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सेंट्रल मार्केट मेरठ: इंजीनियर को मारा गया चांटा पड़ा भारी, बाजार उजड़ने की बन गया वजह, ऐसे शुरू हुआ था मामला
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
Published by: Mohd Mustakim
Updated Thu, 09 Apr 2026 11:47 AM IST
सार
Meerut News: शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में अवैध निर्माण की सूचना पर पहुंची आवास विकास की टीम के साथ साल 2013 में व्यापारियों ने अभद्रता कर दी थी। एक व्यापारी ने अधीक्षण अभियंता को चांटा मार दिया था। विभाग ने इसे अपनी प्रतिष्ठा का विषय बना लिया और मामला सीलिंग तक आ पहुंचा।
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सील लगने पर विलाप करती महिला और एक व्यापारी हुए बेहोश।
- फोटो : अमर उजाला
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सेंट्रल मार्केट में आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच कुछ व्यापारियों में यह भी चर्चा रही कि कुछ साल पहले आवास विकास के अफसरों के साथ हुई खींचतान भी उन्हें भारी पड़ी है। 1990 और 2013 में निर्माण पर आपत्ति के बाद विरोध के दौरान आवास विकास के अभियंताओं के साथ अभद्रता और मारपीट हो गई थी, अधीक्षण अभियंता को चांटा मार दिया गया था। इसके बाद से विभागीय अफसरों ने इसे प्रतिष्ठा का विषय बना लिया। उनके बीच शुरू हुआ विवाद बुधवार को सीलिंग तक पहुंच गया है।
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सील लगानी टीम।
- फोटो : अमर उजाला
कुछ व्यापारियों का कहना है कि 1990 में जब कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जा रहा था, तब आवास विकास के अवर अभियंता यहां पहुंचे थे। उन्होंने निर्माण पर आपत्ति जताते हुए इसे रोकने को कहा था।
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सड़क पर बैठकर धरना देते व्यापारी।
- फोटो : अमर उजाला
बताया जाता है कि अवर अभियंता का उस समय व्यापारी नेता विनोद अरोड़ा ने गिरेबान पकड़ लिया था। कुछ लोगों ने मारपीट कर दी थी। अवर अभियंता ने थाना नौचंदी में मामला दर्ज कराया था।
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सीलिंग के दौरान तैनात फोर्स।
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद 19 सितंबर 1990 को आवास विकास ने कारण बताओ नोटिस भेजकर अवैध निर्माण रोकने को कहा। नौ फरवरी 2004 को आवंटित भूखंड का अवैध रूप से उपयोग किए जाने तथा वाणिज्यिक उद्देश्य से किए गए निर्माण को ध्वस्त करने के निर्देश दिए गए।
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विलाप करती महिला।
- फोटो : अमर उजाला
इस पर विनोद अरोड़ा सहित अन्य ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके चलते 23 मार्च 2005 को 661/6 के ध्वस्तीकरण के आदेश पारित कर दिए गए। बाद में यह मामला अदालतों में चलता रहा।
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