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Education: एनसीईआरटी का बड़ा बदलाव, कक्षा 9 गणित में अब एपी, जीपी और प्रोबेबिलिटी जैसे एडवांस्ड टॉपिक शामिल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sat, 07 Mar 2026 10:44 AM IST
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सार

एनसीईआरटी ने कक्षा 9 के लिए संशोधित गणित पाठ्यक्रम का ड्राफ्ट जारी किया है, जो सत्र 2026-27 से लागू होगा। नए सिलेबस में एपी, जीपी और प्रोबेबिलिटी जैसे एडवांस्ड टॉपिक शामिल किए गए हैं और गणित को अधिक व्यावहारिक व तर्क आधारित बनाने पर जोर दिया गया है।

NCERT Major Update: AP, GP and Probability to be included in Class 9 Maths from 2026–27
एनसीईआरटी की पुस्तकों में बदलाव - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा-2023 (एनसीएफ-एसई 2023) के अनुरूप कक्षा 9 के लिए संशोधित गणित पाठ्यक्रम का ड्राफ्ट जारी कर दिया है। यह नया पाठ्यक्रम सत्र 2026-27 से लागू होगा, जिसमें गणित को अधिक व्यावहारिक, तर्क-आधारित और वास्तविक जीवन से जुड़ा बनाने पर जोर दिया गया है।

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पहले कक्षा 10वीं में पढ़ाया जाने वाला अरिथमेटिक प्रोग्रेशन (एपी) और कक्षा 11वीं का ज्योमेट्रिक प्रोग्रेशन (जीपी) अब कक्षा 9 में ही शामिल कर लिया गया है। साथ ही प्रायिकता (प्रोबेबिलिटी) और फाइनेंशियल मैथ्स से जुड़े वृद्धि-क्षय के पैटर्न पर एक अलग अध्याय जोड़ा गया है।
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कुल मिलाकर कक्षा 9 के गणित में अब 15 अध्याय होंगे, जबकि कुछ पुराने टॉपिक जैसे कंस्ट्रक्शन्स, पैरललोग्राम और त्रिभुज के क्षेत्रफल संबंधी अध्याय हटा दिए गए हैं। बचे हुए प्रमुख अध्यायों में संख्या पद्धति, बहुपद, निर्देशांक ज्यामिति, त्रिभुज, चतुर्भुज, वृत्त, हीरोन का सूत्र, पृष्ठीय क्षेत्रफल व आयतन और सांख्यिकी शामिल हैं।
 

गणित को ''सार्वभौमिक भाषा'' का दर्जा
नए पाठ्यचर्या में गणित को ''सार्वभौमिक भाषा'' बताया गया है, जो तर्क, रीजनिंग और पैटर्न के जरिए दुनिया को समझने का माध्यम है। संख्याएं, आकृतियां और उनके संबंध विद्यार्थियों को प्रकृति, तकनीक तथा रोजमर्रा की जिंदगी की प्रक्रियाओं को गहराई से समझने में मदद करेंगे। गणित सिर्फ सिद्धांत नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग, चिकित्सा, अर्थशास्त्र और सामाजिक विज्ञान की प्रगति का आधार है। यह क्रमिक रूप से विकसित होता है, जहां हर नई अवधारणा पुरानी जानकारी पर टिकी होती है। अन्य विषयों से अलग, गणित में सत्यता तर्क और प्रमाण पर आधारित है, न कि प्रयोग पर। अमूर्त विचारों से ही रॉकेट की गति, भवनों की डिजाइन और तकनीकी मॉडलिंग जैसे काम समझे जाते हैं।

गणित पढ़ाने के मुख्य उद्देश्य -तार्किक एवं विश्लेषणात्मक सोच विकसित करना
-समस्या समाधान की क्षमता मजबूत करना
-गणितीय विचारों को सही भाषा व प्रतीकों में व्यक्त करने की कला सिखाना
-गणित के प्रति रुचि और सम्मान जगाना
-इसे वास्तविक जीवन व अन्य विषयों से जोड़ना
-आत्मविश्वास, सटीकता और अनुशासन बढ़ाना
 

अभ्यास की केंद्रीय भूमिका
बीडीएस इंटरनेशनल स्कूल के प्रिंसिपल गोपाल दीक्षित (पूर्व सीबीएसई डिप्टी सिटी कोऑर्डिनेटर एवं गणित शिक्षक) के मुताबिक, नई पाठ्यचर्या में अभ्यास को बहुत महत्व दिया गया है। नियमित, समझ-आधारित और विविध अभ्यास से गणना दक्षता, समस्या हल करने की क्षमता और आत्मविश्वास बढ़ता है। सिर्फ ज्यादा सवाल हल करना नहीं, बल्कि समझ के साथ उद्देश्यपूर्ण प्रैक्टिस पर जोर है। गणित को विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग, कला और सामाजिक विज्ञान से जोड़कर पढ़ाया जाएगा, ताकि छात्र वास्तविक समस्याओं को बेहतर समझें और हल कर सकें।

ये बदलाव एनईपी-2020 और एनसीएफ-एसई 2023 की भावना के अनुरूप हैं, जो रट्टा मारने की बजाय समझ, अनुप्रयोग, कौशल और competency-based शिक्षा पर केंद्रित हैं। यह छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए मजबूत आधार देगा
 
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