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Mission 2027: मेरठ दक्षिण में दावेदारों की भरमार, इस सीट पर फंसा पेंच, लखनऊ में बढ़ती लॉबिंग ने गरमाया माहौल

Sat, 20 Jun 2026 11:19 AM IST
Dimple Sirohi अरीश रिज़वी, अमर उजाला, मेरठ
अरीश रिज़वी, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sat, 20 Jun 2026 11:19 AM IST
सार

मेरठ दक्षिण और हस्तिनापुर विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी में टिकट की दावेदारी को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। कई नेताओं की सक्रियता और लखनऊ में बढ़ती लॉबिंग ने पार्टी नेतृत्व की चुनौती बढ़ा दी है।

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Mission 2027: SP Ticket Race Intensifies, Multiple Claimants in Meerut South, Hastinapur Gets Complicated
सपा मुखिया अखिलेश यादव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

2027 के विधानसभा चुनाव में अभी समय बाकी है लेकिन मेरठ में राजनैतिक दलों ने अभी से अपनी चुनावी मशीनरी को सक्रिय कर दिया है। समाजवादी पार्टी में टिकट की लड़ाई अभी से दिलचस्प होती जा रही है। खासकर मेरठ दक्षिण और हस्तिनापुर विधानसभा सीट पर सियासी हलचल सबसे ज्यादा है।

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इन सीटों पर समीकरण इतने उलझ गए हैं कि पार्टी नेतृत्व के लिए भी किसी एक नाम पर मुहर लगाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। लखनऊ में बढ़ती लॉबिंग, नेताओं के लगातार दौरे और समर्थकों की सक्रियता ने सपा के भीतर चुनावी माहौल को गर्मा दिया है। 
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मेरठ दक्षिण
मेरठ दक्षिण सीट पर टिकट मांगने वालों की लाइन सबसे लंबी है। पार्टी के कई कद्दावर नेता आमने-सामने आ गए हैं। पहला नाम आदिल चौधरी का है। पिछले चुनावों में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने वाले आदिल अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं। वहीं, इस सीट पर गुर्जर वोटों की अहमियत को देखते हुए कर्मवीर गुमी, डॉ. किशन पाल गुर्जर और मुखिया गुर्जर के नाम भी मजबूती से चल रहे हैं।

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हस्तिनापुर सीट 
यहां सपा के भीतर ही नहीं बल्कि गठबंधन और विपक्षी धड़ों के बीच भी जबरदस्त शह-मात का खेल शुरू हो गया है। समाजवादी पार्टी से पूर्व विधायक योगेश वर्मा और पूर्व विधायक प्रभुदयाल वाल्मीकि दोनों ही टिकट के लिए जोर लगाए हुए हैं। दोनों नेताओं का इस क्षेत्र में मजबूत जनाधार है जिससे पार्टी असमंजस में है। कोई योगेश वर्मा का दावा मजबूत बता रहा है तो कोई प्रभुदयाल वाल्मीकि का। पिछले दिनों योगेश वर्मा ने फेसबुक लाइव कर ताल ठोकी थी।

चंद्रशेखर आजाद की एंट्री
हस्तिनापुर सीट पर मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। आजाद समाज पार्टी (आसपा) के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने भी यहां से ताल ठोक दी है। चंद्रशेखर की मौजूदगी ने दलित और पिछड़े वर्ग के वोटों के ध्रुवीकरण को एक नया मोड़ दे दिया है जिससे सपा के साथ-साथ भाजपा के रणनीतिकारों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

लखनऊ में लॉबिंग और आलाकमान की चुनौती
फिलहाल दावेदार राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश में जुटे हैं। वहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश का यह इलाका राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और निर्णायक माना जाता है। ऐसे में सपा नेतृत्व फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि मेरठ दक्षिण और हस्तिनापुर की इस सियासी खींचतान में बाजी किसके हाथ लगती है और अखिलेश यादव आंतरिक गुटबाजी को शांत कर किसे चुनावी मैदान में उतारते हैं।

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