान) के महत्व पर रोशनी डाली जाएगी।
मस्जिदों में तरावीह का एहतमाम
रात के समय मस्जिदों में नमाज-ए-तरावीह का सिलसिला जारी है। कई मस्जिदों में कुरान मुकम्मल (पूरा) होने के करीब है जहां शबीना (विशेष रात्रिकालीन पाठ) का आयोजन किया जा रहा है। दूसरे अशरे की अहमियत बताते हुए उलमाओं ने कहा कि यह समय खुद को गुनाहों से पाक करने और अपनी गलतियों की माफी मांगने का सबसे बेहतरीन मौका है।
