Delhi-Dehradun E-way: पहली ही बारिश में धुलने लगे दावे, कई जगह धंसी सड़क, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल
शामली में दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड आर्थिक गलियारा मार्ग पहली ही मानसूनी बारिश में धंस गया। घटना के बाद निर्माण गुणवत्ता और वर्षा जल निकासी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। अधिकारियों ने स्थायी मरम्मत का भरोसा दिया है।
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दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड आर्थिक गलियारा मार्ग पर मानसून की पहली ही बारिश ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करौदा महाजन और डुंगर गांव के पास वर्षा का पानी रिसने से सड़क का हिस्सा धंस गया और गहरे गड्ढे बन गए। राहत की बात यह रही कि इस दौरान कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन घटना का दृश्य सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित होने के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और निर्माण एजेंसी के अधिकारियों में हलचल मच गई।
वर्षा जल निकासी नहीं होने से धंसी सड़क
जानकारी के अनुसार वर्षा के पानी की समुचित निकासी नहीं होने से सड़क के नीचे की मिट्टी बह गई, जिससे मार्ग का हिस्सा धंस गया। सूचना मिलते ही निर्माण एजेंसी की टीम मौके पर पहुंची और बजरी डालकर गड्ढों को अस्थायी रूप से भर दिया। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही स्थायी मरम्मत का कार्य कराया जाएगा।
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लोकार्पण के ढाई माह बाद सामने आई बड़ी खामी
पंद्रह अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की उपस्थिति में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के इस हिस्से का लोकार्पण किया था। उस समय इसे आधुनिक तकनीक से तैयार अत्याधुनिक मार्ग बताया गया था, लेकिन लोकार्पण के लगभग ढाई माह बाद पहली ही बारिश में सड़क धंसने से निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।
किसान संघर्ष समिति ने लगाए गंभीर आरोप
दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड आर्थिक गलियारा एक्सप्रेस किसान संघर्ष समिति के सचिव विदेश मलिक ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया। उनका कहना है कि जल्दबाजी में लोकार्पण कर दिया गया, जबकि वर्षा जल निकासी की व्यवस्था अभी भी अधूरी है। उन्होंने बताया कि भिक्का माजरा के पास सेवा मार्ग का निर्माण भी पूरा नहीं हुआ है और भूमिगत मार्ग में जलभराव होने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
निर्माण एजेंसी ने दिया यह स्पष्टीकरण
निर्माण एजेंसी के परियोजना प्रबंधक जितेंद्र बालियान ने बताया कि मेरठ-करनाल मार्ग के उपरिगामी पुल से वर्षा का पानी एक्सप्रेसवे के नीचे पहुंच गया था, जिसके कारण सड़क धंस गई। उन्होंने कहा कि सूचना मिलते ही गड्ढों को भर दिया गया है और स्थायी मरम्मत का कार्य शीघ्र कराया जाएगा।
ग्रामीणों ने मानकों पर उठाए सवाल
लांक गांव के मनीष और मोहित ने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं किया गया। उनका कहना है कि यदि पहली ही बारिश में सड़क धंस गई है तो निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है। दोनों ने मामले की शिकायत जिलाधिकारी से करने की बात कही है।