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Meerut News: तुरई की बेल में भरपूर फल के लिए वैज्ञानिक तकनीक अपनाएं किसान

Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 06 Apr 2026 09:24 PM IST
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Farmers should adopt scientific techniques for abundant fruit production in ridge gourd vines.
खेत मचान विधि से लगी तोरई स्रोत केवीके
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- हस्तिनापुर क्षेत्र में कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञ दे रहे सुझाव
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संवाद न्यूज एजेंसी

हस्तिनापुर। गर्मी के मौसम में तुरई (तोरई) की खेती करने वाले किसानों को अधिक उत्पादन के लिए कस्बे के स्वामी कल्याण देव कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने की सलाह दी है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सही प्रबंधन से बेल में मादा फूलों की संख्या बढ़ती है और फलन बेहतर होता है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बेल जब चार से पांच फीट लंबी हो जाए तो उसकी शीर्ष कली को काट देना चाहिए। इस प्रक्रिया से साइड शाखाओं का विकास होता है और इन पर अधिक मादा फूल बनते हैं। इसके साथ ही मचान विधि अपनाने से बेल को सहारा मिलता है। फल सीधे और साफ बनते हैं। रोगों की संभावना कम हो जाती है।
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पोषण प्रबंधन के तहत सड़ी हुई गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट और नीम खली का 15 से 20 दिन के अंतराल पर उपयोग करना लाभकारी होता है। इसके अलावा चावल धोने के बाद बचा पानी (मांड) भी पौधों की जड़ों में डालने से वृद्धि और फलन में सुधार होता है। यदि खेत में मधुमक्खियों की कमी हो, तो सुबह के समय हाथ से परागण करना भी उपयोगी साबित होता है। वहीं नियमित सिंचाई, जलभराव से बचाव और पर्याप्त धूप (6 से 8 घंटे) पौधों के लिए आवश्यक है।
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अत्यधिक तापमान में हल्की सिंचाई करें
केवीके प्रभारी डॉ. राकेश तिवारी ने बताया कि अत्यधिक तापमान, पोषण की कमी और परागण न होने से फूल गिरने की समस्या बढ़ जाती है। ऐसे में किसान हल्की सिंचाई करें और संतुलित पोषण बनाए रखें, जिससे उत्पादन में वृद्धि संभव है। वहीं, कृषि वैज्ञानिक डॉ. नवीन चंद्र ने कहा कि समय पर पिंचिंग, मचान विधि और जैविक खादों का संतुलित उपयोग करने से फसल में गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बढ़ते हैं। किसानों को नियमित निगरानी और उचित प्रबंधन अपनाना चाहिए, ताकि बेहतर परिणाम मिल सकें।
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