अनोखी परंपरा: नुकीले औजारों से शरीर बेधकर गांव में तख्त निकालते हैं युवक, यहां ऐसे मनाई जाती है ऐतिहासिक होली
Meerut News : मेरठ के बिजौली गांव में हर साल अनोखी परंपरा के तहत होली मनाई जाती है। इस गांव में हर साल युवकों का शरीर नुकीले औजारों से बेधकर तख्त निकाले जाते हैं।
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मेरठ के खरखौदा में सैकड़ों वर्ष से चली आ रही परंपरा के दौरान इस वर्ष भी क्षेत्र के गांव बिजौली में ऐतिहासिक होली मनाते हुए होली का रंग खेलने के बाद ग्रामीणों ने अलग-अलग मोहल्लों से पांच तख्त निकाले। इस दौरान सुरक्षा को लेकर भारी पुलिस बल मौजूद रहा।
जिला मुख्यालय से करीब 16 किलोमीटर की दूरी पर खरखौदा थाना क्षेत्र में गांव बिजौली में प्रतिवर्ष की तरह इस साल भी ऐतिहासिक होली मनाते हुए सैकड़ों वर्ष से चली आ रही परंपरा को आगे बढ़ाया।
वहीं, भारी पुलिस बल की मौजूदगी में गांव के अलग-अलग मोहल्लों से तख्त यात्रा निकाली गई। जिसमें पहला तख्त चौधर पेड़ा स्थित रवि दत्त त्यागी के आवास से, दूसरा तख्त गोला कुआं मोहल्ले से पंडित सरजीत शर्मा के आवास से, तीसरा व चौथा तख्त खेड़े वाले मोहल्ले से महेश त्यागी के आवास से निकाला गया।
इस दौरान पांचवां तख्त पचयाला मोहल्ले से अज्जू त्यागी के आवास से निकल गया। सभी तख्त बैंड-बाजे के साथ अपने-अपने मोहल्ले से होकर चौक में पहुंचे। प्रत्येक तख्त के आगे बैंड बाजे के साथ-साथ तलवारबाजी व लठ बाजी से करतब दिखाते हुए होलिका के जयकारे लगाते हुए चले।
प्राकृतिक आपदाओं से बचने के लिए निकाली जाती है यह यात्रा
धारणा है कि प्राचीन काल में मराठा साम्राज्य के राजा विजय सिंह ने बिजौली ग्राम की स्थापना की थी। अचानक एक दौर में गांव में आकाल, सूखा, बीमारियों का दौर शुरू हो गया। उधर, उसी समय गांव से बाहर खेड़े वाले मंदिर पर एक संत श्रोमणी बाबा गंगापुरी महाराज अपने संतों के साथ आए। राजा विजय सिंह इन प्राकृतिक आपदाओं से मुक्ति पाने के लिए बाबा गंगापुरी की शरण में पहुंचे। बाबा ने समस्त बिजौली ग्रामीणों के साथ होली माता की पूजा-अर्चना की और ग्रामीणों के साथ ढोल-नगाड़ों के साथ देवता रूपी युवकों को सजा कर, उनके अंग सोने के निर्मित औजरों से बेधकर तख्त पर खड़ा कर पूरे गांव में घुमाया।
हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है यह यात्रा
यह यात्रा मूल रूप से हिंदू समाज से जुड़ी हुई आस्था है। इस यात्रा में बेधने वाले युवक भी हिंदू समाज के ही होते हैं। लेकिन यात्रा में शामिल युवकों को बेधने के लिए प्रयोग होने वाले औजारों को मुस्लिम समाज द्वारा तैयार किया जाता है। पहले इस यात्रा में बेधने का कार्य भी मुस्लिम समाज द्वारा ही किया जाता था।
यात्रा में बाहरी पुलिस बल के साथ ग्रामीण ओंकार सिंह, कनेश्वर् त्यागी, सुरेंद्र त्यागी, ऋषि त्यागी, धीरज त्यागी, पंकज त्यागी, महेश त्यागी, संजय कुमार, प्रदीप प्रधान, रामकुमार शर्मा, शान्ने त्यागी, डब्बू त्यागी, नरेश गिरी, सुमित प्रधान, अशोक, वीरेंद्र, मुनि त्यागी, विरेश्वर् त्यागी, भूदेव त्यागी, धीरज गौतम प्रधान, वीरेंद्र शर्मा, नितिन शर्मा, पवन शर्मा, जयकिरण गुज्जर, करमवीर गुज्जर, पप्पू गिरी, सोनू गिरी, विपिन गिरी, बिने त्यागी, प्रशांत त्यागी, प्रदीप गुप्ता, अमरीश गुप्ता, विमल, अंकित, कालू त्यागी, मीनू खां, सलीम, संजय बाल्मीकि, डैनी त्यागी, ब्रहमदत्त फौजी, अरुण त्यागी, योगेश त्यागी, लालू त्यागी, बब्बू, श्याम सिंह, राजू त्यागी, पप्पू त्यागी, श्रवण कुमार, सावन त्यागी, एडवोकेट श्याम सुंदर एवं ग्रामीण मौजूद रहे।