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गायत्री यज्ञ से होती है वातावरण और मन की शुद्धि: रणबीर नाथ उपाध्याय
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रामलीला मैदान दुर्गा पूजा महोत्सव में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के रामलीला मैदान में भारतीय पांडव सेना के तत्वावधान में चल रहे श्रीराम जन्मोत्सव एवं चैत्र नवरात्रि मां भगवती दुर्गा पूजा महोत्सव में मंगलवार को गायत्री यज्ञ एवं देवी पूजन कार्यक्रम श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ संपन्न हुए। श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुतियां दीं और मां भगवती का पूजन किया। देवी पूजन कर सुख-समृद्धि और शांति की कामना की गई।
भारतीय पांडव सेना के निदेशक रणबीर उपाध्याय ने बताया कि यह धार्मिक आयोजन 27 मार्च तक चलेगा, जिसमें प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन एवं प्रवचन आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि गायत्री यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि यह मानव जीवन को शुद्ध और सकारात्मक ऊर्जा से भरने का माध्यम भी है। यज्ञ के माध्यम से वातावरण शुद्ध होता है, जिससे समाज में सुख-शांति और समृद्धि का संचार होता है।
उन्होंने कहा कि वेदों में यज्ञ को सर्वोत्तम कर्म बताया गया है, जो व्यक्ति के मन, बुद्धि और आत्मा को पवित्र करता है। उपाध्याय ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वह यज्ञ और पूजा-पाठ जैसे धार्मिक कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लें।
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हस्तिनापुर। कस्बे के रामलीला मैदान में भारतीय पांडव सेना के तत्वावधान में चल रहे श्रीराम जन्मोत्सव एवं चैत्र नवरात्रि मां भगवती दुर्गा पूजा महोत्सव में मंगलवार को गायत्री यज्ञ एवं देवी पूजन कार्यक्रम श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ संपन्न हुए। श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुतियां दीं और मां भगवती का पूजन किया। देवी पूजन कर सुख-समृद्धि और शांति की कामना की गई।
भारतीय पांडव सेना के निदेशक रणबीर उपाध्याय ने बताया कि यह धार्मिक आयोजन 27 मार्च तक चलेगा, जिसमें प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन एवं प्रवचन आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि गायत्री यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि यह मानव जीवन को शुद्ध और सकारात्मक ऊर्जा से भरने का माध्यम भी है। यज्ञ के माध्यम से वातावरण शुद्ध होता है, जिससे समाज में सुख-शांति और समृद्धि का संचार होता है।
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उन्होंने कहा कि वेदों में यज्ञ को सर्वोत्तम कर्म बताया गया है, जो व्यक्ति के मन, बुद्धि और आत्मा को पवित्र करता है। उपाध्याय ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वह यज्ञ और पूजा-पाठ जैसे धार्मिक कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लें।