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Meerut: सात मिनट में पहुंचे दौराला, आउटर रिंग रोड ने बदली तस्वीर, इंटरचेंज के बिना अधूरा सपना

गजेंद्र चाैधरी,अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Fri, 12 Jun 2026 10:08 AM IST
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सार

मेरठ में आउटर रिंग रोड के पहले चरण का निर्माण लगभग पूरा हो गया है। सलारपुर से दौराला का सफर अब महज सात मिनट में पूरा हो रहा है, लेकिन इंटरचेंज और अन्य चरणों का निर्माण अभी अधूरा है।

Meerut: Outer Ring Road Cuts Travel Time to Seven Minutes, Key Interchanges Still Pending
आउटर रिंग रोड मेरठ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मेरठ शहर के बाहरी क्षेत्र में पांच प्रमुख राजमार्गों को जोड़ने वाली आउटर रिंग रोड परियोजना का पहला चरण लगभग पूरा हो गया है। मवाना रोड स्थित सलारपुर-जलालपुर से दौराला तक का सफर अब महज सात मिनट में पूरा हो रहा है। नई सड़क पर वाहनों की रफ्तार बढ़ने से लोगों को राहत मिली है, हालांकि परियोजना के तीन अन्य चरणों का निर्माण अभी बाकी है।



पहले चरण से बढ़ी रफ्तार, घटा सफर का समय
करीब 34 किलोमीटर लंबी आउटर रिंग रोड परियोजना का पहला चरण मवाना रोड के सलारपुर-जलालपुर से राष्ट्रीय राजमार्ग-58 स्थित दौराला तक तैयार हो चुका है। इस मार्ग से बहचौला, सिखेड़ा, नंगला मुख्यतारपुर, मैथना, खनोदा, सोफीपुर-लावड़ मार्ग, अछौता, धंजू, देदुआ, मीठेपुर और भराला जैसे गांवों को बेहतर संपर्क मिला है। नई सड़क बनने से यात्रा का समय काफी कम हुआ है और आवागमन पहले की तुलना में अधिक सुगम हो गया है।
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गांवों की जमीनों के दाम में भारी उछाल
आउटर रिंग रोड का लाभ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को भी मिल रहा है। सड़क बनने के बाद इन गांवों की जमीनों की कीमतों में कई गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बेहतर संपर्क और विकास की संभावनाओं के कारण भूमि का मूल्य पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है।

इंटरचेंज नहीं बनने से पूरा लाभ नहीं मिल रहा
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण अब तक आउटर रिंग रोड से जुड़ने के लिए प्रस्तावित इंटरचेंज तैयार नहीं कर सका है। इसके चलते बड़ी संख्या में लोग इस मार्ग और गंगा एक्सप्रेसवे का पूरा लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। परियोजना के शेष हिस्सों में मवाना मार्ग से किला परीक्षितगढ़ मार्ग, गढ़ मार्ग, हापुड़ मार्ग और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे को जोड़ने का कार्य अभी अधूरा है।

तीन चरणों का निर्माण अब भी बाकी
कई स्थानों पर सड़क का निर्माण आंशिक रूप से हुआ है, जबकि कुछ हिस्सों में केवल मिट्टी डालने का कार्य किया गया है। जगह-जगह अवरोध होने के कारण निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा है। परियोजना की धीमी प्रगति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि जिस निर्माण कंपनी को कार्य सौंपा गया था, उसने बीच में ही काम छोड़ दिया, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

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