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Meerut News: मां कात्यायनी की पूजा से होती है अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष की प्राप्ति
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प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत मंदिर
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- ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी मां कात्यायनी
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के पांडव टीले पर स्थित प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर में नवरात्र के छठे दिन आदिशक्ति मां दुर्गा के छठे स्वरुप मां कात्यायनी की विधिविधान से पूजा-अर्चना की गई। मंदिर के संस्थापक अध्यक्ष सुदेश कुमार ने बताया कि स्वर्ण जैसी कांति वाली और सिंह पर सवार मां कात्यायनी की पूजा अमोघ फल देने वाली मानी जाती है।
भक्तों ने अपनी इंद्रियों को वश में कर आज्ञा चक्र में मन लगाकर मां की आराधना की। सच्चे मन से मां की शरण में आने वाले भक्तों के जीवन से रोग, शोक और भय का नाश होता है। उन्हें धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की प्राप्ति होती है। आचार्य मुकेश शांडिल्य ने नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि मां की उपासना से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है। साथ ही रोग, शोक, संताप और भय सभी नष्ट हो जाते हैं। भक्तों ने जयंती माता मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की, जिसे पंडित चंद्र प्रकाश शुक्ला ने संपन्न कराया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के पांडव टीले पर स्थित प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर में नवरात्र के छठे दिन आदिशक्ति मां दुर्गा के छठे स्वरुप मां कात्यायनी की विधिविधान से पूजा-अर्चना की गई। मंदिर के संस्थापक अध्यक्ष सुदेश कुमार ने बताया कि स्वर्ण जैसी कांति वाली और सिंह पर सवार मां कात्यायनी की पूजा अमोघ फल देने वाली मानी जाती है।
भक्तों ने अपनी इंद्रियों को वश में कर आज्ञा चक्र में मन लगाकर मां की आराधना की। सच्चे मन से मां की शरण में आने वाले भक्तों के जीवन से रोग, शोक और भय का नाश होता है। उन्हें धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की प्राप्ति होती है। आचार्य मुकेश शांडिल्य ने नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि मां की उपासना से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है। साथ ही रोग, शोक, संताप और भय सभी नष्ट हो जाते हैं। भक्तों ने जयंती माता मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की, जिसे पंडित चंद्र प्रकाश शुक्ला ने संपन्न कराया।
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