Mission 2027: भाजपा में क्षेत्रीय अध्यक्ष पद को लेकर घमासान, मेरठ जिला कार्यकारिणी पर भी खींचतान
Mission 2027: भाजपा में क्षेत्रीय अध्यक्ष पद के लिए दिग्गज नेताओं के बीच खींचतान तेज हो गई है। मेरठ की जिला कार्यकारिणी को लेकर भी उठापटक बढ़ गई है और दावेदारों के नामों पर मंथन जारी है।
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भाजपा का गढ़ मानी जाने वाली मेरठ कैंट विधानसभा सीट पर 2027 की चुनावी जंग के लिए दावेदरों में टिकट वार छिड़ गया है। मौजूदा विधायक अमित अग्रवाल जहां चौथी बार विधायक बनने के लिए ताल ठोंक रहे हैं तो उन्हें टिकट की चुनौती देने के लिए भाजपा में दावेदारी की लंबी फेहरिस्त होती जा रही है।
1989 में परमात्मा शरण
1989 से मेरठ कैंट सीट भाजपा की सबसे सुरक्षित और अजेय रही है। इस भगवा गढ़ में वर्तमान विधायक अमित अग्रवाल अपने प्रदर्शन के दम पर फिर से टिकट मिलने के प्रति आश्वस्त हैं, तो टिकट के दावेदारों की लंबी फेहरिस्त ने अभी से ही हाईकमान ता सिरदर्द बढ़ा दिया है। कहा जा रहा है कि इस सीट से टिकट मिलना ही जीत की पक्की गारंटी होता है।
1989 में परमात्मा शरण मित्तल ने कांग्रेस के अजीत सेठी को हराकर भाजपा की जीत का अभियान शुरू किया था। परमात्मा शरण के निधन के बाद हुए उप चुनाव में उनकी पत्नी शशि मित्तल ने जीत हासिल की। 1993 और 1996 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर अमित अग्रवाल विधानसभा पहुंचे।
इसके बाद 2002, 2007, 2012 और 2017 में सत्यप्रकाश अग्रवाल लगातार चार बार विधायक बने। 2022 में टिकट मिलने पर अमित अग्रवाल तीसरी बार विधायक बने। एबीवीपी की छात्र राजनीति से आए अमित अग्रवाल की बड़ी पहचान उनका विधायी कौशल और सहज जनसंपर्क है। अपने प्रदर्शन के बल पर वे फिर से कैंट सीट से टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं।
मेरठ कैंट विधानसभा क्षेत्र में भाजपा का टिकट जीत की गारंटी माना जाता है। यही कारण है कि हर कोई भाजपा नेता यहां से टिकट चाहता है। 1989 से यह सीट वैश्य समाज के उम्मीदवारों के लिए जीत का पर्याय बन गई है। इस सीट पर भाजपा की जीत लगभग तय मानी जाती है, इसलिए हर बड़ा नेता यहां से चुनावी वैतरणी पार करना चाहता है। इसी कारण पुराने दिग्गज अपने अनुभव का हवाला देकर टिकट मांग रहे हैं तो युवा और सोशल इंजीनियरिंग के दम पर नए चेहरे अपनी पैठ जमाने में जुटे हैं।
उम्मीदवारों की दिल्ली और लखनऊ दौड़
मिशन यूपी 2027 के चुनाव को लेकर अभी से खेमेबंदी चल रही है। टिकट के दावेदारों ने लखनऊ और दिल्ली दरबार की दौड़ तेज कर दी है। भाजपा के प्रदेश और केंद्रीय दरबार में टिकट के दावेदार लॉबिंग कर रहे हैं। सोशल मीडिया से लेकर शहर के होर्डिंग्स तक, हर कोई अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। अभी तक गुपचुप दावेदारी जता रहे नेताओं ने खुलकर टिकट मांगना शुरू कर दिया है।
दावेदारों की लंबी फेहरिस्त
वर्तमान कैंट विधायक अमित अग्रवाल की प्रबल दावेदारी है। आईआईएमटी के प्रति कुलाधिपति डॉ. मयंक अग्रवाल, पूर्व महानगर अध्यक्ष मुकेश सिंघल, पूर्व क्षेत्रीय महामंत्री जयकरण गुप्ता, युवा नेता नीरज मित्तल ने भी दावेदारी की है। इसी तरह संजीव जैन सिक्का, पूर्व कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष सुनील वाधवा, पूर्व कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष बीना वाधवा के अलावा भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक विनीत अग्रवाल शारदा भी टिकट की दौड़ में है।
सांसद अरुण गोविल के कैंट सीट के प्रतिनिधि दीपक गुप्ता, युवा मोर्चा के प्रदेश महामंत्री वरुण गोयल, राजीव दीवान, राजेश दीवान, कवयित्री कोमल रस्तोगी, अजय गुप्ता नटराज, विजेंद्र अग्रवाल, हर्ष गोयल, क्षेत्रीय महामंत्री डॉ. विकास अग्रवाल, राकेश माहेश्वरी भी टिकट की लाइन में लगे हैं।
एसआईआर में कटे वोट बन सकते हैं चुनौती
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मेरठ कैंट सीट पर 1.49 लाख वोट कटने से भाजपा नेताओं की परेशानी बढ़ी है। इनमें से अधिकांश मतदाताओं के वोट स्थानांतरित श्रेणी में कटे हैं। यहां पर भाजपा उम्मीदवारों की जीत का अंतर लगभग एक लाख वोटों तक होता है। ऐसे में नए वोट बनाने के अभियान में भाजपा नेताओं पूरी ताकत से जुटे हैं, ताकि एसआईआर में कटे वोटों की भरपाई की जा सके। दूसरे शहरों से स्थानांतरित होकर मेरठ कैंट क्षेत्र में आए लोगों के वोट भी बनवाए गए हैं।