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सेंट्रल मार्केट: दुकानों को बचाने को 12 दिन से धरना, भाजपा से टूटा भरोसा, आज व्यापार की ‘तेरहवीं'

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 22 Apr 2026 11:45 AM IST
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सार

मेरठ के सेंट्रल मार्केट में दुकानों को बचाने के लिए 12 दिनों से धरने पर बैठी महिलाओं ने भाजपा के प्रति विश्वास टूटने की बात कहते हुए व्यापार की ‘तेरहवीं’ कर रहे हैं। प्रशासन के साथ हुई वार्ता भी बेनतीजा रही।

Meerut Protest: Women Sit on 12-Day Dharna to Save Shops, Announce ‘Last Rites’ of Their Business
मेरठ सेंट्रल मार्केट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मेरठ के सेंट्रल मार्केट स्थित तिरंगा रोड पर अपनी दुकानों को बचाने के लिए पिछले 12 दिनों से धरने पर बैठीं महिलाओं और व्यापारियों का धैर्य मंगलवार को टूट गया। व्यापारियों के परिवारों की महिलाओं ने भावुक होते हुए बुधवार को अपने व्यापार और सत्ताधारी दल भाजपा के प्रति विश्वास की ‘तेरहवीं’ करने का ऐलान कर दिया। आज सुबह व्यापारी सेंट्रल मार्केट में इकट्ठा हुए और व्यापारी की तेरहवीं में जुट गए।

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महिलाओं ने यह भी कहा कि अब धरना स्थल पर सभी राजनीतिक दलों और संगठनों के समर्थन का स्वागत किया जाएगा। वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए बुलाया, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका।
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यह भी पढ़ें: नीला ड्रम केस: फैसले का खौफ या आस्था, जेल में तीन दिन से उपवास पर थी मुस्कान, सजा के डर से आरोपी पूछ रहे सवाल

प्रेस वार्ता में महिलाओं ने प्रशासन पर निकाली भड़ास
धरने पर बैठीं महिलाओं ने मंगलवार शाम प्रेस वार्ता कर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर नाराजगी जताई। महिलाओं का कहना था कि उनका परिवार दशकों से भाजपा का कोर वोटर रहा है और उन्हें उम्मीद थी कि उनके चुने हुए प्रतिनिधि उनकी समस्याएं सुनने आएंगे।

लेकिन 12 दिनों के धरने के बावजूद कोई जनप्रतिनिधि उनसे मिलने नहीं आया। महिलाओं ने कहा कि उनके पतियों का व्यापार बर्बाद हो गया है और अब परिवारों पर संकट आ गया है। इसी के विरोध में उन्होंने बुधवार को सुबह 10 बजे हवन, दोपहर 12 बजे ब्रह्मभोज और शाम 3 बजे शोक सभा आयोजित करने की घोषणा की है।

Meerut Protest: Women Sit on 12-Day Dharna to Save Shops, Announce ‘Last Rites’ of Their Business
मेरठ सेंट्रल मार्केट - फोटो : अमर उजाला

डीएम के साथ वार्ता भी बेनतीजा
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम डॉ. वीके सिंह ने देर शाम व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल को बैठक के लिए बुलाया। इस बैठक में अंजनेय सिंह, राहुल मलिक और मनोज गर्ग सहित कई व्यापारी नेता शामिल हुए।

प्रशासन ने व्यापारियों से बुधवार को प्रस्तावित कार्यक्रम टालने का अनुरोध किया, लेकिन व्यापारियों ने स्पष्ट कर दिया कि महिलाएं अपने फैसले पर अडिग हैं और कार्यक्रम तय समय पर ही होगा।

अवैध निर्माण पर आवास विकास का कड़ा रुख
इधर आरटीओ रोड पर उप आवास आयुक्त अनिल कुमार सिंह और अधीक्षण अभियंता राहुल यादव ने टीम के साथ क्षेत्र का दौरा किया। अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे अनाधिकृत निर्माण स्वयं हटा लें। विभाग की ओर से जल्द नोटिस जारी कर दुकानदारों को निर्माण हटाने के लिए दो सप्ताह का समय दिया जाएगा।

स्कूलों की मान्यता रद्द होने पर अभिभावकों का विरोध
शहर के दो प्रमुख स्कूल-डीआरएस पब्लिक स्कूल और हैप्पी आवर्स स्कूल-की मान्यता रद्द होने और ऑनलाइन कक्षाएं बंद होने के विरोध में अभिभावकों ने भी डीएम से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा।

अभिभावकों का कहना है कि आवासीय भूखंडों पर करीब 40 स्कूल संचालित हो रहे हैं, लेकिन कार्रवाई केवल दो स्कूलों पर ही क्यों की गई। उन्होंने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए समान और न्यायसंगत कार्रवाई की मांग की।

Meerut Protest: Women Sit on 12-Day Dharna to Save Shops, Announce ‘Last Rites’ of Their Business
मेरठ सेंट्रल मार्केट - फोटो : अमर उजाला

छोटे व्यापारियों की लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट में
पूर्व पार्षद और व्यापारी नेता सतीश गर्ग ने कहा कि अल्प और दुर्बल आय वर्ग के मकानों में चलने वाली छोटी दुकानों के बंद होने से सैकड़ों परिवार प्रभावित होंगे। उन्होंने बताया कि इन व्यापारियों का पूरा ब्यौरा जुटाकर सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की जाएगी। इस संबंध में कमिश्नर, डीएम और आवास विकास के अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा गया है।

आज पुलिस के साथ बांटे जाएंगे नोटिस
आवास एवं विकास परिषद बुधवार से 815 भवनों को नोटिस देने की प्रक्रिया शुरू करेगा। इसके लिए लखनऊ से नगर नियोजन विभाग की टीम भी मेरठ पहुंच सकती है। अधिकारियों के अनुसार स्कीम नंबर 7 के अंतर्गत सेक्टर 1 से 13 तक आठ टीमों को तैनात कर पुलिस की मौजूदगी में नोटिस वितरित किए जाएंगे। नोटिस के साथ अवैध निर्माण का विवरण और सुप्रीम कोर्ट के आदेश भी संलग्न किए जाएंगे।

सेंट्रल मार्केट का ध्वस्तीकरण टलना तो संभव नहीं दिख रहा लेकिन राज्य सरकार अब भी कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर ऐसे विकल्पों की तलाश में जुटी है जिससे व्यापारियों को ज्यादा से ज्यादा राहत मिल सके। वर्षों पुराने इस विवाद का समाधान कानून के दायरे में ही तय होगा लेकिन सरकार की कोशिश है कि व्यापारियों का और नुकसान न हो।

सेंट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण का मामला 1989 से चल रहा है। इस मामले में कई स्तरों पर भ्रष्टाचार, अनियमितता और राजनीतिक हीला-हवाली रही। मामला सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक पहुंचा तो ध्वस्तीकरण की कार्रवाई जरूरी हो गई। इस मामले में विपक्षी दलों ने प्रदेश सरकार की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। जबकि सरकार का दावा है कि उन्होंने शुरुआत से ही प्रभावित व्यापारियों के हित में समाधान निकालने का प्रयास किया। 

मुख्यमंत्री ने सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों से मुलाकात की। मुख्यमंत्री योगी की ओर से उन्हें तीन विकल्प दिए गए थे ताकि उन्हें नुकसान से बचाया जा सके और कानूनी जटिलताओं के बीच कोई व्यावहारिक रास्ता निकले। पहले विकल्प के तहत प्रभावितों से कहा गया था कि वे खुद सरकार के साथ मिलकर पक्षकार बनें जिससे न्यायालय में उनका पक्ष मजबूत हो सके। दूसरे विकल्प में आवास विकास विभाग द्वारा निर्धारित कंपाउंडिंग शुल्क जमा करने की सलाह दी गई थी ताकि नियमों के अनुरूप समाधान खोजा जा सके और ध्वस्तीकरण को रोक जा सके।

तीसरा विकल्प यह था कि सुप्रीम कोर्ट के संभावित रुख को ध्यान में रखते हुए सेंट्रल मार्केट को छोड़ने का निर्णय लिया जाए और सरकार की पुनर्वास योजना को स्वीकार किया जाए जिसके तहत सभी प्रभावितों के पुनर्वास की जिम्मेदारी राज्य सरकार उठाने को तैयार थी। हालांकि इन तीनों विकल्पों पर सहमति नहीं बन सकी। इसी बीच सुप्रीम काेर्ट का आदेश आ गया। 

पूर्व की सरकारों ने अवैध निर्माणों को दिया बढ़ावा
इस मामले में राजनीति भी जमकर हो रही है। आरोप हैं कि पिछली जनता दल, सपा और बसपा सरकारों ने इन अवैध निर्माणों को न सिर्फ नजरअंदाज किया बल्कि उन्हें बढ़ावा भी दिया। खासकर 2013 से 2017 के बीच नियमों को ताक पर रखकर खूब निर्माण हुए। आज वही विपक्षी दल सरकार पर सवाल उठा रहे हैं जबकि मौजूदा सरकार खुद को जनता के साथ खड़ा बता रही है। सरकार का कहना है कि अवैध निर्माण को शह देने के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। 

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